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बैठने का अधिकार

प्रासंगिकता

  • जीएस 2: केंद्र एवं राज्यों द्वारा आबादी के अति संवेदनशील वर्गों हेतु कल्याणकारी योजनाएं

 

प्रसंग

  • हाल ही में, तमिलनाडु सरकार ने एक विधेयक प्रस्तुत किया है, जो व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अपने कर्मचारियों– विशेष रूप से वस्त्र एवं आभूषण शोरूम में काम करने वाले, हेतु बैठने की व्यवस्था करना अनिवार्य बनाता है, जो लंबे समय तक खड़े रहते हैं ।

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मुख्य बिंदु

  • यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो कार्यस्थल पर ‘बैठने के अधिकार’ को वैध बनाने वाला तमिलनाडु केरल के बाद दूसरा राज्य होगा।
  • यह नया विधेयक खुदरा क्षेत्र से जुड़े हजारों कर्मचारियों, विशेषकर महिलाओं के कल्याण के लिए है।
  • विधेयक के अनुसार, प्रत्येक प्रतिष्ठान के परिसर में सभी कर्मचारियों के बैठने की उपयुक्त व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे अपने काम के दौरान बैठने के किसी भी अवसर का लाभ उठा सकें एवं इस प्रकार कार्य अवधि के पूरे समय ‘तैयार रहने’ की स्थिति से बच सकें।

 

विधेयक की आवश्यकता

  • दुकानों एवं इसी तरह के प्रतिष्ठानों में कार्यरत लोगों को लंबे समय तक खड़े रहने के लिए दिवस किया जाता है जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • कुछ दुकान के मालिक इतने कठोर होते हैं कि वे दीवार के सहारे झुकने से भी मना कर देते हैं।
  • विधेयक गारंटी देगा कि इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कार्य अवधि के पूरे समय तैयार रहनेकी स्थिति से बच सकें

 

केरल का बैठने का अधिकार

  • 2010 में, कोझीकोड, केरल में खुदरा प्रतिष्ठानों में विक्रय हेतु महिला प्रतिनिधि (सेल्स वूमेन) एवं महिला सफाई कर्मी तथा सफाई कर्मचारी असंगतिथा मेघला थोझिलाली यूनियन (एएमटीयू) के नेतृत्व में शौचालय की सुविधा की मांग हेतु एक साथ आए।
  • एएमटीयू केरल में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर ध्यान केंद्रित करने वाली प्रथम महिला ट्रेड यूनियन बन गई।
  • फिर 2014 में, एएमटीयू ने राज्य सरकार एवं केरल राज्य महिला आयोग को कार्य की उचित दशाओं की मांग करते हुए अभ्यावेदन भेजा, जिसमें दुकानों में सेल्समैन के बैठने का अधिकार भी शामिल था।
  • 2016 में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य में कपड़ा दुकानों पर महिलाओं की खराब कार्य दशाओं पर केरल सरकार को नोटिस जारी किया।
  • केरल दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) अधिनियम, 2018, दिसंबर 2018 में पारित किया गया था, जो वाणिज्यिक दुकानों में कार्य की दशाओं में सुधार की गारंटी प्रदान करता है।

 

महत्व

  • ये कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 के अनुरूप हैं, जिसमें कहा गया है कि राज्य कार्य की न्यायसंगत एवं मानवीय दशाओं को प्राप्त करने हेतु प्रावधान करेगा।
  • ये प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि दुकान के मालिक अपनी मर्जी से श्रमिकों का शोषण नहीं कर रहे हों, एवं एक विनियमित वातावरण में काम कर रहे हैं।

 

 

 

 

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