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आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 | आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 के मुख्य आकर्षण | आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 पीडीएफ डाउनलोड करें

आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22: यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था– नियोजन,  संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे; सरकारी बजट।

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आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22: संदर्भ

  • हाल ही में वित्त मंत्री ने संसद के बजट सत्र 2022 में आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 को पेश किया था।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में इस वर्ष जीडीपी के 2% एवं 2022-23 में 8% से 8.5% वृद्धि करने की संभावना है।
    • आर्थिक सर्वेक्षण ने मुद्रास्फीति एवं ऊर्जा की कीमतों में दृढ़ीकरण होने के प्रभावों के बारे में भी चिंता व्यक्त की।
  • महामारी-पूर्व के स्तरों की तुलना में, निर्यात में पुनः प्राप्ति (रिकवरी) सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, इसके बाद सरकारी खपत एवं सकल अचल पूंजी निर्माण है।

आर्थिक सर्वेक्षण एवं मुख्य आर्थिक सलाहकार | आर्थिक सर्वेक्षण एवं मुख्य आर्थिक सलाहकार के बारे में, भूमिकाएं तथा उत्तरदायित्व

 

आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22  मुख्य आकर्षण: प्रमुख बिंदु

  • आर्थिक विकास: आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में इस वर्ष जीडीपी के 9.2% एवं 2022-23 में 8% से 8.5% वृद्धि करने की संभावना है। यह आर्थिक विकास निम्नलिखित पुर्वानुमानों पर आधारित है-
    • आगे कोई शिथिल करने वाली महामारी संबंधी आर्थिक व्यवधान नहीं हो,
    • मानसून सामान्य रहे,
    • प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा वैश्विक तरलता का आहरण मोटे तौर पर व्यवस्थित हो,
    • तेल की कीमतें 70 अमेरिकी डॉलर-75 अमेरिकी डॉलर/ बैरल के मध्य हों, तथा
    • वर्ष के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान निरंतर कम हों।
  • कृषि क्षेत्र: आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र महामारी से अन्य क्षेत्रों की तुलना में सबसे कम प्रभावित है, इस क्षेत्र में विगत वर्ष 6% की वृद्धि के पश्चात 2021-22 में 3.9% की वृद्धि होगी।
    • तिलहन, दलहन एवं बागवानी के लिए फसल विविधीकरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • औद्योगिक क्षेत्र: औद्योगिक क्षेत्र संकुचन के दौर से गुजरा है एवं अब यह महामारी- पूर्व के स्तर से लगभग 1 प्रतिशत ऊपर है।
  • सेवा क्षेत्र: सेवा क्षेत्र का खंड जिसमें पर्यटन, यात्रा एवं होटल सम्मिलित है,  यह खंड अभी भी महामारी पूर्व के स्तर से 5 प्रतिशत नीचे है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो अभी भी दुष्प्रभावित है।
  • आर्थिक विकास के संचालक: आर्थिक सर्वेक्षण 2022 में कहा गया है कि विकास को निम्नलिखित के द्वारा समर्थन प्राप्त होगा-
    • व्यापक वैक्सीन कवरेज,
    • आपूर्ति पक्ष के सुधारों एवं विनियमों में अनुतोष से लाभ,
    • मजबूत निर्यात वृद्धि, एवं
    • पूंजीगत व्यय को बढ़ाने के लिए राजकोषीय समष्टि की उपलब्धता।
  • खपत: सरकारी खपत में पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) अच्छी हुई है किंतु वैयक्तिक (निजी) खपत एवं यात्रा, व्यापार तथा होटल जैसे क्षेत्रों में अभी भी पूर्ण रूप से रिकवरी नहीं हुई है।
    • महामारी की पुनरावर्ती लहरों की स्टॉप-स्टार्ट (बार बार रुकना फिर शुरू होना) प्रकृति इन उप-क्षेत्रों के लिए संवेग प्राप्त करना विशेष रूप से कठिन बना देती है।
  • निवेश: आर्थिक सर्वेक्षण 2022 का कहना है कि देश के जीडीपी में निवेश का अनुपात 2021-22 में 6% पर पहुंच गया था, जो सात वर्षों में उच्चतम स्तर है।
    • इस पूंजी निर्माण का श्रेय ‘कैपेक्स एवं अवसंरचना व्यय के माध्यम से विकास के अच्छे चक्र’ को द्रुत करने पर सरकार के नीतिगत जोर को दिया गया है।
    • आने वाला वर्ष निजी क्षेत्र के निवेश में वृद्धि के लिए अच्छी तरह से तैयार है, जिसमें वित्तीय प्रणाली अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए सहायता प्रदान करने हेतु अच्छी स्थिति में है।
  • आर्थिक विकास के लिए जोखिम: आर्थिक सर्वेक्षण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए निम्नलिखित जोखिमों को स्वीकार करता है-
    • कोविड-19 का नया वेरिएंट: जैसे कि ओमिक्रोन जो संपूर्ण विश्व में प्रसारित हो रहा है।
    • अर्धचालक जैसे आगतों की कमी
    • मुद्रास्फीति: आर्थिक सर्वेक्षण अधिकांश देशों में मुद्रास्फीति में उछाल को स्वीकार करता है, एवं
    • प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा तरलता आहरण का चक्र आरंभ किया जा रहा है।
  • स्टार्ट-अप पूंजी: आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार, भारत की स्टार्टअप राजधानी के रूप में दिल्ली ने बेंगलुरु को प्रतिस्थापित कर दिया है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी ने अप्रैल 2019 एवं दिसंबर 2021 के मध्य 5,000 से अधिक स्टार्टअप जोड़े हैं।
    • कुल 11,308 स्टार्टअप के साथ, महाराष्ट्र में देश में सबसे अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं।
  • मनरेगा रोजगार की मांग: मनरेगा के अंतर्गत कार्य की मांग पर नवीनतम आंकड़ों का विश्लेषण ग्रामीण श्रम बाजार में निम्नलिखित प्रवृत्तियों का सुझाव देता है-
    • 2020 में देशव्यापी तालाबंदी (लॉकडाउन) के दौरान मनरेगा रोजगार अपने शिखर पर था
    • कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद मनरेगा के काम की मांग स्थिर हो गई है;
    • समग्र मनरेगा रोजगार अभी भी महामारी-पूर्व स्तर से अधिक है।
  • कर एवं गैर-कर राजस्व में वृद्धि: आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में बताया गया है कि कर तथा गैर-कर राजस्व दोनों में तीव्र वृद्धि हुई है।
  • चालू खाता: आर्थिक सर्वेक्षण 2022 ने इंगित किया कि आयात में एक मजबूत सुधार देखा गया था, जिससे भारत का शुद्ध निर्यात 2020-21 में अधिशेष से, वर्ष की पहली छमाही के लिए ऋणात्मक रहा।
    • इस प्रकार भारत ने पहली छमाही में 2% का मामूली चालू खाता घाटा दर्ज किया है, किंतु विदेशी निवेश के निरंतर अंतर्प्रवाह के रूप में मजबूत पूंजी प्रवाह इसे वित्तपोषित करने हेतु पर्याप्त था।

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