UPSC Exam   »   Civil Uprisings before revolt of 1857   »   Anglo-Burmese Wars

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध | याण्डबू की संधि

आंग्ल-बर्मा युद्ध – यूपीएससी ब्लॉग के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: भारतीय इतिहास– अठारहवीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, मुद्दे।

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध | याण्डबू की संधि_40.1

आंग्ल-बर्मा युद्ध की पृष्ठभूमि

  • ब्रिटिश भारत एवं बर्मा के शासकों ने 1824 से 1885 के मध्य अनेक युद्ध लड़े, इससे पूर्व 1886 में बर्मा पर ब्रिटिश वर्चस्व स्थापित हुआ था।
    • प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध आंग्ल-बर्मा संघर्ष की शुरुआत थी।
  • कोनबांग राजवंश का शासन: इसने 1752 से 1885 तक बर्मा (वर्तमान म्यांमार) पर शासन किया।
  • थाईलैंड में असफल साहसिक कार्य: कोनबांग राजवंश ने 1765-1769 के दौरान वर्तमान थाईलैंड में सियाम (अयुथ्या साम्राज्य) पर आक्रमण करने तथा कब्जा करने का असफल प्रयास किया।
    • अयुथ्या साम्राज्य ने चीन से मदद की गुहार लगाई  एवं क्विंग राजवंश ने विस्तारवादी बर्मी शासकों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया।

 

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के कारण

  • कोनबांग राजवंश की महत्वाकांक्षाएं: थाईलैंड में विफलता के बाद, बर्मा ने अपना ध्यान पश्चिम की ओर अराकान (वर्तमान मणिपुर क्षेत्र) की ओर स्थानांतरित कर दिया।
    • अराकान बंगाल की पूर्वी सीमा थी जो मुगल काल से ही अत्यधिक स्वतंत्र थी।
    • राजा बोदवपया की बर्मी सेना ने अराकान में प्रवेश किया एवं 1813 में आधुनिक मणिपुर तथा 1817-19 में असम पर कब्जा कर लिया।
    • अब बर्मा साम्राज्य अंग्रेजों से आमने-सामने आ गया क्योंकि वे अब बंगाल की सीमा के करीब आ गए थे।
  • दोषपूर्ण-परिभाषित सीमा: ब्रिटिश भारत एवं बर्मा के  मध्य सीमा पर स्पष्टता के अभाव के साथ-साथ दोनों पक्षों की विस्तारवादी मानसिकता के कारण उनके मध्य निरंतर संघर्ष हुए।
    • सीमा विवाद के बहाने को दोनों ने अपनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल किया, जिससे प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध हुआ।

 

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध का गति क्रम

  • लॉर्ड एमहर्स्ट 1823 में ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर-जनरल के रूप में भारत आया जिसने फरवरी 1824 में बर्मा पर आक्रमण करने का निर्णय लिया।
  • पूर्व में शाहपुरी द्वीप के कब्जे को लेकर एक संघर्ष का उदय हुआ जो अंग्रेजों के कब्जे में था।
    • बर्मी ने अंग्रेजों को वापस करने से पूर्व कुछ समय के लिए शाहपुरी द्वीप पर हमला किया एवं कब्जा कर लिया।
    • हालांकि, इसने लॉर्ड एमहर्स्ट को संतुष्ट नहीं किया जो बर्मा पर हमला करने का बहाना ढूंढ रहे थे।
  • दो मोर्चा युद्ध: अंग्रेजों ने बर्मा पर दो तरफ से हमला किया।
    • एक सेना उत्तर-पूर्व के भू-मार्ग से आगे बढ़ी।
    • दूसरी सेना ने समुद्र के किनारे से रंगून पर हमला किया।
  • जंगल युद्ध: बर्मा के जंगलों में अंग्रेजों को भारी बाधाओं का सामना करना पड़ा। वर्षा ऋतु के आरंभ होने के साथ ही यह स्थिति और गंभीर हो गई थी।
    • बर्मी सेनापति महा बुंदेला ने चटगांव के पास रामू में अंग्रेजों को पराजित किया।
    • किंतु, दक्षिण में, अंग्रेजों ने मई 1824 में सरलता से रंगून पर कब्जा कर लिया।
    • दक्षिण में बर्मा के राजा ने महा बुंदेला को वापस बुला लिया। हालांकि, वह 15 दिसंबर, 1824 को एक युद्ध में अंग्रेजों से पराजित हो गया था।
  • असम एवं निचले बर्मा पर कब्जा: अंग्रेजों ने 1825 में असम पर विजय प्राप्त कर ली एवं रंगून से आगे  बढ़ गए।
    • अंग्रेजों ने निचले बर्मा की राजधानी प्रोम पर कब्जा कर लिया।
  • शांति के लिए वार्ता: कुशल बर्मी सेनापति, महा बुंदेला 1825 में एक युद्ध में मारे गए, जिससे बर्मा को अंग्रेजों के साथ शांति की तलाश करने हेतु बाध्य होना पड़ा।
    • बर्मा ने शांति के लिए वार्ता तब आरंभ की जब अंग्रेज बर्मा की राजधानी याण्डबू से मात्र साठ मील की दूरी पर थे।
    • इसके परिणामस्वरूप 1826 में याण्डबू की संधि हुई।

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध | याण्डबू की संधि_50.1

याण्डबू की संधि

  • याण्डबू की संधि पर फरवरी, 1826 में दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए।
  • याण्डबू की संधि की प्रमुख शर्तें: 
    • बर्मा ने असम, कछार एवं जयंतिया पर अपने सारे दावों का परित्याग कर दिया।
    • इसने अराकान, ये, तवॉय, मेरगुई तथा तेनासरीम को अंग्रेजों के सुपुर्द कर दिया।
    • इसने मणिपुर को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्वीकार किया एवं गंभीर सिंह को इसके शासक के रूप में स्वीकार करने के लिए सहमत हो गया।
    • यह अंग्रेजों को युद्ध में डेढ़ करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने पर सहमत हुआ।
    • दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को मित्र के रूप में स्वीकार किया, एक-दूसरे के राजदूतों की प्रतिनियुक्त एवं स्वीकार करने के लिए  तथा एक वाणिज्यिक संधि प्रारंभ करने के लिए भी सहमत हुए।

 

Sharing is caring!

Thank You, Your details have been submitted we will get back to you.

Leave a comment

Your email address will not be published.