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यूनेस्को की भारत के लिए शिक्षा की स्थिति रिपोर्ट 2021

प्रासंगिकता

  • जीएस 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

 

प्रसंग

  • यूनेस्को ने हाल ही में भारत के लिए ‘स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट 2021: नो टीचर नो क्लासजारी की है।

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प्रमुख निष्कर्ष

जीईआर पर

  • यूनेस्को की शिक्षा की स्थिति की रिपोर्ट कहती है कि प्राथमिक विद्यालयों के लिए सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2001 में 6 से बढ़कर 2018-19 में 93.03 और 2019-2020 में 102.1 हो गया है।
  • 2019-20 में प्रारंभिक शिक्षा के लिए समग्र प्रतिधारण6 प्रतिशत और माध्यमिक शिक्षा के लिए 59.6 प्रतिशत है।

तकनीकी मुद्दे

  • संपूर्ण भारत में विद्यालयों में कंप्यूटिंग उपकरणों की कुल उपलब्धता 22 प्रतिशत है, ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों (43 प्रतिशत) की तुलना में अत्यंत कम व्यवस्था (18 प्रतिशत) है।
  • संपूर्ण भारत में विद्यालयों में इंटरनेट की पहुंच 19 प्रतिशत– शहरी क्षेत्रों में 42 प्रतिशत की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 14 प्रतिशत है।

समग्र शिक्षा योजना 2.0

कार्यबल के मुद्दे

  • यूनेस्को की रिपोर्ट 2021 के अनुसार, कार्यबल में 10 लाख से अधिक शिक्षकों का अभाव है (वर्तमान छात्र संख्या के आधार पर), एवं इसके समग्र रूप से वृद्धि करने की संभावना है।
  • व्यवस्था में शिक्षकों की कुल संख्या 2013-14 में 9 मिलियन शिक्षकों से 17 प्रतिशत बढ़कर 2018-19 में 9.4 मिलियन हो गई।

छात्र-शिक्षक अनुपात

  • समग्र छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) – आरटीई अधिनियम शिक्षक-आवश्यकता दिशानिर्देशों को पूरा करने के लिए राज्य के प्रयास को दर्शाता है – जो 2013-14 में 31:1 से बदलकर 2018-19 में 26:1 हो गया।

गुजरात सरकार का मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस  प्रोजेक्ट 

महिला कार्यबल

  • भारत के 43 मिलियन विद्यालयी शिक्षकों में से आधी महिलाएं हैं। कार्यबल में महिला शिक्षकों के अनुपात में राज्य दर राज्य अत्यधिक भिन्नता है।

 

यूनेस्को की दस संस्तुतियां

  • सरकारी एवं निजी दोनों विद्यालयों में शिक्षकों के नियोजन की शर्तों में सुधार करना
  • पूर्वोत्तर राज्यों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं ‘आकांक्षी जिलों’ में शिक्षकों की संख्या में वृद्धि करना एवं कार्य की दशाओं में सुधार करना।
  • शिक्षकों को अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता के रूप में अभिनिर्धारित करना।
  • शारीरिक शिक्षा, संगीत, कला, व्यावसायिक शिक्षा, शैशव एवं विशेष शिक्षा हेतु शिक्षकों की संख्या में वृद्धि करना।
  • शिक्षकों की पेशेवर स्वायत्तता को महत्व दें।
  • शिक्षकों के वृत्ति विकास (करियर) के मार्ग निर्मित करना।
  • सेवा-पूर्व पेशेवर विकास का पुनर्गठन और पाठ्यचर्या एवं शैक्षणिक सुधार को सुदृढ़ करना।
  • पेशे के समुदायों का समर्थन करें।
  • शिक्षकों को अर्थपूर्ण आईसीटी प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • पारस्परिक जवाबदेही के आधार पर परामर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से शिक्षण शासन का विकास करना।

शिक्षा के केंद्र में शांति

 

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