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बाढ़ का मौसम- तमिलनाडु में शहरी बाढ़

तमिलनाडु में शहरी बाढ़- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएं-जैसे कि भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी गतिविधि, चक्रवात महत्वपूर्ण भू भौतिकीय घटनाएं इत्यादि
  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां-सरकार की नीतियां एवं अंतः क्षेप तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

तमिलनाडु में शहरी बाढ़- संदर्भ

  • चेन्नई, तमिलनाडु में जारी भारी वर्षा ने एक बार पुनः शहर, एक समतल भूभाग वाले तटीय महानगर के, बाढ़ के प्रति संवेदनशीलता को प्रकट कर दिया है।
  • यह पुनः पूर्वोत्तर मानसून से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों पर प्रश्न उठाता है।

UPSC Current Affairs

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तमिलनाडु में शहरी बाढ़- संबद्ध मुद्दे

  • बार-बार बाढ़ आना: विगत चार महीनों में लगभग 700 किमी तक चलने वाले प्रक्षोभ जल नालों एवं जलमार्गों की सफाई किए जाने के बावजूद, जलप्लावन की समस्या में कोई वास्तविक सुधार नहीं देखा गया।
  • 2015 की बाढ़ से कोई महत्वपूर्ण सुधार एवं सीख नहीं लिया जाना: यद्यपि विगत कुछ दिनों में कोई महत्वपूर्ण वर्षा नहीं हुई है, किंतु शहर के अनेक हिस्से बाढ़ से जल प्लावित हैं।
  • खराब जल निकासी व्यवस्था का मुद्दा: चेन्नई जैसी बड़ी शहरी व्यवस्था में जल निकासी की समस्याएँ निम्नलिखित कारणों से उत्पन्न होती हैं-
    • संकुचित होती खुली जगह,
    • नालियों के कवरेज एवं सीवर लाइनों के मध्य का अंतराल,
    • शहर के मुख्य क्षेत्रों में पुराने नाले एवं सीवर नेटवर्क, एवं
    • जल के मुक्त प्रवाह में बाधा डालने वाले अतिक्रमण या अवरोध।

शहरी जल संतुलन योजना

शहरी बाढ़ को नियंत्रित करना- आगे की राह

  • नदियों एवं अन्य जल निकायों का रखरखाव: बकिंघम नहर सहित अनेक नहरों के अतिरिक्त, यह शहर कुछ नदियों यथा कूम एवं अड्यार की उपलब्धता से भाग्यशाली है।
    • ये सभी जल निकाय, यदि उचित प्रकार से अनुरक्षित किए जाएं, तो अनेक आवासीय इलाकों को जल प्लावन से बचाते हुए, अत्यंत प्रभावी बाढ़ वाहक हो सकते हैं।
  • दीर्घकालिक समाधान खोजना: गैर-मानसून अवधि के दौरान शहरी बाढ़ की समस्या का दीर्घकालिक समाधान खोजने का दृढ़ संकल्प कम नहीं होना चाहिए।
  • आम लोगों की भूमिका: शहर में रहने वाले लोगों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त रूप से जिम्मेदार होना चाहिए कि जल निकायों एवं नालों को डंप में न बदल दिया जाए।

निष्कर्ष

राज्य सरकार, जो कुछ एकीकृत प्रक्षोभ जल निकासी परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही है, को शहर की दिल काल से चली आ रही समस्याओं के टिकाऊ समाधानों की तलाश करनी चाहिए एवं उन्हें कम समय अवधि में क्रियान्वित करना चाहिए।

 

 

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