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कार्बी-आंगलोंग समझौता

प्रासंगिकता

  • जीएस 3: विकास एवं उग्रवाद के प्रसार के मध्य संबंध।

 

प्रसंग

  • केंद्र सरकार ने प्रदेश में हिंसा को समाप्त करने हेतु कार्बी-आंगलोंग क्षेत्र में पांच विद्रोही समूहों तथा असम सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

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समझौते के मुख्य बिंदु

  • कार्बी आंगलोंग समझौते का उद्देश्य निम्नलिखित सुनिश्चित करना है:
    • कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को अधिकाधिक स्वायत्तता का हस्तांतरण सुनिश्चित करना;
    • कार्बी लोगों की पहचान, भाषा, संस्कृति इत्यादि की सुरक्षा;
    • असम की क्षेत्रीय एवं प्रशासनिक अखंडता को प्रभावित किए बिना परिषद क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • बदले में, सशस्त्र समूह हिंसा को समाप्त करेंगे तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सम्मिलित होंगे जबकि सरकार उनके कार्यकर्ताओं के पुनर्वास की सुविधा प्रदान करेगी।
  • क्षेत्र के विकास के पूरक परियोजनाओं हेतु पांच वर्षों में 1000 करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज प्रदान किया जाएगा।
  • असम सरकार केएएसी क्षेत्र के बाहर निवास करने वाले कार्बी लोगों के केंद्रित विकास के लिए एक कार्बी कल्याण परिषद की स्थापना करेगी।
  • वर्तमान समझौता क्षेत्र से 1000 से अधिक उग्रवादियों के आत्मसमर्पण के बाद से पांच समूहों के साथ वार्ता का परिणाम है।

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5 विद्रोही समूह

  • हस्ताक्षरकर्ता निम्नलिखित संगठनों के प्रतिनिधि थे
    • कार्बी लोंगरी नॉर्थ कछार हिल्स लिबरेशन फ्रंट (केएलएनएलएफ),
    • पीपुल्स डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी (पीडीसीके),
    • यूनाइटेड पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (यूपीएलए),
    • कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स(केपीएलटी)
    • कुकी लिबरेशन फ्रंट (केएलएफ)।

 

महत्व

  • कार्बी एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा। छठी अनुसूची क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है।
  • यह मैदानी इलाकों में निवास करने वाले कार्बी लोगों को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा देगा।

कार्बी आंगलोंग में मुद्दे

  • विभिन्न नृजातीयता
    • कार्बी आंगलोंग राज्य का सर्वाधिक वृहद जिला है एवं विभिन्न नृजातियों एवं जनजातीय समूहों – कार्बी, दिमासा, बोडो, कुकी, हमार, तिवा, गारो, मान (ताई बोलने वाले), रेंगमा नागा का समूह है।
    • इसकी विविधता ने विभिन्न संगठनों का निर्माण किया एवं एक उग्रवाद को बढ़ावा दिया जिसने इस क्षेत्र का विकास नहीं होने दिया।
  • अलग राज्य की मांग
    • कार्बी 1946 से अलग राज्य की मांग कर रहे हैं।
    • बाद में, उनके आंदोलन ने एक विद्रोह का रूप ले लिया जो 1990 के दशक में तेज हो गया।
    • केंद्र सरकार ने विभिन्न समूहों के साथ विभिन्न संघर्ष विराम समझौतों पर हस्ताक्षर किए किंतु गुट सदैव अलग-अलग थे जिन्होंने सशस्त्र संघर्ष जारी रखा।

 

कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद

  • 1995 में, कार्बी आंगलोंग एवं पश्चिमी कार्बी आंगलोंग जिले जैसे क्षेत्रों मेंनिवास करने वाले जनजातियों के विकास एवं संरक्षण हेतु भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत कार्बी-आंगलोंग स्वायत्त परिषद की स्थापना की गई थी।

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