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जनगणना 2021 की कवायद एवं एनपीआर, विलंब के कारण तथा वर्तमान स्थिति

जनगणना 2021 कवायद: जनगणना कवायद भारत सरकार द्वारा प्रत्येक दस वर्ष में किया जाने वाला एक व्यापक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण है। इसका उद्देश्य देश की जनसंख्या के बारे में जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक आंकड़े एकत्र करना है। जनगणना 2021 यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा एवं यूपीएससी मुख्य परीक्षा (जीएस पेपर 2- जनसंख्या के विभिन्न वर्गों के कल्याण को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न शासन उपाय) के लिए भी महत्वपूर्ण है।

जनगणना 2021 कवायद की पृष्ठभूमि

भारत ने परंपरागत रूप से 1881 से प्रत्येक 10 वर्ष में जनगणना का आयोजन किया है। यद्यपि, कोविड-19 महामारी के कारण, जनगणना 2021 के लिए होने वाली दशकीय कवायद को स्थगित करना पड़ा। जबकि सरकार द्वारा जनगणना के लिए नई तिथियों की घोषणा नहीं की गई है, इसकी तैयारियां चल रही हैं तथा आगामी जनगणना की कुछ विशेषताएं प्रकाश में आ रही हैं।

जनगणना 2021 पहली डिजिटल जनगणना होगी

विशेष रूप से, जनगणना 2021 भारत में पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिससे नागरिकों को “स्व-गणना” के माध्यम से सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति प्राप्त होगी।

  • इस विकल्प का प्रयोग करने के लिए, नागरिकों को अपना विवरण राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर/NPR) में दर्ज कराना होगा, जिसे अनिवार्य कर दिया गया है।
  • इससे नागरिक सरकारी प्रगणकों की आवश्यकता को दरकिनार करते हुए स्वयं जनगणना प्रपत्र भरने में सक्षम होंगे।
  • स्व-गणना प्रक्रिया के दौरान, आधार अथवा मोबाइल नंबरों का संग्रह अनिवार्य होगा।

जनगणना 2021 कवायद, वर्तमान स्थिति

2 जनवरी को जारी एक अधिसूचना ने भारतीय राज्यों में प्रशासनिक सीमाओं को स्थिर करने की समय सीमा को 30 जून तक बढ़ा दिया, प्रभावी रूप से जनगणना कवायद को कम से कम सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

  • यह देखते हुए कि गणनाकारों की तैयारी एवं प्रशिक्षण के लिए आम तौर पर तीन माह की आवश्यकता होती है, यह संभावना है कि जनगणना को आगामी वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
  • लगभग 30 लाख सरकारी अधिकारियों को गणनाकार के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जो ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विधियों के संयोजन के माध्यम से 135 करोड़ व्यक्तियों की अनुमानित जनसंख्या से जानकारी एकत्र करने हेतु उत्तरदायी होंगे।
  • यह देखते हुए कि लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई 2024 के लिए निर्धारित है, यह असंभव है कि जनगणना उससे पूर्व आयोजित की जाएगी, क्योंकि वही कार्यबल चुनाव संबंधी कार्यों में लगा होगा।
  • यहां तक ​​​​कि यदि शीघ्रता की जाती है, तो जनगणना के दोनों चरणों को पूरा करने के लिए 1 अक्टूबर से न्यूनतम 11 महीने की आवश्यकता होगी।

जनगणना 2021 में विलंब क्यों?

जन्म तथा मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में प्रस्तावित संशोधन जनगणना प्रक्रिया में विलंब का एक कारण है।

  • सरकार का लक्ष्य जन्म एवं मृत्यु का एक केंद्रीकृत रजिस्टर स्थापित करना है जिसका उपयोग जनसंख्या रजिस्टर, चुनावी रजिस्टर, आधार, राशन कार्ड, पासपोर्ट तथा ड्राइविंग लाइसेंस डेटाबेस सहित विभिन्न डेटाबेस को अद्यतन करने के लिए किया जा सकता है।
  • इस केंद्रीकृत डेटा कोष को मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना वास्तविक समय में निरंतर अद्यतन किया जाएगा, जिससे 18 वर्ष की आयु में मतदाता सूची में व्यक्तियों के स्वत: जुड़ने तथा उनकी मृत्यु के  पश्चात उन्हें हटाने की अनुमति मिलेगी।
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि जन्म तथा मृत्यु रजिस्टर को जनसंख्या रजिस्टर एवं अन्य डेटाबेस से जोड़ने के लिए एक विधेयक संसद के आगामी सत्र के दौरान प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।

स्व-गणना तथा एनपीआर

नई दिल्ली में नए जनगणना भवन (जनगणना भवन) के उद्घाटन के दौरान, श्री शाह ने ‘1981 से भारतीय जनगणना पर आलेख’ शीर्षक से एक रिपोर्ट का अनावरण किया।

  • रिपोर्ट में आगामी जनगणना के बारे में विस्तृत सूचनाएं सम्मिलित हैं, जिसमें सम्मिलित किए जाने वाले प्रश्नों के विवरण भी शामिल हैं।
  • रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया था कि जनगणना के दौरान “स्व-गणना” का प्रावधान केवल उन परिवारों पर लागू होगा जिन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में अपनी जानकारी सफलतापूर्वक ऑनलाइन अद्यतन की है।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर/NPR)

जनगणना के विपरीत, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) एक व्यापक पहचान डेटाबेस के रूप में कार्य करता है जिसमें देश के प्रत्येक “सामान्य निवासी” के बारे में जानकारी शामिल होती है।

