Correct option is B
Ans. (b) तमस
भीष्म साहनी का उपन्यास 'तमस' 1973 में प्रकाशित हुआ था। यह उपन्यास 1947 में भारत की स्वतंत्रता से पूर्व पंजाब, विशेषकर रावलपिंडी, में उत्पन्न सांप्रदायिक तनाव और उससे जुड़ी क्रूरताओं का सजीव चित्रण करता है। 'तमस' में दिखाया गया है कि कैसे एक साजिश के तहत मस्जिद की सीढ़ियों पर सुअर का मांस फेंकने से सांप्रदायिक दंगे भड़क उठते हैं, जो हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसा, आगजनी और हत्या का कारण बनते हैं। यह उपन्यास विभाजन पूर्व की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
Information Booster:
'तमस' भीष्म साहनी का एक प्रसिद्ध उपन्यास है, जो 1973 में प्रकाशित हुआ था। यह उपन्यास 1947 में भारत की स्वतंत्रता से पूर्व पंजाब के रावलपिंडी जिले में हुए सांप्रदायिक दंगों पर आधारित है। 'तमस' को 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बाद में, 1986 में, इस पर आधारित एक टेलीविज़न धारावाहिक और फिल्म का निर्माण भी किया गया।
कथानक:
उपन्यास की कहानी पांच दिनों की घटनाओं को समेटे हुए है। कहानी की शुरुआत नत्थू चमार से होती है, जिसे मुराद अली नामक व्यक्ति पांच रुपये देकर एक सुअर मारने के लिए कहता है। मुराद अली इस सुअर के शव को मस्जिद की सीढ़ियों पर फेंकवा देता है, जिससे मुसलमान समुदाय में आक्रोश फैलता है। इसके परिणामस्वरूप, सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है और शहर में दंगे भड़क उठते हैं। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के बीच हिंसा, आगजनी और हत्या की घटनाएं होने लगती हैं। यह उपन्यास दिखाता है कि कैसे राजनीतिक स्वार्थ और धार्मिक कट्टरता के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है।
प्रमुख पात्र:
नत्थू चमार: एक निम्न जाति का व्यक्ति, जो अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए सुअर मारने का काम करता है।
मुराद अली: एक चालाक व्यक्ति, जो अपने स्वार्थ के लिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने में संलग्न है।
रिचर्ड: अंग्रेज़ अधिकारी, जो प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त है और दंगों के दौरान तटस्थ रहने का प्रयास करता है।
लाला लक्ष्मीनारायण: हिंदू महासभा का सदस्य, जो सांप्रदायिक भावनाओं को बढ़ावा देता है।
देवदत्त: एक सच्चा साम्यवादी, जो सभी समुदायों में सौहार्द स्थापित करने का प्रयास करता है।
विशेषताएँ:
'तमस' उपन्यास में भीष्म साहनी ने सांप्रदायिकता के विभिन्न पहलुओं का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए धर्म का उपयोग करते हैं और सामान्य जनता को हिंसा की आग में झोंक देते हैं। उपन्यास की भाषा सरल और प्रभावशाली है, जिसमें हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेज़ी शब्दों का समावेश है। संवाद और नाटकीय तत्वों का प्रयोग कथानक को जीवंत बनाता है।
प्रासंगिकता:
'तमस' आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि यह दिखाता है कि सांप्रदायिकता कैसे समाज को विभाजित करती है और मानवता को नुकसान पहुंचाती है। भीष्म साहनी ने इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश दिया है कि धर्म और राजनीति के घातक मिश्रण से बचना चाहिए और मानवता को सर्वोपरि रखना चाहिए।
Additional Knowledge:
भीष्म साहनी के प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं:
झरोखे (1967): यह उपन्यास समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन और उनकी समस्याओं का चित्रण करता है।
तमस (1973): यह उपन्यास 1947 में भारत के विभाजन के समय पंजाब में हुए सांप्रदायिक दंगों पर आधारित है। इसके लिए उन्हें 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
बसंती (1980): इस उपन्यास में एक महिला की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा का वर्णन है, जो समाज की रूढ़िवादी धारणाओं से जूझती है।
कुंतो (1987): यह उपन्यास एक महिला के जीवन के माध्यम से समाज में महिलाओं की स्थिति और उनकी चुनौतियों को प्रस्तुत करता है।
मय्यादास की माड़ी (1993): इस उपन्यास में एक परिवार की कई पीढ़ियों की कहानी के माध्यम से समाज में आए परिवर्तनों का चित्रण किया गया है।
नीलू नीलिमा नीलोफर (1995): यह उपन्यास तीन महिलाओं की कहानियों के माध्यम से समाज में महिलाओं की स्थिति और उनकी संघर्षों को प्रस्तुत करता है।
कड़ियाँ: इस उपन्यास में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच के संबंधों और उनकी जटिलताओं का वर्णन है।