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हम राज्य लिए मरते हैं।सच्चा राज्य परन्तु हमारे कर्षक ही करते हैं।'इस प्रसंग में उर्मिला का कौन-सा विचार सही नहीं है?
Question

हम राज्य लिए मरते हैं।

सच्चा राज्य परन्तु हमारे कर्षक ही करते हैं।'
इस प्रसंग में उर्मिला का कौन-सा विचार सही नहीं है?

A.

सामंती समाज में स्तियाँ मर्यादा के नाम पर घर की चारदीवारी में कैद होती हैं।

B.

किसान स्रियाँ अपने पतियों के साथ स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करती हैं।

C.

किसान राज-समाज से अधिक सुखी हैं।

D.

राज्य-सुख भाग्यशाली लोगों को प्राप्त होता है।

Correct option is D

Ans. (d)

व्याख्या:मैथिलीशरण गुप्त के महाकाव्य 'साकेत' के नवम् सर्ग से उद्धृत यह पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों और उनके जीवन की विषमताओं पर प्रकाश डालती है। उर्मिला के विचार में राज्य-सुख केवल भाग्यशाली लोगों को प्राप्त नहीं होता, बल्कि यह कर्षकों (किसानों) के कठोर परिश्रम का परिणाम होता है।

उर्मिला सामंती समाज की सीमाओं और असमानताओं पर टिप्पणी करते हुए किसानों के श्रम और उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली को राज-समाज की तुलना में अधिक सार्थक मानती हैं।

Information Booster:

साकेत मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित एक उत्कृष्ट महाकाव्य है, जो भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है। यह महाकाव्य रामायण के पात्रों और घटनाओं पर आधारित है, लेकिन इसे एक नई दृष्टि और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

महाकाव्य का परिचय:

  1. लेखक: मैथिलीशरण गुप्त (खड़ी बोली हिंदी के कवि और आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभ)।
  2. प्रकाशन वर्ष: 1931
  3. विषय-वस्तु: रामायण की कथा, मुख्य रूप से उर्मिला, लक्ष्मण, और अन्य पात्रों के मानसिक द्वंद्व और संघर्ष।
  4. शैली: खड़ी बोली में रचित यह काव्य छायावाद और मानवतावादी दृष्टिकोण का समन्वय है।

मुख्य विशेषताएँ:

  1. उर्मिला का चरित्र:
    • महाकाव्य का केंद्र उर्मिला हैं, जो रामायण में उपेक्षित पात्र मानी जाती हैं।
    • उर्मिला के बलिदान, धैर्य और प्रेम को विशेष रूप से उभारा गया है।
  2. मानवीय दृष्टिकोण:
    • यह महाकाव्य रामायण को मानवीय भावनाओं के साथ प्रस्तुत करता है।
    • पात्रों के आंतरिक संघर्ष और मनोभावों को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है।
  3. भाषा:
    • खड़ी बोली हिंदी में सरल और प्रभावी शैली का उपयोग।
    • काव्यात्मकता और गंभीरता।

Additional Knowledge :

मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने खड़ी बोली हिंदी को काव्य की भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रमुख रचनाएँ और उनके प्रकाशन वर्ष निम्नलिखित हैं:

कृति
प्रकाशन वर्ष
रंग में भंग
1909
जयद्रथ वध
1910
भारत-भारती
1912
किसान
1918
साकेत
1932
यशोधरा
1932
पंचवटी
1925
द्वापर
1936
सिद्धराज
1940
नहुष
1941
काबा और कर्बला
1944
विष्णुप्रिया
1947
जयभारत
1952
अंजलि और अर्ध्य
1958
कुणाल गीत
1961

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