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एशियाई सिंह संरक्षण परियोजना 

एशियाई सिंह संरक्षण परियोजना- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • सामान्य अध्ययन III- संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

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एशियाई सिंह संरक्षण परियोजना चर्चा में क्यों है?

  • केंद्र ने सिंह परियोजना (प्रोजेक्ट लायन) के लिए 25 वर्ष का रोडमैप तैयार किया है जिसकी घोषणा 10 अगस्त को विश्व सिंह दिवस पर की जानी है।

 

एशियाई सिंह 

  • एशियाई सिंह (जिसे फारसी सिंह या भारतीय शेर भी कहा जाता है) भारत में मौजूद पैंथेरा लियो लियो उप-प्रजाति का सदस्य है।
    • इन क्षेत्रों में विलुप्त होने से पूर्व यह पश्चिम एशिया एवं मध्य पूर्व में भी आवासित (बसा हुआ) था।
  • एशियाई शेर अफ्रीकी शेरों से आकार में थोड़े छोटे होते हैं।
  • एशियाई सिंहों में सदैव देखी जाने वाली विशिष्ट विशेषता उसके पेट के साथ चलने वाली त्वचा की एक अनुदैर्ध्य सतह है
  • यह भारत में निवास करने वाली पांच तेंदुआ बिल्लियों में से एक है। अन्य हैं:
    • रॉयल बंगाल टाइगर
    • भारतीय तेंदुआ
    • हिम तेंदुआ
    • धूमिल तेंदुए

स्थिति

  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध
  • सीआईटीईएस (CITES) का परिशिष्ट I
  • आईयूसीएन की लाल सूची में संकटग्रस्त
  • वर्तमान में गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभ्यारण्य एशियाई सिंहों का एकमात्र निवास स्थान है। 2020 में, गुजरात वन विभाग ने गिर वन क्षेत्र में एशियाई सिंहों की आबादी में वृद्धि की घोषणा की।

 

खतरे 

  • प्लेग या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित घटनाओं के प्रति इसकी संवेदनशीलता, गिर राष्ट्रीय उद्यान के समीप अवैध शिकार एवं स्थानीय लोगों द्वारा पशुधन पर हमलों के प्रतिशोध में शेरों को मार डाला जाना।

 

एशियाई सिंह संरक्षण परियोजना

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज/MoEFCC) द्वारा 2018 से 2021 तक तीन वित्तीय वर्षों के लिए “एशियाई सिंह संरक्षण परियोजना”  आरंभ की गई थी, जिसका उद्देश्य एशियाई सिंह एवं उससे संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र की विश्व की अंतिम मुक्त आबादी की रक्षा तथा संरक्षण करना था।
  • परियोजना को केंद्र प्रायोजित योजना- वन्यजीव पर्यावास विकास (सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम- डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटेट/सीएसएस-डीडब्ल्यूएच) से वित्त पोषित किया जाएगा, जिसमें अंशदान का अनुपात केंद्र एवं राज्यों के मध्य 60:40 होगा।
  • मंत्रालय ने अतीत में सीएसएस-डीडब्ल्यूएच के प्रजाति पुनर्प्राप्ति घटक के तहत 21 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में एशियाई सिंहों को सम्मिलित करके गुजरात में एशियाई सिंह का समर्थन किया है।

 

परियोजना का उद्देश्य

  • एशियाई सिंह का संरक्षण, जिसकी अंतिम शेष वन्य आबादी गुजरात के एशियाई सिंह परिदृश्य में है, क्योंकि एशियाई सिंह गुजरात के गिर परिदृश्य के लिए स्थानिक है एवं मंत्रालय द्वारा पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों को प्रारंभ करने हेतु 21 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों में से एक है।

 

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

  • पर्यावास सुधार” उपाय, जल के अधिक स्रोत उपलब्ध कराना, वन्यजीव अपराध प्रकोष्ठ निर्मित करना एवं वृहद गिर क्षेत्र के लिए एक कार्यबल (टास्क फोर्स) का गठन करना।
  • समर्पित पशु चिकित्सा संस्थान, “सिंह एम्बुलेंस” एवं टीकों के पूर्तिकर भंडार (बैक-अप स्टॉक)।
  • निगरानी ट्रैकिंग, पशु एवं वाहन ट्रैकिंग के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम।
  • चुंबकीय सेंसर, गतिशीलता सेंसर एवं अवरक्त किरण ऊष्मा (इन्फ्रा-रेड हीट) सेंसर के साथ एक स्वचालित सेंसर ग्रिड।

 

भारत में एशियाई सिंह संरक्षण

  • प्रोजेक्ट लायन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त, 2020 को की गई थी, जिसका उद्देश्य प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को सम्मिलित करके एवं साथ ही शेरों में रोगों के मुद्दों को हल करके पर्यावास विकास करना है।

 

सिंहों के संभावित स्थानांतरण हेतु छह नवीन स्थलों की पहचान (मध्य प्रदेश में कुनो-पालपुर वन्य जीव अभ्यारण्य के अतिरिक्त)

  • माधव राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश
  • सीतामाता वन्य जीव अभ्यारण्य, राजस्थान
  • मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, राजस्थान
  • गांधी सागर वन्य जीव अभ्यारण्य, मध्य प्रदेश
  • कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य, राजस्थान
  • जेसोर -बलराम अंबाजी वन्य जीव अभ्यारण्य एवं समीपवर्ती परिदृश्य, गुजरात

 

पुनर्वास हेतु कारण

  • प्रजातियों के लिए एक पुनर्वास स्थल खोजने के पीछे का उद्देश्य यह है कि गिर में आबादी में आनुवंशिक विविधता कम है, जिससे यह महामारी से विस्तार के खतरों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
  • प्रथम बार एशियाई सिंह के संपूर्ण जीनोम को सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, हैदराबाद के वैज्ञानिकों द्वारा अनुक्रमित किया गया है एवं गिर के सिंहों के पूर्ण जीनोम अनुक्रमण ने सिंहों की अन्य आबादी तथा ऐतिहासिक एशियाई सिंहों के नमूने की तुलना में आनुवंशिक विविधता में कमी का संकेत दिया है।

 

वर्तमान परिदृश्य

  • मध्य प्रदेश में कुनो-पालपुर वन्यजीव अभ्यारण्य को प्रजातियों के पुनः प्रवेश हेतु सर्वाधिक उपयुक्त माना गया था, किंतु प्रस्ताव पर कोई प्रगति नहीं हुई है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल 2013 में छह माह के भीतर कुछ शेरों को गुजरात से मध्य प्रदेश में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था, किंतु ऐसा नहीं हुआ।

 

क्या किया जा सकता है?

  • केंद्र तथा गुजरात सरकार को शेरों को मध्य प्रदेश के कुनो-पालपुर वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थानांतरित करना चाहिए एवं पुनः प्रोजेक्ट लायन के प्रस्तावों पर आगे बढ़ना चाहिए।

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प्रारंभिक परीक्षा हेतु उपयोगी तथ्य 

  • आईयूसीएन की लाल सूची के तहत एशियाई शेरों को ‘लुप्तप्राय’ (एंडेंजर्ड) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • इसकी आबादी भारत में गुजरात राज्य तक ही सीमित है।
  • राज्य एवं केंद्र सरकार के गंभीर संरक्षण प्रयासों के साथ, एशियाई शेरों की आबादी बढ़कर 500 से अधिक हो गई है जो 1890 के दशक के अंत तक 50 के आसपास हुआ करती थी।
  • 2015 की जनगणना के अनुसार गिर संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में कुल 523 एशियाई शेर थे।

 

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