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Non-Cooperation Movement (Hindi)

असहयोग आंदोलन

इसकी आवश्यकता क्यों थी?

  •         प्रतिगामी नीतियों के कारण जनता में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध असंतोष में वृद्धि हो रही थी। यद्यपि, 1919 का   वर्ष, निम्नलिखित कारणों से ताबूत में कील सिद्ध हुआ:

o   युद्ध के बाद की अवधि में आर्थिक स्थिति ने जनता के लिए कठिनाइयां उत्पन्न की। बढ़ती कीमतों, घटते उत्पादन सहित अन्य कारणों से लोगों का जीवन दयनीय हो गया था।

o   रॉलेट एक्ट, मार्शल लॉ लागू करना और जलियांवाला बाग हत्याकांड ने लोगों को आश्वस्त करने का कार्य किया कि ब्रिटिश सरकार उनके प्रति  पूर्णत: असंवेदनशील है।

o  इसके अतिरिक्त, जलियांवाला बाग हत्याकांड के संबंध में हंटर आयोग की रिपोर्ट ने केवल आग में घी डालने का कार्य किया।

o   मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार द्वैध शासन की अवधारणा को प्रस्तुत करके भारतीयों को स्वशासन के अधिकार की गारंटी देने में विफल रहे।

इन मुद्दों ने धरातल पर कुछ विकास देखे जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा आम राजनीतिक कार्रवाई सम्मिलित थी।

  •         लखनऊ समझौता, रॉलेट एक्ट आंदोलन, अतिवादी राष्ट्रीय मुसलमानों के विकास ने साम्राज्य विरोधी भावनाओं को बढ़ावा दिया और परिस्थिति इसे सही दिशा प्रदान करने के लिए तैयार थी।

 

Non Cooperation Movement

खिलाफत समिति

  •         प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात अंग्रेजों द्वारा तुर्की में उनके सर्वोच्च नेता खलीफा के साथ जिस प्रकार से व्यवहार किया गया, उससे हमारे देश के मुसलमान क्षुब्ध थे।
  •         खिलाफत समिति का गठन अली बंधुओं – शौकत अली और मोहम्मद अली के नेतृत्व में किया गया था – ताकि सरकार को गलतियों को सुधारने के लिए राजी किया जा सके:

o   पवित्र मुस्लिम स्थलों पर खलीफा का नियंत्रण बनाए रखना और

o   खलीफा को उनके नियंत्रण में पर्याप्त क्षेत्रों के साथ छोड़ना।

  •         जब उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो एक क्रांतिकारी प्रवृत्ति का उदय हुआ एवं अंग्रेजों के साथ सभी सहयोग समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
  •         अखिल भारतीय खिलाफत समिति की स्थापना हुई और गांधीजी को इसका अध्यक्ष बनाया गया
  •         यह समिति जनता को एकजुट करने का एक मंच बन गई और एक अखिल भारतीय आंदोलन अपने नेता के आह्वान की प्रतीक्षा कर रहा था।

 

कांग्रेस का पक्ष

  •         गांधीजी खिलाफत का मुद्दा उठाकर एक अखिल भारतीय आंदोलन आरंभ करना चाहते थे।
  •         यद्यपि, कांग्रेस इस रणनीति पर संदेह कर रही थी ।
  •         तिलक, विशेष रूप से, एक धार्मिक कारण पर एक आंदोलन के आरंभ के पक्ष में नहीं थे।
  •         इसके अतिरिक्त, उन्हें राजनीतिक साधन के रूप में सत्याग्रह के बारे में संदेह था।
  •         उन्होंने आंदोलन के प्रावधान के रूप में परिषद के बहिष्कार का भी विरोध किया।
  •         इन कारणों के बावजूद, कांग्रेस ने निम्नलिखित कारणों से असहयोग कार्यक्रम का समर्थन किया:

o   यह अनुभव किया गया कि यह हिंदू-मुस्लिम एकता को सशक्त करने हेतु एक सुनहरा अवसर था। इसके  अतिरिक्त, इससे  पूर्व कभी भी आबादी का इतना विविध वर्ग एक सामान्य हित के लिए एक साथ नहीं आया था।

o   कांग्रेस ने संवैधानिक संघर्ष में विश्वास खो दिया और उन्होंने जनता के मध्य असंतोष का भी अनुभव किया।

  •         मुस्लिम लीग ने राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस को पूरा समर्थन दिया।
  •         गांधीजी ने तर्क दिया कि पंजाब की गलतियां खिलाफत के मुद्दे पर भारी पड़ गई हैं और वह शीघ्र ही एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारंभ करेंगे।

