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भारत-स्वीडन नवाचार बैठक

भारत-स्वीडन नवाचार बैठक: प्रासंगिकता

  • जीएस 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े एवं / या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

भारत-स्वीडन नवाचार बैठक: प्रसंग

  • हाल ही में, 8वां भारत-स्वीडन इनोवेशन डे मीट ‘एक्सेलरेटिंग इंडिया स्वीडन ग्रीन ट्रांजिशन’ विषय पर आयोजित किया गया था।

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भारत-स्वीडन नवाचार बैठक: मुख्य बिंदु

  • ऊर्जा क्षेत्र में भारत एवं स्वीडन का सहयोग जीवाश्म ईंधन मुक्त अर्थव्यवस्था के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में एक लंबा सफर तय करेगा।
  • अप्रैल 2018 में हमारे प्रधानमंत्री की स्टॉकहोम यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में अभिनिर्धारित किया गया था, क्योंकि भारत स्वच्छ ऊर्जा हेतु प्रौद्योगिकी समाधान की तलाश में है।
  • बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए अनेक महत्वपूर्ण विषय वस्तुओं जैसे स्मार्ट सिटी, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण सहित इंटरनेट ऑफ थिंग्स,  यांत्रिक अभिगम (मशीन लर्निंग), वृत्तीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) इत्यादि का अभिनिर्धारण किया गया।
  • 2021-2022 के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा स्वीडिश विनोवा द्वारा स्वास्थ्य विज्ञान एवं अपशिष्ट से धन जैसे विषयों सहित वृत्तीय अर्थव्यवस्था पर एक नया संयुक्त आह्वान किया गया था।
  • आईसीएमआर इंडिया एवं स्वीडिश फोर्टे ने भी 2021-2022 में व्यापक विषयों जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोकथाम एवं स्वास्थ्य संवर्धन संगठन एवं बुजुर्गों की देखभाल के प्रावधान पर नवीन आह्वान प्रारंभ करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • इसके अतिरिक्त, जैव प्रौद्योगिकी विभाग पहले से ही ऊष्मायित्र संपर्क (इन्क्यूबेटर कनेक्ट),  डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं (डिजिटल हेल्थ केयर) एवं  वैश्विक जैव इंडिया (ग्लोबल बायो इंडिया) कार्यक्रमों पर स्वीडिश भागीदारों के साथ जुड़ा हुआ है, जिससे जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में भागीदारी को बढ़ाया जा सके।
  • दो देशों के मध्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग, द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण घटक है, जिसे 9 दिसंबर 2005 को स्टॉकहोम में हस्ताक्षरित भारत-स्विस अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से आरंभ किया गया था।
  • यद्यपि इस समझौते में सहयोग के प्रावधान हैं। इसमें अन्य के साथ वैज्ञानिकों, स्नातक छात्रों, शोध कर्मियों, प्रौद्योगिकीविदों, अन्य विशेषज्ञों एवं विद्वानों का आदान-प्रदान शामिल है।

अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुआ 

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