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रैम्प योजना यूपीएससी: प्रासंगिकता
- जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आयोजना, संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।
RAMP योजना: संदर्भ
- हाल ही में, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज/MSME) ने “एमएसएमई प्रदर्शन को उन्नत करने एवं त्वरित करने” (रेजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस/रैम्प) पर एक विश्व बैंक सहायता प्राप्त कार्यक्रम प्रारंभ किया है।
रैम्प योजना विश्व बैंक: मुख्य बिंदु
- रैम्प एक नई योजना है एवं वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ होगी।
- इस योजना के लिए कुल परिव्यय लगभग 6,000 करोड़ या 808 मिलियन अमरीकी डालर है, जिसमें से 3750 करोड़ रुपये या 500 मिलियन अमरीकी डालर विश्व बैंक से ऋण के रूप में होगा एवं शेष 2000 करोड़ रुपये या 308 मिलियन अमरीकी डालर भारत सरकार (गवर्नमेंट ऑफ इंडिया) द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।
- रैम्प कार्यक्रम विशेष रूप से प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर वर्तमान MSME योजनाओं के प्रभाव में वृद्धि के माध्यम से MSME क्षेत्र में सामान्य तथा कोविड-19 संबंधित चुनौतियों का समाधान करेगा।
- यू. के. सिन्हा समिति, के. वी. कामथ समिति एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (इकोनामिक एडवाइजरी काउंसिल टू प्राइम मिनिस्टर/पीएमईएसी) द्वारा की गई संस्तुतियों के अनुरूप एमएसएमई को सुदृढ़ करने हेतु भारत सरकार द्वारा रैम्प को तैयार एवं प्रस्तावित किया गया था।
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रैम्प योजना क्या है?
- “एमएसएमई प्रदर्शन को बढ़ाना एवं त्वरित करना” (आरएएमपी) विश्व बैंक से सहायता प्राप्त केंद्रीय क्षेत्र की एक योजना है, जो एमएसएमई मंत्रालय के विभिन्न कोरोनावायरस रोग 2019 के प्रतिरोधक क्षमता पूर्ण एवं रिकवरी अंतःक्षेप का समर्थन करती है।
- कार्यक्रम का उद्देश्य बाजार तथा ऋण तक पहुंच में सुधार करना, केंद्र एवं राज्य में संस्थानों तथा शासन को सुदृढ़ करना, केंद्र-राज्य संबंधों एवं साझेदारी में सुधार करना, विलंबित भुगतान के मुद्दों को हल करना तथा एमएसएमई का कायाकल्प करना है।
रैम्प योजना के लाभ
- कार्यक्रम अन्य बातों के अतिरिक्त क्षमता निर्माण, हैंड होल्डिंग, कौशल विकास, गुणवत्ता संवर्धन, तकनीकी उन्नयन, डिजिटलीकरण, पहुंच एवं विपणन प्रचार (मार्केटिंग प्रमोशन) के अपर्याप्त संबोधित ब्लॉकों को सहारा देगा।
- रैम्प कार्यक्रम एक रोजगार प्रदायक, बाजार प्रवर्तक, वित्त सुविधा प्रदाता होगा एवं कमजोर वर्गों तथा कायाकल्प पहल का समर्थन करेगा।
- उन राज्यों में जहां एमएसएमई की उपस्थिति कम है, कार्यक्रम रैंप के तहत कवर की गई योजनाओं के उच्च प्रभाव के परिणामस्वरूप बृहतर औपचारीकरण की शुरुआत करेगा।
- रैम्प उद्योग मानकों, प्रथाओं में नवाचार तथा वृद्धि को बढ़ावा देने तथा एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने, निर्यात में वृद्धि करने, आयात को प्रतिस्थापित करने तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक तकनीकी इनपुट प्रदान करके आत्मनिर्भर भारत मिशन का पूरक होगा।
रैम्प योजना की भूमिकायें
- प्रतिस्पर्धात्मकता एवं व्यावसायिक सातत्य में सुधार के लिए अधिक प्रभावी एवं लागत प्रभावी एमएसएमई अंतःक्षेपों के वितरण को सक्षम करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति एवं कार्यक्रम डिजाइन के लिए वर्धित क्षमता के माध्यम से ”पॉलिसी प्रदाता”।
- अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का लाभ उठाकर बेंच-मार्किंग, साझाकरण एवं सर्वोत्तम पद्धतियों / सफलता की कहानियों का प्रदर्शन करने के माध्यम से “ज्ञान प्रदाता“, एवं
- “प्रौद्योगिकी प्रदाता” अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच प्रदान करता है जिसके परिणामस्वरूप अत्याधुनिक कृत्रिम प्रज्ञान (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), आंकड़ा वैश्लेषिकी (डेटा एनालिटिक्स), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), यांत्रिक अधिगम (मशीन लर्निंग) इत्यादि के माध्यम से एमएसएमई का डिजिटल एवं तकनीकी परिवर्तन होता है।






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