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संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा 2021
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2021 10 अक्टूबर, 2021 को आयोजित होने वाली है। उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम चरण के लिए तैयार हो रहे हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की पूरी तैयारी में यह प्रथम एवं प्रायः सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण होता है।
इस संदर्भ में हम पांच प्रमुख निरसन (एलिमिनेशन) तकनीकों पर चर्चा करने जा रहे हैं जिनका उपयोग एक उम्मीदवार परीक्षा हॉल में ऋणात्मक अंकन से बचने एवं प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने की संभावनाओं को अधिकतम करने के लिए कर सकता है।

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2021- पांच एलिमिनेशन तकनीक
- विकल्पों से निरसन (एलिमिनेशन):
- प्रारंभिक परीक्षा में सही विकल्प पर पहुंचने का प्रथम कदम दिए गए कथनों में से एक निश्चित सही या गलत कथन की पहचान करना है।
- यह विधि बहु-कथन प्रश्नों पर लागू होती है।
- एक बार जब आप सही/गलत कथनों की पहचान कर लेते हैं, तो उन विकल्पों को खोजने का प्रयास करें जो उस कथन को शामिल/निरसित करते हैं (प्रश्न की मांग के अनुसार)।
- इस पद्धति को लागू करने से, आपके पास प्रायः केवल एक ही विकल्प शेष रह जाता है, जो प्रायः सही विकल्प होता है।
- 50-50 नियम:
- उम्मीदवारों द्वारा इस पद्धति का उपयोग तब किया जाना चाहिए जब वह निरसन के बाद दो विकल्पों पर पहुंच गया हो।
- अतः, इस संदर्भ में सही विकल्प प्राप्त होने की संभावना 50-50 है। इस परिदृश्य में, एक उम्मीदवार को दो विकल्पों में से किसी एक का चयन कर प्रश्न को हल करने का प्रयास करना चाहिए।
- चरम सीमा कथन:
- उम्मीदवारों को दिए गए प्रश्न में से किसी एक विकल्प/कथन को निरसित करने के लिए इस पद्धति का उपयोग करना चाहिए।
- इस कथन को निरसित करने के पश्चात, उम्मीदवार प्राय: सही विकल्प पर पहुंच सकते हैं।
- चेतावनी: इस विधि का प्रयोग तभी करना चाहिए जब
- उम्मीदवारों ने पहले से ही निरसन की अन्य विधियों का उपयोग किया है।
- प्रश्न सामाजिक क्षेत्र से है। उदाहरण के लिए, यदि कोई कथन कहता है कि ‘X योजना भारत से भूख को समाप्त कर देगी। यह कथन असत्य होगा।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से अनुप्रयोग आधारित प्रश्न
- जब किसी विशेष तकनीक के अनुप्रयोग क्षेत्रों के बारे में कोई प्रश्न पूछा जाता है, तो प्रायः सभी विकल्प सही होते हैं।
- ऐसा इसलिए है क्योंकि नवीन उदीयमान तकनीकों का उपयोग किसी भी क्षेत्र में किया जा सकता है, यदि वर्तमान में नहीं, किंतु भविष्य में हो सकता है।
- इस कारण से, यूपीएससी प्रायः केवल उन अनुप्रयोग क्षेत्रों को रखता है जो पहले से ही उस विशेष तकनीक के लिए खोजे जा चुके हैं।
- अर्थव्यवस्था से प्रवृत्ति आधारित प्रश्न
- अर्थव्यवस्था के पास में जो पढ़ाया प्रवृत्तियों के संदर्भ में पूछे जाते हैं, विशेष रुप से एक दशक हेतु, प्रायः सत्य कथन होते हैं।
- ऐसा इसलिए है क्योंकि आर्थिक संकेतक प्रायः एक दशक या उससे अधिक समय में किसी विशेष प्रक्षेप वक्र का अनुसरण नहीं करते हैं।
- उदाहरण के लिए, भारत के लिए एक दशक या उससे अधिक समय तक जीडीपी विकास दर सदैव धनात्मक नहीं हो सकती है।
- चेतावनी: संघ लोक सेवा आयोग स्वयं कथन में प्रवृत्ति के लिए अपवाद प्रदान कर सकता है। उस स्थिति में, आपको अपने ज्ञान के आधार पर एक संसूचित एवं अभिज्ञ विकल्प निर्मित करना चाहिए न कि शुद्ध अनुमान।


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