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Idealism and Education- Education Aims, Curriculum, Teaching Methods and Discipline

Idealism plays a very important place in education. In idealism, teacher emphasize on moral and  spiritual education which helps child in learn to value of humanity, social sciences, art and literature. Idealism emphasizes on human perfection in various form i.e. physical, spiritual, intellectual, moral, esthetic and social.  Here we are going to learn about Idealism and Education – Aims, Curriculum, Teaching Methods and Discipline

 

IDEALISM AND EDUCATION / आदर्शवाद और शिक्षा

The word “Idealism” has been derived from ‘Ideal’. Plato conceived of ideas as the basis of his philosophy. Idealism is a philosophical position which adheres to the view that nothing exists except an idea in the mind of man. Idea or higher nature is essences. They are of ultimate cosmic significance. Idealism idolizes ‘mind and self’. An idealist shifts the emphasis from the natural or scientific facts of life to the spiritual aspects of human experiences.

“आदर्शवाद” शब्द की व्युत्पत्ति ‘आदर्श’ से हुई है। प्लेटो ने विचारों को अपने दर्शन का आधार माना। आदर्शवाद एक दार्शनिक स्थिति है जो इस दृष्टिकोण का पालन करती है कि मनुष्य के दिमाग में एक विचार के अलावा कुछ भी मौजूद नहीं है। विचार या उच्चतर प्रकृति सार है। वे परम लौकिक महत्व के हैं। आदर्शवाद ‘मन और स्वयं’ को मूर्तिमान करता है। एक आदर्शवादी जीवन के प्राकृतिक या वैज्ञानिक तथ्यों से मानव अनुभवों के आध्यात्मिक पहलुओं पर जोर देता है।

Philosophical meaning : – Idealism seeks to offer an explanation of the man and the universe in terms of spirit or mind. Idealism is in fact spiritualism. Man’s spiritual nature is considered to be the very essence of his being. It asserts that reality is to be found in man’s mind rather than in material nature.

दार्शनिक अर्थ: – आदर्शवाद आत्मा या मन के संदर्भ में मनुष्य और ब्रह्मांड की व्याख्या प्रस्तुत करना चाहता है। आदर्शवाद वास्तव में अध्यात्मवाद है। मनुष्य की आध्यात्मिक प्रकृति को उसके अस्तित्व का सार माना जाता है। यह दावा करता है कि वास्तविकता को भौतिक प्रकृति के बजाय मनुष्य के दिमाग में पाया जाना है।

CHIEF ASSERTIONS OF IDEALISM : –

  • Spirit and mind constitute reality : – Idealism believes that the spiritual nature of man is the essence of his being. The mental or spiritual is more real and important than material.
  • Man being spiritual is a supreme creation : – According to idealism the supreme aim of life is exaltation of human personality. Man is a spiritual being and it distinguishes him from other animals. Reality is found in the mind of man and in the external world.
  • Universal mind : – Idealism believes in universal mind. The little mind is a part of it. The goal of human life is to realize the universal mind.
  • Faith in spiritual values : – Values are absolute and unchanging. The prime aim of human life is to achieve spiritual values. These are truth, beauty and goodness. In the pursuit of these values man rises higher and higher in the moral plan till he attains divinity.
  • Real knowledge is perceived in mind : – God is the source of all knowledge, knowledge acquired through the activity, creativity and exercise of mind is important than the knowledge acquired through senses.

