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प्रासंगिकता
- जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं अवक्रमण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।
प्रसंग
- हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के निर्देशाधीन विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने प्रमुख वैश्विक साझेदार संगठनों के एक समूह से नवीनतम जलवायु विज्ञान से संबंधित अद्यतनों को एक साथ लाने हेतु यूनाइटेड इन साइंस 2021 शीर्षक से एक रिपोर्ट तैयार की।

मुख्य बिंदु
- यूनाइटेड इन साइंस 2020 रिपोर्ट, अपनी श्रृंखला में द्वितीय, वैश्विक नीति एवं कार्रवाई को प्रेरित करने हेतु जलवायु परिवर्तन से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक डेटा एवं निष्कर्ष प्रस्तुत करती है।
- यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा, ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट, जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी), यूनेस्को के अंतर सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम एवं यूके मौसम कार्यालय से निविष्ट (इनपुट) के साथ समन्वित है।
प्रमुख निष्कर्ष
विश्व मौसम विज्ञान संगठन
- वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड गैस की सांद्रता ने 2020 में चरम पर पहुंचने का कोई संकेत प्रदर्शित नहीं किया एवं नए स्तरों (रिकॉर्ड) तक बढ़ना जारी रखा है।
- कोविड-19 के कारण उत्सर्जन में कमी वायुमंडलीय सांद्रता में वृद्धि की दर को मात्र थोड़ा ही प्रभावित करेगी, इसलिए जलवायु परिवर्तन को स्थिर करने हेतु उत्सर्जन में निरंतर कमी करके निवल (शुद्ध) शून्य करना आवश्यक है।
वैश्विक कार्बन परियोजना
- 2020 मेंकार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कोविड-19 परिरोध नीतियों के कारण 2020 में अनुमानित रूप से 4% से 7% तक गिर जाएगा।
- अप्रैल 2020 के प्रारंभ में चरम लॉकडाउन के दौरान, 2019 की तुलना में दैनिक वैश्विक जीवाश्म कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में अभूतपूर्व 17% की कमी आई है।
यूएन एमिशन गैप रिपोर्ट
- रिपोर्ट से ज्ञात होता है कि 2020 से 2030 तक प्रति वर्ष आवश्यक वैश्विक उत्सर्जन में कटौती 2 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य के लिए 3% के करीब है एवं पेरिस समझौते के 5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य हेतु प्रति वर्ष औसतन 7% से अधिक है।
वैश्विक जलवायु की स्थिति
- 2016–2020 के लिए औसत वैश्विक तापमान रिकॉर्ड पर सर्वाधिक गर्म होने की संभावना है, 1850-1900 के स्तर से लगभग 1डिग्री सेल्सियस ऊपर, एवं 2011-2015 के वैश्विक औसत तापमान की तुलना में 0.24° डिग्री सेल्सियस गर्म है।
जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल
- 1970 के पश्चात से वैश्विक महासागर निरंतर प्रचंड रूप से गर्म हो गया है एवं जलवायु प्रणाली में 90% से अधिक अतिरिक्त ऊष्मा ग्रहण कर चुका है।
- हाल के दशकों में ग्रीनलैंड एवं अंटार्कटिक के बर्फ की चादरों से हिम के क्षीण होने की बढ़ती दरों के साथ-साथ ग्लेशियर की व्यापक पैमाने पर हानि एवं महासागरीय तापीय विस्तार के कारण वैश्विक औसत समुद्र-स्तर में वृद्धि हो रही है।
जलवायु एवं जल संसाधन
- 2050 तक बाढ़ के जोखिम वाले लोगों की संख्या 2 अरब के वर्तमान स्तर से बढ़कर 1.6 अरब हो जाएगी।
- 2010 के मध्य तक, वैश्विक आबादी का 27% संभावित रूप से गंभीर रूप से जल के अभाव वाले क्षेत्रों में निवास करता था।
- 2050 में व्यक्तियों की यह संख्या 7 बिलियन से बढ़कर 3.2 बिलियन हो जाएगी।


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