 

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असहयोग आंदोलन

  •         अगस्त 1920 में, पंजाब और खिलाफत की गलतियों को दूर करने और स्वराज की स्थापना के उद्देश्यों के साथ औपचारिक रूप से आंदोलन आरंभ किया गया था।
  •         कार्यक्रम में विद्यालयों, महाविद्यालय, विधि के न्यायालयों, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार सहित अन्यसम्मिलित थे। यद्यपि सी.आर.दास जैसे नेताओं के विरोध के साथ, विधान परिषदों का भी बहिष्कार किया गया, जो अंततः प्रस्ताव पर सहमत हुए।
  •         अहिंसा का आह्वान किया गया और लोगों ने अपना काम बंद कर दिया और गांधीजी के आह्वान का समर्थन किया।
  •         स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा दिया गया और हाथ से कताई (चरखा) एक घरेलू वस्तु बन गई।

 

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लोगों की प्रतिक्रिया

  •       छात्रों ने अपने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का परित्याग कर दिया एवं बड़ी संख्या में आंदोलन में भाग लिया।
  •         व्यवसायियों ने आर्थिक बहिष्कार के आह्वान का समर्थन किया क्योंकि वे स्वदेशी आंदोलन से लाभान्वित हो रहे थे।
  •         इस आंदोलन को कृषकों का समर्थन भी प्राप्त था।
  •         महिलाओं ने आंदोलन का समर्थन किया और धरना प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
  •         गांधीजी द्वारा तिलक स्वराज कोष की घोषणा की गई थी और इसका उद्देश्य स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष का समर्थन करने के लिए 1 करोड़ रुपये एकत्र करना था।

 

सरकार ने किस प्रकार प्रत्युत्तर दिया?

  •         सरकार ने क्रूरतापूर्वक दमन के साथ जवाब दिया और पुलिस ने कई जगहों पर पुलिस गोलीबारी का सहारा लिया।
  •         कांग्रेस और खिलाफत सदस्यों को अवैध घोषित कर दिया गया।
  •         गांधीजी के अतिरिक्त, सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

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आंदोलन को वापस लेना

  •         1922 में उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा में हिंसक भीड़ ने 20 से अधिक पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। बढ़ती हुई हिंसा को देखकर गांधीजी स्तब्ध रह गए और उन्होंने आंदोलन वापस लेने का निर्णय किया।
  •        सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू, सुभाष बोस, जवाहरलाल नेहरू जैसे राष्ट्रीय नेता इस निर्णय से अप्रसन्न थे।
  •         गांधीजी को गिरफ्तार कर छह वर्ष के लिए जेल भेज दिया गया था।

 

आंदोलन क्यों विफल हुआ?

  •         सरकार ने वार्ता करने का कोई आशय प्रकट नहीं किया और कुछ दिनों के बाद आंदोलन में थकान दिखाई देने लगी।
  •         1922 में मुस्तफा कमाल पाशा ने तुर्की का नेतृत्व किया और इसे एक धर्मनिरपेक्ष राज्य बना दिया। इसने खिलाफत के मुद्दे को अनावश्यक घोषित कर दिया।
  •         कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय स्थानों में सरकारी सेवाओं से त्यागपत्र की मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया।
  •         चौरी-चौरा की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोग अपने नेता के संदेश को नहीं समझ पाए थे।

 

आंदोलन का प्रभाव

  •         इस आंदोलन ने समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों को उनके घरों से बाहर निकालने में सहायता की। इसने राष्ट्रवादी नेताओं के संदेश को देश के कोने-कोने तक प्रसारित किया।
  •         स्वदेशी के विचार को एक मजबूत आधार देने के लिए गुजरात विद्यापीठ, काशी विद्यापीठ, बिहार विद्यापीठ, बंगाल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की गई।
  •         यह आंदोलन लोगों को एक साथ लाने और उनके समान दमनकर्ता को समझने में उनकी सहायता करने में मददगार था।
  •         आर्थिक पक्ष पर, विदेशी वस्तुओं का आयात1921 और 1922 के मध्य आधा हो गया था।
  •         सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रभावों में से एक, अन्यथा मानी जाने वाली, व्यापक पैमाने पर दमनकारी शक्ति के प्रति जनता के मध्य भय का समाप्त होना था।

 

Non-Cooperation Movement_30.1

 

http://bit.ly/2MNvT1m

 

 

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