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भारत में विदेशी मुद्रा भंडार: प्रासंगिकता
- जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

भारत में विदेशी मुद्रा भंडार: संदर्भ
- हाल ही में जारी आरबीआई साप्ताहिक डाटा के अनुसार, 21 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 8 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।
भारत में घटते विदेशी मुद्रा भंडार: प्रमुख बिंदु
- 3 सितंबर, 2021 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 453 बिलियन डॉलर के जीवनकाल के उच्चतम स्तर के मुकाबले 634.287 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
- कारण: विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का एक कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों (फॉरेन करेंसी एसेट्स/ एफसीए) में गिरावट है, जो समग्र भंडार का एक महत्वपूर्ण घटक है।
- समीक्षाधीन सप्ताह में एफसीए 155 अरब डॉलर घटकर 569.582 अरब डॉलर रह गया।
- एफसीए में विदेशी मुद्रा भंडार में धारित किए गए यूरो, पाउंड एवं येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के अधिमूल्यन (मूल्य वृद्धि) अथवा अवमूल्यन (मूल्यह्रास) का प्रभाव शामिल है।
- दिलचस्प बात यह है कि समान अवधि के दौरान स्वर्ण भंडार 567 मिलियन डॉलर बढ़कर 337 अरब डॉलर हो गया।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास विशेष आहरण अधिकार (स्पेशल ड्राइंग राइट्स/एसडीआर) 68 मिलियन डॉलर गिरकर 152 बिलियन डॉलर हो गया।
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विदेशी मुद्रा भंडार का प्रभाव
- विदेशी मुद्रा भंडार में कमी से सरकार तथा आरबीआई को देश के बाह्य तथा आंतरिक वित्तीय मुद्दों के प्रबंधन में समस्याएं हो सकती हैं।
- उच्च विदेशी मुद्रा आर्थिक मोर्चे पर किसी भी संकट की स्थिति में एक बड़ा उपधानी (कुशन) प्रदान करता है क्योंकि यह एक वर्ष के लिए देश के आयात बिल को कवर प्रदान करता है।
विदेशी मुद्रा का महत्व
- उच्चतर विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूत करने में सहायता करता है।
- विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि बाजारों को एक ऐसा विश्वास प्रदान करती है कि कोई देश अपने बाहरी/ विदेशी दायित्वों को पूर्ण कर सकता है।
- विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि बाह्य परिसंपत्तियों द्वारा घरेलू मुद्रा के समर्थन को भी प्रदर्शित करती है।
- यह सरकार को अपनी विदेशी मुद्रा की आवश्यकताओं एवं बाहरी ऋण दायित्वों को पूरा करने में सहायता करता है, तथा राष्ट्रीय आपदाओं या आपात स्थितियों के लिए एक आरक्षित निधि (रिजर्व) रखता है।
एसडीआर आईएमएफ के बारे में
- एसडीआर एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति है, जिसे आईएमएफ द्वारा 1969 में अपने सदस्य देशों के आधिकारिक भंडार के पूरक के लिए निर्मित किया गया था।
- अब तक, कुल एसडीआर 7 बिलियन (लगभग 943 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर) आवंटित किया गया है। इसमें 2 अगस्त, 2021 (23 अगस्त, 2021 से प्रभावी) को स्वीकृत लगभग 456 बिलियन एसडीआर का अब तक का सबसे बड़ा आवंटन शामिल है।
- एसडीआर का मान/मूल्य पांच मुद्राओं- अमेरिकी डॉलर, यूरो, चीनी रॅन्मिन्बी, जापानी येन एवं ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग पर आधारित है।
- एसडीआर न तो मुद्रा है एवं न ही आईएमएफ पर दावा। बल्कि, यह आईएमएफ सदस्यों की स्वतंत्र रूप से प्रयोग करने योग्य मुद्राओं पर एक संभावित दावा है। इन मुद्राओं के लिए एसडीआर का विनिमय (आदान-प्रदान) किया जा सकता है।
एसडीआर इंडिया
- एसडीआर होल्डिंग्स किसी देश के एफईआर के घटकों में से एक है।
- आईएमएफ ने 2021 में भारत को 57 अरब एसडीआर (लगभग 17.86 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर) का आवंटन किया है।
- भारत की कुल एसडीआर होल्डिंग अब एसडीआर 66 बिलियन (लगभग 19.41 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर) है।






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