आदर्शवाद के प्रमुख दावे :-

  • आत्मा और मन वास्तविकता का निर्माण करते हैं: – आदर्शवाद का मानना ​​है कि मनुष्य की आध्यात्मिक प्रकृति उसके होने का सार है। मानसिक या आध्यात्मिक भौतिक से अधिक वास्तविक और महत्वपूर्ण है।
  • मनुष्य का आध्यात्मिक होना एक सर्वोच्च रचना है :- आदर्शवाद के अनुसार जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मानव व्यक्तित्व का उत्थान है। मनुष्य एक आध्यात्मिक प्राणी है और यह उसे अन्य जानवरों से अलग करता है। वास्तविकता मनुष्य के मन में और बाहरी दुनिया में पाई जाती है।
  • सार्वभौम मन: – आदर्शवाद सार्वभौमिक मन में विश्वास करता है। छोटा दिमाग इसका एक हिस्सा है। मानव जीवन का लक्ष्य सार्वभौमिक मन को साकार करना है।
  • आध्यात्मिक मूल्यों में आस्था :- मूल्य निरपेक्ष और अपरिवर्तनीय होते हैं। मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों को प्राप्त करना है। ये सत्य, सौंदर्य और अच्छाई हैं। इन मूल्यों की खोज में मनुष्य नैतिक योजना में तब तक ऊँचा और ऊँचा उठता जाता है जब तक कि वह देवत्व प्राप्त नहीं कर लेता।
  • वास्तविक ज्ञान मन में माना जाता है: – ईश्वर सभी ज्ञान का स्रोत है, गतिविधि के माध्यम से प्राप्त ज्ञान, रचनात्मकता और मन का व्यायाम इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान से महत्वपूर्ण है

AIMS OF EDUCATION : –

  • Self – realization or exaltation of human personality. According to idealism, man is the most beautiful creature of God his grandest work. It lays stress on the exaltation of human personality. It is self – realization. The aim of education is to develop the self of the individual’s higher till self – realization is achieved.
  • Universal education. Education should be universal in nature. Education should be based on the teaching of universal truth from the stand point of rationality of the universe.
  • Spiritual development. Idealists give greater importance to spiritual values in comparison with material attainments. According to Rusk, “Education must enable mankind through its culture to enter more and more fully into the spiritual realm, and also enlarge the boundaries of spiritual realm”.
  • Transmission & promotion of cultural heritage. Education must contribute to the development of culture, enlarging the boundaries of spiritual realm. The child has to be introduced to his cultural heritage so as to enable him to conserve, promote and transmit it to the rising generation.
  • Cultivation of moral values. According to idealism, man is a moral being. The process of education must lead to the deepest spiritual insight and to the highest moral and spiritual conduct.
  • Development of intelligence and rationality. There are set principles working in this creation. An idealist always tries to discover and understand these principles so that on the basis of moral elements the world remains organized. Hence, education is to develop the intelligence and rationality of the child.

In short the idealists believe that education must help in the full evolution of mind, the emancipation of spirit, self – realization and the realization of higher values of life and to train “the whole man completely and fully for manhood  and not some part of man”.

शिक्षा के उद्देश्य: –

  • आत्म-साक्षात्कार या मानव व्यक्तित्व का उत्थान- आदर्शवाद के अनुसार मनुष्य ईश्वर का सबसे सुंदर प्राणी है, उसकी सबसे बड़ी कृति है। यह मानव व्यक्तित्व के उत्थान पर जोर देता है। यह आत्म-साक्षात्कार है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के उच्च के स्वयं को तब तक विकसित करना है जब तक कि आत्म-साक्षात्कार प्राप्त न हो जाए।
  • सार्वभौमिक शिक्षा- शिक्षा प्रकृति में सार्वभौमिक होनी चाहिए। शिक्षा ब्रह्मांड की तर्कसंगतता के दृष्टिकोण से सार्वभौमिक सत्य की शिक्षा पर आधारित होनी चाहिए।
  • आध्यात्मिक विकास- आदर्शवादी भौतिक उपलब्धियों की तुलना में आध्यात्मिक मूल्यों को अधिक महत्व देते हैं। रस्क के अनुसार, “शिक्षा को मानव जाति को अपनी संस्कृति के माध्यम से आध्यात्मिक क्षेत्र में अधिक से अधिक पूर्ण रूप से प्रवेश करने और आध्यात्मिक क्षेत्र की सीमाओं को विस्तारित करने में सक्षम बनाना चाहिए”।
  • सांस्कृतिक विरासत का प्रसारण और संवर्धन- शिक्षा को आध्यात्मिक क्षेत्र की सीमाओं का विस्तार करते हुए संस्कृति के विकास में योगदान देना चाहिए। बच्चे को उसकी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना होगा ताकि वह उसे संरक्षित करने, बढ़ावा देने और उसे उभरती पीढ़ी तक पहुँचाने में सक्षम हो सके।
  • नैतिक मूल्यों की खेती आदर्शवाद के अनुसार मनुष्य एक नैतिक प्राणी है। शिक्षा की प्रक्रिया को गहन आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और उच्चतम नैतिक और आध्यात्मिक आचरण की ओर ले जाना चाहिए।
  • बुद्धि और तर्कसंगतता का विकास- इस सृष्टि में काम करने वाले निर्धारित सिद्धांत हैं। एक आदर्शवादी हमेशा इन सिद्धांतों को खोजने और समझने की कोशिश करता है ताकि नैतिक तत्वों के आधार पर दुनिया संगठित रहे। इसलिए, शिक्षा बच्चे की बुद्धि और तर्कसंगतता का विकास करना है।

