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एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग

एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग- यूपीएससी परीक्षा  हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं अंतः क्षेप एवं उनकी अभिकल्पना तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
  • जीएस पेपर 3: पर्यावरण- संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण।

 

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एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग- संदर्भ

  • हाल ही में, एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की खराब होती वायु गुणवत्ता के मद्देनजर आज आकस्मिक आधार पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई।
  • एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग ने दिल्ली-एनसीआर की वर्तमान प्रतिकूल वायु गुणवत्ता में योगदान देने वाले 5 अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान की है। वे हैं-
  1. धान की पराली जलाने की घटनाएं;
  2. निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) गतिविधियों से उत्पन्न धूल;
  3. सड़कों एवं खुले क्षेत्रों से उत्पन्न धूल;
  4. वाहन प्रदूषण; तथा
  5. औद्योगिक प्रदूषण

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) – विशेषज्ञ उप-समिति की एक रिपोर्ट

एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग- प्रमुख बिंदु

  • एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग के बारे में: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग, अधिनियम 2021 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है।
    • इससे पूर्व, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश, 2021 की घोषणा के माध्यम से आयोग का गठन किया गया था।
    • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग, अधिनियम 2021 ने भी 1998 में एनसीआर में स्थापित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को भंग कर दिया।
  • अधिदेश: वायु गुणवत्ता सूचकांक के आसपास की समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान एवं समाधान को सुनिश्चित करने हेतु एवं उससे जुड़े या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए।
  • विस्तार क्षेत्र: एनसीआर से सटे हरियाणा, पंजाब, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश राज्यों में आसपास के क्षेत्रों को ऐसे क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया गया है जहां प्रदूषण का कोई भी स्रोत एनसीआर में वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
  • संरचना: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे:
  1. एक अध्यक्ष,
  2. सदस्य-सचिव एवं मुख्य समन्वय अधिकारी के रूप में संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी,
  3. एक पूर्णकालिक सदस्य के रूप में केंद्र सरकार से वर्तमान में सेवारत या पूर्व संयुक्त सचिव,
  4. वायु प्रदूषण से संबंधित विशेषज्ञता वाले तीन स्वतंत्र तकनीकी सदस्य, एवं
  5. गैर-सरकारी संगठनों से तीन सदस्य।
    • आयोग निम्नलिखित पदेन सदस्यों को भी सम्मिलित कर सकता है:
      1. केंद्र सरकार एवं संबंधित राज्य सरकारों की ओर से, एवं
      2. सीपीसीबी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन एवं नीति आयोग के तकनीकी सदस्य।
      3. कुछ मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को भी नियुक्त कर सकता है।
    • कार्यकाल: आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होगा।
    • नियुक्ति हेतु चयन समिति: आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की सिफारिश करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा गठित की जाएगी। समिति में शामिल होंगे-
      • अध्यक्ष- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रभारी मंत्री।
      • समिति के सदस्यों में शामिल होंगे-
        • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री,
        • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री,
        • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, तथा
        • कैबिनेट सचिव।
      • उप-समितियां: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग द्वारा उप-समितियां निर्मित करने की अनिवार्यता है-
        • आयोग के एक सदस्य की अध्यक्षता में अनुश्रवण एवं अभिनिर्धारण।
        • आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में सुरक्षा एवं प्रवर्तन तथा
        • आयोग के एक तकनीकी सदस्य की अध्यक्षता में अनुसंधान एवं विकास।

एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग- प्रमुख कार्य

  • संबंधित राज्य सरकारों (दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश) द्वारा अध्यादेश के अंतर्गत की गई कार्रवाई का समन्वय करना,
  • एनसीआर में वायु प्रदूषण को रोकने एवं नियंत्रित करने की योजना निर्मित करना एवं उसे क्रियान्वित करना,
  • वायु प्रदूषकों के अभिनिर्धारण के लिए एक ढांचा प्रदान करना,
  • तकनीकी संस्थानों के साथ नेटवर्किंग के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास का संचालन करना,
  • वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए प्रशिक्षण एवं एक विशेष कार्यबल तैयार करना, एवं
  • विभिन्न कार्य योजनाएँ तैयार करना जैसे वृक्षारोपण में वृद्धि करना एवं पराली जलाने का समाधान करना।

 

डब्ल्यूएचओ वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशा निर्देश 2021

एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग- मुख्य शक्तियां

  • वायु गुणवत्ता को दुष्प्रभावित करने वाली गतिविधियों को प्रतिबंधित करना,
  • वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित जांच एवं अनुसंधान करना,
  • वायु प्रदूषण को रोकने एवं नियंत्रित करने हेतु संहिता एवं दिशा निर्देश तैयार करना, एवं
  • निरीक्षण, या विनियमन सहित मामलों पर निर्देश जारी करना जो संबंधित व्यक्ति या प्राधिकरण के लिए बाध्यकारी होगा।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग पराली जलाने से प्रदूषण फैलाने वाले किसानों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति लागू कर सकता है एवं उनसे वसूली कर सकता है।
    • यह क्षतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी।

स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार

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