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लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी)

गांठदार त्वचा रोग (लम्पी स्किन डिजीज/एलएसडी) – यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- स्वास्थ्य, शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास  एवं प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

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लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) चर्चा में क्यों है?

  • गुजरात एवं राजस्थान सहित अनेक राज्य गांठदार त्वचा रोग (लम्पी स्किन डिजीज/एलएसडी) के प्रकोप से जूझ रहे हैं, जो मवेशियों का एक विषाणु जनित (वायरल) संक्रमण है।

 

हाल के दिनों में गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) का प्रसार

  • 2019 के बाद से, भारत के 20 राज्यों में गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) के प्रकोप की सूचना मिली है। इस वर्ष 23 अप्रैल को कच्छ में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) का पहला मामला सामने आने के बाद से, गांठदार त्वचा रोग गुजरात के 33 जिलों में से 26 में फैल गया है एवं 4,000 से अधिक मवेशियों की मृत्यु का कारण बना है।
  • राजस्थान में, लगभग 27,000 पशुओं की कथित तौर पर लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) के कारण मृत्यु हुई है।

 

गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) दुनिया भर में व्यापकता

  • खाद्य एवं कृषि संगठन (फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन/एफएओ) की रिपोर्ट के अनुसार, लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) लंबे समय से उप-सहारा अफ्रीका तक ही सीमित था।
    • यद्यपि, विगत एक दशक में, यह मध्य पूर्व एवं तुर्की में प्रसारित हो गया।
  • 2015 के बाद से, इसने बाल्कन (दक्षिण-पूर्वी यूरोप) देशों, कॉकस (पूर्वी यूरोप) तथा रूस को प्रभावित किया है।
  • गांठदार त्वचा रोग (लम्पी स्किन डिजीज/एलएसडी) ने जुलाई 2019 में भारत, बांग्लादेश एवं चीन में प्रवेश किया।

 

गांठदार त्वचा रोग (लम्पी स्किन डिजीज/एलएसडी)

  • लम्पी स्किन डिजीज के बारे में: गांठदार त्वचा रोग (लम्पी स्किन डिजीज/एलएसडी) गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) के कारण होता है, जो कि पॉक्सविरिडे कुल में कैप्रिपोक्सवायरस प्रजाति (जीनस) का एक विषाणु है।
    • शीपपॉक्स वायरस एवं गोटपॉक्स वायरस कैप्रिपोक्सवायरस प्रजाति के अन्य सदस्य हैं।
  • प्रभावित पशु: गांठदार त्वचा रोग निशाने (लम्पी स्किन डिजीज वायरस/एलएसडीवी) मुख्य रूप से मवेशियों – गाय तथा उसकी संतानों एवं एशियाई जल भैंसों को प्रभावित करता है।
  • पुनरावृतिक घटना: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन/एफएओ) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, एलएसडी का प्रकोप अनेक वर्षों के अंतराल में महामारियों के रूप में होता है।
    • रिपोर्ट के अनुसार, वायरस के लिए एक विशिष्ट आशय का अस्तित्व ज्ञात नहीं है एवं न ही यह ज्ञात है कि महामारी के बीच विषाणु किस प्रकार एवं कहाँ जीवित रहता है।

 

गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) – यह किस प्रकार प्रसारित होता है?

  • गांठदार त्वचा रोग विषाणु (एलएसडीवी) रक्त-चूसक रोगवाहकों (वैक्टर) जैसे कि घरेलू मक्खियों, मच्छरों इत्यादि जैसे किलनियों (टिक्स) तथा चिचड़ियों (माइट्स) से फैलता है।
  • गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) भी दूषित जल, चारे एवं पशु आहार से प्रसारित होता है।
  • मॉनसून के दौरान मच्छरों एवं घरेलू मक्खियों का संक्रमण अपने चरम पर रहता है तथा पशु चिकित्सा वैज्ञानिक एवं सरकारी अधिकारी इस वर्ष गुजरात में संक्रमण के तेजी से प्रसारित होने के लिए अत्यंत आद्र जुलाई को जिम्मेदार ठहराते हैं।
  • वैज्ञानिक वायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास में संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करने की सलाह देते रहे हैं।

 

गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) के लक्षण

  • एलएसडीवी एक पशु  के परिसंचरण तंत्र पर हमला करता है एवं यकृत, फेफड़े, प्लीहा,  लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) इत्यादि जैसे विभिन्न अंगों में रक्त वाहिकाओं  तथा घावों की वाहिकाशोथ (वैस्कुलाइटिस) या सूजन का कारण बनता है।
    • बदले में, यह अधिचर्म (एपिडर्मिस) का कारण बनता है, जिससे त्वचा की बाहरी सतह त्वचा (डर्मिस) – त्वचा की आंतरिक परत से अलग हो जाती है।
    • यह बदले में, किसी पशु के शरीर पर गांठों या पर्विकाओं का निर्माण करता है।
  • अन्य लक्षणों में बुखार, बलगम स्राव में वृद्धि, भूख न लगना इत्यादि हैं।

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गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) टीकाकरण एवं उपचार- सरकारी प्रतिक्रिया

  • टीकाकरण: एलएसडी एक विषाणु जनित (वायरल) रोग है, एक बार जब कोई पशु विषाणु से संक्रमित हो जाता है तो इसके निदान हेतु कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है एवं इसलिए टीकाकरण सर्वाधिक प्रभावी उपकरण है।
    • गोट पॉक्स का टीका: राज्य सरकार स्वस्थ मवेशियों को प्रकोप के पांच किलोमीटर के दायरे में चक्रिक रुप गोट पॉक्स टीका लगाकर उनका टीकाकरण कर रही है।
    • 23 अगस्त तक, सरकार ने 47.53 लाख मवेशियों का टीकाकरण किया था एवं लम्पी स्किन डिजीज से लगभग 87,000 मवेशी पहले ही स्वस्थ हो चुके हैं।
  • उपचार: चूंकि गांठदार त्वचा रोग (लम्पी स्किन डिजीज/एलएसडी) के लिए कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, पशु चिकित्सक भी मवेशियों में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) के लक्षणों को कम करने के लिए दवाएं दे रहे हैं।
    • सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में पशु मेलों एवं एवं प्रदर्शनियों तथा मवेशियों के परिवहन पर रोक लगाते हुए शहरी क्षेत्रों में जंगली मवेशियों के लिए अलगाव केंद्र स्थापित करने की सुविधा प्रदान की है।

 

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