संक्षेप में आदर्शवादियों का मानना है कि शिक्षा को मन के पूर्ण विकास, आत्मा की मुक्ति, आत्म-साक्षात्कार और जीवन के उच्च मूल्यों की प्राप्ति में मदद करनी चाहिए और “पूरे आदमी को पूरी तरह से और पूरी तरह से मर्दानगी के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए, न कि मनुष्य के किसी हिस्से को”।”.

CURRICULUM : –

While developing curriculum, idealist give more importance to thought, feelings, ideals and values than to the child and his activities. They hold that curriculum should be concerned with the whole humanity and experiences. Human  activities may be classified as :

1. Intellectual.
2. Aesthetics.
3. Moral.
4. Physical.

Great importance is given to humanities, culture, art, history, philosophy, literature and religion. Idealism does not ignore physical activities for with health and fitness the pursuit of spiritual values is seriously hampered. Ross has beautifully synthesized physical and spiritual activities in the following way :

पाठ्यचर्या:

आदर्शवादी पाठ्यचर्या विकसित करते समय बच्चे और उसकी गतिविधियों की तुलना में विचार, भावनाओं, आदर्शों और मूल्यों को अधिक महत्व देते हैं। उनका मानना ​​है कि पाठ्यचर्या का संबंध संपूर्ण मानवता और अनुभवों से होना चाहिए। मानव गतिविधियों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. बौद्धिक
  2. सौंदर्यशास्त्र
  3. नैतिक
  4. शारीरिक

मानविकी, संस्कृति, कला, इतिहास, दर्शन, साहित्य और धर्म को बहुत महत्व दिया जाता है। आदर्शवाद शारीरिक गतिविधियों की उपेक्षा नहीं करता है क्योंकि स्वास्थ्य और फिटनेस के साथ आध्यात्मिक मूल्यों की खोज गंभीर रूप से बाधित होती है। रॉस ने शारीरिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को खूबसूरती से निम्नलिखित तरीके से संश्लेषित किया है:

 

METHODS OF TEACHING : –

Idealism has not prescribed specific method of teaching. According to idealism classroom is a temple of spiritual learning, a meeting place of human minds is a place for self – education. For this no particular method has been suggested. However, the following methods have been advocated by different idealists : –

  1. Learning through reading.
  2. Learning through lecturing.
  3. Learning through discussion.
  4. Learning through imitation.
  5. Learning through questioning.
  6. Descartes employed the device of simple to complex. Herbert advocated Instruction Method while as Froebel insisted upon play – way Method. In all, Socrates Method and Discussion Method form the basis of

पढ़ाने के तरीके :-

आदर्शवाद ने शिक्षण की विशिष्ट पद्धति निर्धारित नहीं की है। आदर्शवाद के अनुसार कक्षा आध्यात्मिक शिक्षा का मंदिर है, मानव मन का मिलन स्थल आत्म-शिक्षा का स्थान है। इसके लिए कोई विशेष तरीका नहीं सुझाया गया है। हालाँकि, विभिन्न आदर्शवादियों द्वारा निम्नलिखित विधियों की वकालत की गई है: –

  1. पठन के माध्यम से सीखना।
  2. व्याख्यान के माध्यम से सीखना।
  3. चर्चा के माध्यम से सीखना।
  4. अनुकरण के माध्यम से सीखना।
  5. प्रश्न पूछकर सीखना।
  6. डेसकार्टेस ने सरल से जटिल की युक्ति का प्रयोग किया। हर्बर्ट ने निर्देश पद्धति की वकालत की, जबकि फ्रोबेल ने खेलने के तरीके पर जोर दिया। कुल मिलाकर, सुकरात विधि और चर्चा पद्धति आदर्शवाद का आधार बनती है।

Idealism and teacher :-

Education according to the idealist pattern is ideal – centered, not wholly child – centered, or  subject – centered. Idealistic pattern of education grants the highest place to the educator. The teacher creates a specific environment for the educand’s development.

