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भारत रत्न नानाजी देशमुख

भारत रत्न नानाजी देशमुख- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: अठारहवीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, मुद्दे।

 

भारत रत्न नानाजी देशमुख- संदर्भ

  • हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने भारत रत्न नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।
  • प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि भारत रत्न नानाजी देशमुख ने हमारे गांवों के विकास एवं परिश्रमी किसानों को सशक्त बनाने के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था।

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भारत रत्न नानाजी देशमुख- प्रमुख बिंदु

  • भारत रत्न नानाजी देशमुख के बारे में: भारत रत्न नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में हुआ था।
  • भारत रत्न नानाजी देशमुख की विचारधारा: वे लोकमान्य तिलक एवं उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित थे।
    • बाद में, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघ-चालक (प्रमुख) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से प्रभावित हुए।
    • इसी के चलते वे बाद में भारतीय जनसंघ एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए एवं उसके नेता बने।
  • राष्ट्रीय सम्मान: नानाजी देशमुख को 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था एवं मरणोपरांत 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

जयप्रकाश नारायण

भारत रत्न नानाजी देशमुख- राजनीतिक जुड़ाव

  • भारत रत्न नानाजी देशमुख ने आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में भाग लिया
    • भूदान आंदोलन भारत के निर्धन एवं भूमिहीन नागरिकों के मध्य भूमि के पुनर्वितरण की दिशा में निर्देशित था।
  • आरएसएस एवं जनता पार्टी से जुड़ाव: नानाजी देशमुख आरएसएस के सदस्य एवं जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे।
    • बाद में वह जनता पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बने।
  • राष्ट्रीय आपातकाल के विरुद्ध आंदोलन में सहभागिता: उन्हें 1974 में आपातकाल के विरुद्ध संपूर्ण क्रांति के लिए जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के वास्तुकारों में से एक माना जाता था।
  • संसद सदस्य: नानाजी देशमुख 1977 एवं 1979 के मध्य छठी लोकसभा के सदस्य थे।
    • नानाजी देशमुख को 1999 में तत्कालीन एनडीए सरकार द्वारा राज्यसभा के लिए भी नामित किया गया था।

भारत रत्न नानाजी देशमुख- सामाजिक योगदान

  • एक सामाजिक कार्यकर्ता: नानाजी देशमुख ने शिक्षा, स्वास्थ्य एवं ग्रामीण आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कार्य किया। उनका सामाजिक योगदान चित्रकूट के लगभग 500 गांवों में विशेष रूप से परिलक्षित होता है।
  • देश के प्रथम ग्रामीण विश्वविद्यालय की स्थापना: चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना मध्य प्रदेश में नानाजी देशमुख ने की थी।
    • चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को देश का प्रथम ग्रामीण विश्वविद्यालय माना जाता है।
  • नानाजी देशमुख को संपूर्ण भारत में सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालयों की एक श्रृंखला प्रारंभ करने का श्रेय भी दिया जाता है।

 

डॉ. राम मनोहर लोहिया

 

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