Correct option is B
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चिंतामणि, देव, भिखारीदास, और मतिराम हिंदी साहित्य के रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं। इनके जीवन और साहित्यिक योगदान का विवरण निम्नलिखित है:
सूची-I | सूची -II | |
श्रृंगार मंजरी | - | चिंतामणि |
साहित्यसार | - | मतिराम |
रस सारांश | - | भिखारीदास |
प्रेमचंद्रिका | - | देव |
चिंतामणि:
चिंतामणि रीतिकाल के रीतिग्रंथकार कवि थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के त्रिविक्रंपुर (तिकवाँपुर) गाँव में हुआ था। वे कश्यप गोत्रीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। चिंतामणि के दो भाई, भूषण और मतिराम, भी प्रसिद्ध कवि थे। उनकी रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता थी, और उन्होंने रीतिबद्ध काव्यधारा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रमुख कृतियाँ :
- शृंगार मंजरी
- छंद विचार
- कवित्त विचार
- काव्य प्रकाश
देव:
देव रीतिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे, जिन्होंने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। उनकी रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता थी, और उन्होंने नायिका भेद, अलंकार, और रसों का सुंदर वर्णन किया। देव की भाषा सरल, सरस और प्रवाहपूर्ण थी, जो पाठकों को आकर्षित करती है।
प्रमुख कृतियाँ :
- अष्टयाम
- जातिविलास
- प्रेमचंद्रिका
- शब्दरसायन
- वैराग्य शतक
भिखारीदास:
भिखारीदास रीतिकाल के श्रेष्ठ हिंदी कवि और आचार्य थे। उनका जन्म सन् 1721 ई. में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ट्योंगा नामक स्थान में हुआ था। उन्होंने रस, अलंकार, छंद, और काव्यशास्त्र पर विस्तृत ग्रंथों की रचना की। भिखारीदास ने काव्यांगों का निरूपण करते हुए साहित्यशास्त्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रमुख कृतियाँ :
- रस सारांश
- विष्णु पुराण भाषा
- अमरप्रकाश कोश
- काव्य निर्णय
- छंदारवण पिंगल
मतिराम:
मतिराम हिंदी के प्रसिद्ध ब्रजभाषा कवि थे, जिनका जन्म सन् 1617 में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के तिकवाँपुर गाँव में हुआ था। वे आचार्य चिंतामणि और भूषण के भाई थे। मतिराम की रचनाओं की विशेषता उनकी सरलता और स्वाभाविकता है, जिसमें भावों की कृत्रिमता नहीं है। उन्होंने बूँदी के महाराव भावसिंह के दरबार में रहकर काव्य रचना की।
- मतिराम सतसई
- ललित ललाम
- रसराज
- अलंकार पंचाशिका
- प्रमुख कृतियाँ :