  • NPR के माध्यम से परिवार स्तर पर एकत्र किए गए डेटा को राज्य सरकारों एवं अन्य सरकारी विभागों के साथ साझा किया जा सकता है।
  • इसके विपरीत, 1948 का जनगणना अधिनियम राज्य या केंद्र सरकार के साथ व्यक्तिगत डेटा के साझाकरण पर रोक लगाता है, जिससे केवल प्रशासनिक स्तर पर कुल डेटा जारी करने की अनुमति मिलती है।
  • NPR, 1955 के नागरिकता अधिनियम के तहत नागरिकता नियम 2003 के अनुसार, भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (नेशनल रजिस्टर फॉर इंडियन सिटीजंस-NRIC/NRC) के संकलन की दिशा में प्रारंभिक कदम के रूप में कार्य करता है।
  • विशेष रूप से, असम एकमात्र राज्य है जहां सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद NRC का संकलन किया गया है। असम के NRC के अंतिम प्रारूप में 3.29 करोड़ में से 19 लाख आवेदकों को बाहर कर दिया गया।

NPR के साथ संबद्ध चिंताएं

2020 में, NPR को पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान, ओडिशा, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब तथा छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्य सरकारों के साथ-साथ नागरिक समाज संगठनों के प्रस्तावित NRC के साथ कथित जुड़ाव के कारण विरोध का सामना करना पड़ा, जिसने विरासत से संबंधित उचित दस्तावेजों के अभाव वाले व्यक्तियों के लिए संभावित राज्यविहीनता के बारे में चिंता जताई।

  • नागरिकता संशोधन अधिनियम ( सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट/CAA), 2019 को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के कुछ गैर-दस्तावेजी धार्मिक समुदायों को धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करता है, जिन्होंने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पूर्व भारत में प्रवेश किया था।
  • ऐसी आशंकाएं हैं कि इस कानून से गैर-मुस्लिमों को लाभ हो सकता है जिन्हें प्रस्तावित नागरिक रजिस्टर से बाहर रखा गया है, जबकि बाहर किए गए मुसलमानों को अपनी नागरिकता  सिद्ध करने की आवश्यकता हो सकती है।
  • सरकार ने कहा है कि CAA तथा नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) आपस में जुड़े हुए नहीं हैं तथा उन्होंने NRC को राष्ट्रव्यापी रूप से लागू करने की किसी भी मौजूदा योजना से इनकार किया है।

NPR की वर्तमान स्थिति

NPR (नेशनल पापुलेशन रजिस्टर) आरंभ में 2010 में कांग्रेस सरकार के तहत संग्रहित किया गया था तथा इसे लगभग 1.19 बिलियन निवासियों के विवरण के साथ 2015 में अपडेट किया गया था। मार्च 2020 में, गृह मंत्रालय ने जनगणना के आंकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज एंड कैप्चर करने की सुविधा के लिए जनगणना नियमों में संशोधन किया। उत्तरदाताओं द्वारा स्व-गणना के लिए इन परिवर्तनों की भी अनुमति है।

  • NPR को जनगणना 2021 के पहले चरण के दौरान अद्यतन करने की योजना है।
  • जबकि 31 प्रश्नों को मकानसूचीकरण एवं घरेलू चरण के लिए अधिसूचित किया गया है, जनसंख्या गणना चरण के लिए 28 प्रश्नों को अंतिम रूप देना एवं अधिसूचना अभी भी लंबित है।
  • हालांकि सरकार का कहना है कि एनपीआर विवरणी को अभी तक अंतिम रूप प्रधान नहीं किया गया है, भारत की जनगणना 2021 हैंडबुक में प्रधान / जिला जनगणना अधिकारियों एवं प्रभारी अधिकारियों के लिए एक नमूना फॉर्म शामिल किया गया था।
  • हालांकि, बाद में चिंता व्यक्त किए जाने के पश्चात हैंडबुक को जनगणना वेबसाइट से हटा दिया गया था।
  • नमूना प्रपत्र में “मातृभाषा, पिता एवं माता के जन्म का स्थान तथा निवास का अंतिम स्थान” जैसे विवादास्पद प्रश्न  सम्मिलित थे, जिन्हें कुछ लोग नागरिकता रजिस्टर में शामिल करने के लिए संभावित संकेतक के रूप में देखते हैं।
  • इन प्रश्नों को 2020 में पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान तथा ओडिशा जैसी राज्य सरकारों के विरोध का सामना करना पड़ा।

जनगणना 2021 एवं NPR के लिए वित्तपोषण

श्री शाह द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक प्रारूप में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का उल्लेख किए बिना, 9,275 करोड़ रुपए की लागत से केवल जनगणना 2021 आयोजित करने का प्रस्ताव था।

  • हालांकि, गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा निर्देशित NPR को अद्यतन करने के लिए 4,442.15 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान को शामिल करने के लिए व्यय वित्त समिति (एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी/EFC) नोट के मसौदे को बाद में संशोधित किया गया था।
  • प्रस्ताव को 16 अगस्त, 2019 को स्वीकृति प्राप्त हुई तथा 24 दिसंबर, 2019 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया।
  • यह निर्णय लिया गया कि जनगणना के लिए जिम्मेदार प्रगणक NPR के लिए विवरण भी एकत्र करेंगे।
  • दुर्भाग्य से, मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण दोनों कवायदों को रोक दिया गया था। अब, NPR को उन नागरिकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है जो स्वयं जनगणना फॉर्म भरना चाहते हैं।
  • हटाई गई  हैंडबुक में पहले कहा गया था कि भारत के प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए NPR में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जनगणना में भाग लेना भी अनिवार्य है तथा गलत सूचनाएं प्रदान करना दंडनीय अपराध है।

 

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