आदर्शवाद और शिक्षक: आदर्शवादी पद्धति के अनुसार शिक्षा आदर्श-केंद्रित है, न कि पूर्ण रूप से बाल-केंद्रित, या विषय-केंद्रित। शिक्षा का आदर्शवादी पैटर्न शिक्षक को सर्वोच्च स्थान प्रदान करता है। शिक्षक शिक्षा के विकास के लिए एक विशिष्ट वातावरण का निर्माण करता है।

Role of teacher : –

  1. The teacher personifies reality for the pupil. The pupil understands and learns about the universe through his teacher.
  2. The teacher has to be a specialist in the knowledge of each one of his pupils.
  3. A good teacher commands the respect of the pupils by virtue of his own high standards of behavior and conduct.
  4. The teacher should be a personal friend of the individual.
  5. He provides standards of imitation.

शिक्षक की भूमिका :-

  1. शिक्षक छात्र के लिए वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करता है। शिष्य अपने शिक्षक के माध्यम से ब्रह्मांड के बारे में समझता और सीखता है।
  2. शिक्षक को अपने प्रत्येक छात्र के ज्ञान का विशेषज्ञ होना चाहिए।
  3. एक अच्छा शिक्षक अपने व्यवहार और आचरण के उच्च मानकों के आधार पर विद्यार्थियों के सम्मान की आज्ञा देता है।
  4. शिक्षक व्यक्ति का व्यक्तिगत मित्र होना चाहिए।
  5. वह अनुकरण के मानक प्रदान करता है।

Idealism and Discipline.

Idealist attaches importance to impressionistic discipline in comparison with repressionistic discipline. They assert that the teacher should first gain respect from the child by his affectionate and  sympathetic behavior and then motivate him to learn by his praiseworthy ideals. He has to sublimate his basic  instincts. He has to maintain such environment so as to control his undesirable activities and develop desirable  qualities of head and heart in such a way that he begins to exercise and maintain self – discipline. The student should realize that this self – discipline is for his own good and development.

आदर्शवाद और अनुशासन- आदर्शवादी दमनवादी अनुशासन की तुलना में प्रभाववादी अनुशासन को महत्व देता है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि शिक्षक को पहले अपने स्नेही और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार से बच्चे से सम्मान प्राप्त करना चाहिए और फिर उसे अपने प्रशंसनीय आदर्शों से सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उसे अपनी मूल प्रवृत्ति को ऊंचा करना होगा। उसे ऐसा वातावरण बनाए रखना होता है जिससे कि वह अपनी अवांछनीय गतिविधियों को नियंत्रित कर सके और वांछनीय विकास कर सके दिमाग और दिल के गुण इस तरह से हैं कि वह व्यायाम करना शुरू कर देता है और आत्म अनुशासन बनाए रखता है। छात्र को यह समझना चाहिए कि यह आत्म-अनुशासन उसके अपने भले और विकास के लिए है।

Conclusion : – Idealism has made a significant contribution to education thought. It has given higher place to mental and spiritual than to physical world. It stresses religious education for character training. Idealistic philosophy provides clear and direct guidelines for the aims in education, curricula, teacher’s role and method of teaching.

निष्कर्ष : आदर्शवाद ने शिक्षा चिंतन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने भौतिक संसार की अपेक्षा मानसिक और आध्यात्मिक को उच्च स्थान दिया है। यह चरित्र प्रशिक्षण के लिए धार्मिक शिक्षा पर जोर देता है। आदर्शवादी दर्शन शिक्षा, पाठ्यचर्या, शिक्षक की भूमिका और शिक्षण पद्धति के उद्देश्यों के लिए स्पष्ट और प्रत्यक्ष दिशा-निर्देश प्रदान करता है।

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