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टोमेटो फ्लू- कारण, लक्षण, रोकथाम एवं उपचार

टोमेटो फ्लू- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- सामाजिक क्षेत्र के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित मुद्दे/स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं।

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टोमेटो फ्लू चर्चा में क्यों है?

  • हाल ही में, कम से कम चार राज्यों – केरल, तमिलनाडु, हरियाणा एवं ओडिशा से टोमेटो फ्लू के मामले सामने आए हैं।
  • इस संदर्भ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टोमैटो फ्लू संक्रमण की रोकथाम, परीक्षण एवं उपचार पर दिशा-निर्देशों का एक समुच्चय जारी किया।

 

टोमेटो फ्लू क्या है?

  • टोमेटो फ्लू के बारे में: टोमेटो फ्लू या टमाटर बुखार में बुखार, जोड़ों में दर्द एवं लाल, टमाटर जैसे चकत्ते आमतौर पर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में देखे जाते हैं।
    • टोमैटो फ्लू वायरल बुखार के अन्य लक्षणों जैसे दस्त, निर्जलीकरण, मतली एवं उल्टी तथा थकान के साथ होता है।
  • लक्षण: लाल “टमाटर” के चकत्ते पारंपरिक रूप से मुंह (जीभ, मसूड़ों एवं गाल के अंदर), हथेलियों  एवं तलवों तक ही सीमित थे।
    • हालांकि, अब चिकित्सक नितंबों पर चकत्ते एवं नाखून गिरने की भी सूचना दे रहे हैं।
  • कारण: शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि यह हाथ-पैर एवं मुंह के रोग (हैंड फुट एंड माउथ डिजीज/एचएफएमडी) है जो कॉक्ससैकी वायरस ए -6  एवं ए -16 जैसे एंटरोवायरस (आंत के माध्यम से प्रसारित वायरस) के समूह के कारण होती है।
    • एक अन्य रोगज़नक़ – आंत्र विषाणु 71 – भी रोग का कारण बनता है। हालांकि, यह अब बहुत प्रचलित नहीं है।
  • प्रभाव: लगभग सभी मामलों में, 99.9% मामलों में, रोग स्वयं सीमित है। किंतु, कुछ मामलों में यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम/सीएनएस) की जटिलताओं को जन्म दे सकता है।

 

टोमेटो फ्लू का उपचार

  • टोमेटो फ्लू रोग के लिए कोई विशिष्ट उपचार अथवा टीका उपलब्ध नहीं है।
  • टोमेटो फ्लू के संक्रमण वाले लोगों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जैसे बुखार के लिए पैरासिटामोल का नुस्खा।

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टोमेटो फ्लू की रोकथाम- राज्यों को केंद्र की सलाह

जैसा कि यह रोग मुख्य रूप से बच्चों में होता है, राज्यों को जारी की गई केंद्र की सलाह इन आयु समूहों में रोकथाम पर केंद्रित है।

  • परामर्शिका (एडवाइजरी) के अनुसार, किसी को भी संक्रमण होने का संदेह होने पर लक्षणों की शुरुआत के बाद पांच से सात दिनों तक एकांत (आइसोलेशन) में रहना चाहिए।
  • इसमें कहा गया है कि बच्चों को संक्रमण के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए एवं बुखार या चकत्ते वाले अन्य बच्चों को गले लगाने अथवा छूने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।
  • परामर्शिका में कहा गया है कि बच्चों को स्वच्छता बनाए रखने, अंगूठा या उंगली चूसना बंद करने एवं बहती नाक के लिए रुमाल का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • यदि किसी बच्चे में लक्षण विकसित होते हैं, तो उन्हें एकांत में (अलग-थलग) कर देना चाहिए, उनके बर्तन, कपड़े तथा बिस्तर को नियमित रूप से साफ करना चाहिए, उन्हें जलयोजित (हाइड्रेटेड) रखना चाहिए एवं फफोले को गर्म पानी से साफ करना चाहिए।
  • इसमें यह भी कहा गया है कि प्रकोप होने पर उपाय करने के लिए परीक्षण किया जाना चाहिए।
    • किसी भी श्वसन, मल, या मस्तिष्कमेरु द्रव के नमूने (एन्सेफलाइटिस या मस्तिष्क की सूजन के मामलों में)  रोग के 48 घंटों के भीतर एकत्रित किए जाने चाहिए।
    • घावों या त्वचा के खुरचनों के नमूनों की जीवऊति परीक्षा (बायोप्सी) में ऐसी समय सीमा नहीं होती है।

 

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