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यूपीएससी परीक्षा के लिए दैनिक समसामयिकी 14 दिसंबर 2022 |प्रीलिम्स बिट्स

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यूपीएससी के लिए दैनिक समसामयिकी 14 दिसंबर

यूपीएससी के लिए दैनिक समसामयिकी: यूपीएससी लेख के लिए दैनिक समसामयिकी में उस दिन के महत्वपूर्ण लेख सम्मिलित होते हैं जो विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, राज्य पीसीएस, एसएससी एवं विभिन्न बैंक परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हिंदी

फेम इंडिया स्कीम

फेम इंडिया चर्चा में क्यों है

  • फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण के तहत, 7,45,713 इलेक्ट्रिक वाहनों को 07.12.2022 तक लगभग 3,200 करोड़ रुपये की मांग प्रोत्साहन (डिमांड इंसेंटिव)  राशि के रूप में समर्थन दिया गया है।
  • इसके अलावा, एमएचआई ने फेम इंडिया योजना के तहत 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इंट्रासिटी एवं इंटरसिटी संचालन के लिए 65 शहरों/एसटीयू/सीटीयू/राज्य सरकार की संस्थाओं को 6315 ई-बसों  के लिए स्वीकृति प्रदान की है।

फेम इंडिया योजना

  • सरकार ने 1 अप्रैल, 2019 से आरंभ  होने वाली पांच वर्ष की अवधि के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कुल बजटीय समर्थन के साथ फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया/फेम इंडिया) योजना के चरण- II को अधिसूचित किया।
  • फ़ेम इंडिया योजना का चरण- II मुख्य रूप से सार्वजनिक और  साझा परिवहन के विद्युतीकरण का समर्थन करने पर केंद्रित है।
  • फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण का लक्ष्य 7090 ई-बसों, 5 लाख ई-तिपहिया वाहनों, 55000 ई-4 व्हीलर पैसेंजर कार एवं 10 लाख ई-2 व्हीलर को मांग प्रोत्साहन के माध्यम से समर्थन देना है।
  • फेम इंडिया योजना के तहत, इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों को इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीद मूल्य में अग्रिम कटौती के रूप में प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने की सुविधा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • बढ़ी हुई मांग प्रोत्साहन: 11 जून, 2021 से फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण के तहत मांग प्रोत्साहन को वाहन की लागत के 20% से 40% तक की सीमा में वृद्धि के साथ 10,000 रुपये/किलोवाट घंटा से बढ़ाकर 15,000 रुपये/ किलोवाट घंटा कर दिया गया है। इस प्रकार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की लागत आईसीई दोपहिया वाहनों के बराबर हो जाती है।
  • फेम योजना के दूसरे चरण का विस्तार: 25 जून, 2021 को फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण को 31 मार्च, 2024 तक 2 वर्ष की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया था।
  • उत्पादन सहलग्न प्रोत्साहन (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव/पीएलआई) योजना: सरकार ने देश में बैटरी की कीमतों को कम करने के लिए देश में उन्नत रसायन सेल (एडवांस केमिस्ट्री सेल/एसीसी) के निर्माण के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना को अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
    • बैटरी की कीमतों में गिरावट से इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत में कमी आएगी।
  • इलेक्ट्रिक वाहन ऑटोमोबाइल एवं वाहनों के कलपुर्जे (ऑटो कंपोनेंट्स) के लिए उत्पादन सहलग्न प्रोत्साहन (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव/पीएलआई) योजना के तहत आते हैं, जिसे 15 सितंबर 2021 को पांच वर्ष की अवधि के लिए 25,938 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की गई थी।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया; इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जर/चार्जिंग स्टेशनों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज/MoRTH) ने घोषणा की कि बैटरी से चलने वाले वाहनों को हरी लाइसेंस प्लेट दी जाएंगी एवं उन्हें परमिट की आवश्यकताओं से छूट दी जाएगी।
  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर पथ कर (रोड टैक्स) माफ करने की सलाह देने वाली एक अधिसूचना जारी की, जो बदले में इलेक्ट्रिक वाहनों की प्रारंभिक लागत को कम करने में सहायता करेगी।

 

डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (WHO-GCTM)

विश्व स्वास्थ्य संगठन का पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र (डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन/GCTM) चर्चा में क्यों है

  • हाल ही में, आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (GCTM) के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी।

 

 डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (GCTM) क्या है?

  • डब्ल्यूएचओ- जीसीटीएम भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्व स्वास्थ्य संगठन मुख्यालय  (जिनेवा) का एक चौकी केंद्र है।
  • डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य राज्यों के मध्य मजबूत संबंध स्थापित करने में सहायता करेगा।
  • डब्ल्यूएचओ- जीसीटीएम वैश्विक कल्याण के एक केंद्र के रूप में उदित होगा जो दवाओं के विकास एवं पारंपरिक औषधियों से संबंधित अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा एवं पारंपरिक औषधियों के बारे में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं जागरूकता को मजबूत करेगा।

डब्ल्यूएचओ- जीसीटीएम का कार्यक्षेत्र/गतिविधियां

WHO-GCTM की गतिविधियाँ/कार्य क्षेत्र इस प्रकार हैं:

  • स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडे के विकास एवं आकार देने, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों एवं मानकों को स्थापित करने, देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने एवं पारंपरिक चिकित्सा के स्वास्थ्य रुझानों की निगरानी तथा आकलन के लिए एक संरक्षक के रूप में कार्य करना।
  • पारंपरिक चिकित्सा में नैदानिक ​​​​अभ्यास तथा नवाचार के लिए अनुसंधान पद्धति मानकों को स्थापित करना  तथा मानकों को विकसित करना।
  • पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं प्रभावकारिता, पहुंच तथा तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित करना।
  • डेटा एकत्र करने, विश्लेषण करने एवं प्रभाव का आकलन करने के लिए प्रासंगिक तकनीकी क्षेत्रों, उपकरणों एवं पद्धतियों में मानदंड, मानक तथा दिशा निर्देश विकसित करना।
  • उद्देश्यों के लिए प्रासंगिकता के क्षेत्रों में विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं विशेष कार्यक्रमों (IARC, WHO अकादमी, TDR, एलायंस फॉर हेल्थ पॉलिसी रिसर्च, PHC पर विशेष कार्यक्रम), अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, डब्ल्यूएचओ सहयोगी केंद्र नेटवर्क, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं पेशेवर संघों तथा उद्देश्य-विशिष्ट पक्ष पोषण समूहों के भीतर साझेदारी एवं सहयोग स्थापित करने हेतु।
  • उद्देश्यों के लिए प्रासंगिकता के क्षेत्रों में विशिष्ट क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना एवं कैंपस, आवासीय या वेब-आधारित एवं डब्ल्यूएचओ अकादमी तथा अन्य रणनीतिक भागीदारों के साथ साझेदारी के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन के लिए दिशानिर्देश विकसित करने में एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करना एवं पारंपरिक चिकित्सा से प्राप्त स्वास्थ्य अर्थशास्त्र एवं इस पर देशों की विकसित रणनीतियों का समर्थन करना।

 

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर गैप- एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ)

कृषि अवसंरचना अंतराल (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर गैप) चर्चा में क्यों है?

  • कृषि एवं गांवों को सशक्त बनाकर तथा निजी निवेश को बढ़ावा देकर कृषि अवसंरचना अंतराल को पाटने के लिए, भारत सरकार ने ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड) के तहत वित्तपोषण सुविधा की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना प्रारंभ की।

कृषि अवसंरचना कोष (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड/एआईएफ)

  • कृषि अवसंरचना कोष (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड/एआईएफ) के बारे में: कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), फसल कटाई उपरांत के प्रबंधन के  आधारिक संरचना एवं सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के लिए व्यवहार्य परियोजनाओं में निवेश के लिए ऋण पर ब्याज सबवेंशन एवं क्रेडिट गारंटी सहायता के माध्यम से, एक मध्यम-दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण सुविधा है।
  • लाभ: योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा 3% प्रति वर्ष के ब्याज सबवेंशन एवं CGTMSE के तहत क्रेडिट गारंटी कवरेज के साथ ऋण के रूप में 1 लाख करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।
  • पात्र लाभार्थी: इनमें किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), पीएसीएस, विपणन सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), संयुक्त देयता समूह (ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप्स/जेएलजी), बहुउद्देशीय सहकारी समितियां, कृषि-उद्यमी, स्टार्ट-अप एवं केंद्रीय/राज्य एजेंसी अथवा स्थानीय निकाय प्रायोजित सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाएं शामिल हैं।
  • उद्देश्य: ई- विपणन प्लेटफॉर्म,  भंडार गृह (वेयरहाउस), साइलो, पैक हाउस, परख इकाइयों, छंटाई एवं ग्रेडिंग इकाइयों, कोल्ड चेन, रसद सुविधाओं, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्रों, परिपक्वन कक्षों  सहित आपूर्ति श्रृंखला सेवाओं जैसे फसल- उपरांत प्रबंधन धारिक संरचना के निर्माण के लिए लाभ प्रदान किए जाते हैं।
  • कृषि अवसंरचना कोष अथवा एग्री इंफ्रा फंड के तहत पात्र सामुदायिक कृषि परिसंपत्ति में सम्मिलित हैं: जैविक इनपुट उत्पादन, जैव उत्तेजक उत्पादन इकाइयां, स्मार्ट एवं परिशुद्ध कृषि के लिए  आधारिक संरचना, निर्यात संकुल सहित फसलों के समूहों के लिए आपूर्ति श्रृंखला आधारिक अवसंरचना प्रदान करने हेतु अभिनिर्धारित की गई परियोजनाएं, केंद्र/राज्य/स्थानीय सरकारों द्वारा प्रचारित परियोजनाएं  अथवा उनकी एजेंसियां ​​लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत सामुदायिक कृषि परिसंपत्ति या फसल कटाई उपरांत के प्रबंधन परियोजनाओं के निर्माण हेतु।

कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) का प्रदर्शन

  • अगस्त 2020 में योजना के प्रारंभ के पश्चात से, 18321 परियोजनाओं के लिए 13681 करोड़ रुपये की राशि के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
  • इन स्वीकृत परियोजनाओं ने कृषि क्षेत्र में 27184 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है।
  • कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में 8118 गोदाम, 2817 प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां, 1936 कस्टम हायरिंग सेंटर, 948 छँटाई एवं वर्गीकरण (सॉर्टिंग एंड ग्रेडिंग) इकाइयां, 704 शीतगृह परियोजनाएं, 163 परख इकाइयां एवं लगभग 3651 अन्य प्रकार की फसल उपरांत (पोस्ट-हार्वेस्ट) प्रबंधन परियोजनाएं तथा सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियां शामिल हैं।
  • सरकार देश के कोने-कोने में कृषि अवसंरचना वित्तपोषण में गति लाने हेतु विभिन्न स्तरों पर विभिन्न कार्यक्रमों, सेमिनारों, कार्यशालाओं के आयोजन के माध्यम से बैंकरों एवं अन्य हितधारकों को संवेदनशील बनाकर कृषि अवसंरचना कोष योजनाओं के बारे में जागरूकता फैला रही है।

 

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