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भारत-इजरायल द्विपक्षीय नवाचार समझौता (बीआईए)

भारत-इजरायल द्विपक्षीय नवाचार समझौता- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध- द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े एवं / या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।

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भारत-इजरायल द्विपक्षीय नवाचार समझौता- संदर्भ

  • हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास निदेशालय (डीडीआर एंड डी), रक्षा मंत्रालय, इजराइल ने एक द्विपक्षीय नवाचार समझौता (बीआईए) किया है।
  • द्विपक्षीय नवाचार समझौता (बीआईए) बढ़ते भारत-इजरायल तकनीकी सहयोग का एक मूर्त प्रमाणीकरण है।

भारत-इजरायल द्विपक्षीय नवाचार समझौता (बीआईए)_40.1

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भारत-इजरायल द्विपक्षीय नवाचार समझौता- प्रमुख बिंदु

  • वित्त पोषण: विकास के प्रयासों को डीआरडीओ एवं डीडीआर एंड डी, इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जाएगा।
  • मुख्य उद्देश्य: द्विपक्षीय नवाचार समझौते (बीआईए) का उद्देश्य द्वैध उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए दोनों देशों के स्टार्टअप एवं एमएसएमई में नवाचार एवं त्वरित अनुसंधान तथा विकास को प्रोत्साहन प्रदान करना है।
  • फोकस क्षेत्र: ड्रोन, रोबोटिक्स एवं कृत्रिम प्रज्ञान (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसे क्षेत्रों में अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों एवं उत्पादों को लाने हेतु द्विपक्षीय नवाचार समझौते के अंतर्गत स्टार्टअप एवं उद्योग।
    • अन्य फोकस क्षेत्र- क्वांटम प्रौद्योगिकी, फोटोनिक्स,  जैव संवेदन (बायोसेंसिंग), मस्तिष्क-मशीन अंतरापृष्ठ (ब्रेन-मशीन इंटरफेस), ऊर्जा भंडारण, पहनने योग्य उपकरण, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, इत्यादि।
  • लाभ: बीआईए के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियां दोनों देशों को उनके घरेलू अनुप्रयोगों हेतु उपलब्ध होंगी।
    • उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों को दोनों देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु अनुकूलित किया जाएगा।

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रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ)- प्रमुख बिंदु

  • पृष्ठभूमि: डीआरडीओ का गठन 1958 में भारतीय सेना के तत्कालीन पूर्व से कार्यरत तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (टीडीई) एवं रक्षा विज्ञान संगठन (डीएसओ) के साथ तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय (डीटीडीपी) के समामेलन से हुआ था।
  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के बारे में: डीआरडीओ भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का अनुसंधान एवं विकास स्कंध है, जिसका लक्ष्य भारत को अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के साथ सशक्त बनाना है।
  • मिशन: तीनों सेनाओं द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों एवं उपकरणों से सुसज्जित करते हुए महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों एवं प्रणालियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
  • प्रमुख उपलब्धियां: डीआरडीओ की आत्मनिर्भरता की खोज के परिणामस्वरूप सफल स्वदेशी विकास और रणनीतिक प्रणालियों एवं प्लेटफार्मों का उत्पादन हुआ है जैसे-
    • प्रक्षेपास्त्रों (मिसाइलों) की अग्नि एवं पृथ्वी श्रृंखला;
    • हल्के लड़ाकू विमान, तेजस;
    • मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, पिनाका;
    • वायु रक्षा प्रणाली, आकाश;
    • रडार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला; इत्यादि।

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