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    "बड़े आदमियों को अपनी नाक दूसरों की जान से प्यारी होगी, हमें तो अपनी नाक इतनी प्यारी नहीं।" यह 'गोदान' के किस पात्र की भावाभिव्यक्ति है?
    Question

    "बड़े आदमियों को अपनी नाक दूसरों की जान से प्यारी होगी, हमें तो अपनी नाक इतनी प्यारी नहीं।" यह 'गोदान' के किस पात्र की भावाभिव्यक्ति है?

    A.

    धनिया 

    B.

    झुनिया

    C.

    सिलिया 

    D.

    पटेश्वरी 

    Correct option is A


    Ans. (a)
    मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान' में यह पंक्ति होरी की पत्नी धनिया द्वारा कही गई है। धनिया एक साहसी और निडर महिला है, जो सामाजिक अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाती है। वह अपने परिवार की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार रहती है। इस उद्धरण में, वह यह स्पष्ट करती है कि बड़े लोग अपनी प्रतिष्ठा (नाक) को दूसरों की जान से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि वह ऐसी सोच नहीं रखती।

    मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित 'गोदान' हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण उपन्यास है, जो भारतीय ग्रामीण जीवन की जटिलताओं और किसानों की दुर्दशा का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास का प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था।

    कथानक:

    'गोदान' की कहानी मुख्य रूप से होरी महतो नामक एक गरीब किसान के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जीवन की सबसे बड़ी आकांक्षा एक गाय का स्वामित्व प्राप्त करना है। गाय भारतीय ग्रामीण समाज में धन, प्रतिष्ठा, और धार्मिक महत्व का प्रतीक मानी जाती है। होरी अपनी पत्नी धनिया और बच्चों के साथ मिलकर कठिन परिश्रम करता है, लेकिन सामाजिक और आर्थिक शोषण के चलते उसकी स्थिति दिन-ब-दिन दयनीय होती जाती है।

    मुख्य पात्र:

    • होरी महतो: उपन्यास का नायक, जो एक ईमानदार और परिश्रमी किसान है।

    • धनिया: होरी की पत्नी, जो साहसी और निडर स्वभाव की है।

    • गोबर: होरी का बेटा, जो पारंपरिक जीवन से विद्रोह करता है और शहर की ओर रुख करता है।

    • झुनिया: गोबर की प्रेमिका, जो सामाजिक बंधनों के खिलाफ जाकर होरी के परिवार में शरण लेती है।

    मुख्य विषयवस्तु:

    उपन्यास में प्रेमचंद ने ग्रामीण भारत की सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक समस्याओं को उजागर किया है। किसानों का शोषण, जमींदारी प्रथा, महाजनी सभ्यता, जातिगत भेदभाव, और धार्मिक पाखंड जैसे मुद्दों को उन्होंने बारीकी से प्रस्तुत किया है। होरी की त्रासदीपूर्ण जीवन यात्रा के माध्यम से लेखक ने यह दिखाया है कि कैसे एक साधारण किसान सामाजिक और आर्थिक शोषण के चक्र में फंसकर अपने सपनों की बलि चढ़ा देता है।

    सारांश:

    होरी महतो की सबसे बड़ी इच्छा एक गाय खरीदना है, ताकि वह सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त कर सके। वह कर्ज लेकर गाय खरीदता है, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं के चलते उसकी स्थिति और बिगड़ती जाती है। उसका बेटा गोबर शहर भाग जाता है, और बहू झुनिया को वह अपने घर में शरण देता है, जिससे समाज में उसकी निंदा होती है। आर्थिक तंगी, सामाजिक अपमान, और पारिवारिक तनाव के बीच होरी का जीवन संघर्षमय बन जाता है। अंततः, अपनी अंतिम इच्छा 'गोदान' (गाय का दान) को पूरा किए बिना ही होरी की मृत्यु हो जाती है, जो भारतीय किसान की त्रासदी को दर्शाता है।

    समीक्षा:

    'गोदान' भारतीय ग्रामीण जीवन का महाकाव्य माना जाता है। प्रेमचंद ने यथार्थवादी दृष्टिकोण से किसानों की समस्याओं, सामाजिक कुरीतियों, और आर्थिक शोषण को उजागर किया है। उपन्यास में पात्रों का मनोवैज्ञानिक चित्रण, संवादों की प्रामाणिकता, और सामाजिक परिस्थितियों का सजीव वर्णन इसे हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर बनाता है।

    Information Booster:

    मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकारों में से एक हैं, जिन्होंने भारतीय समाज की विविध समस्याओं और जनजीवन की सच्चाइयों को अपने उपन्यासों में सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। उनके प्रमुख उपन्यासों का विवरण निम्नलिखित है:

    1. सेवासदन (1918):

    यह उपन्यास नारी जीवन की समस्याओं, दहेज प्रथा, बेमेल विवाह, और समाज में व्याप्त पाखंड को उजागर करता है। मुख्य पात्र, एक महिला, सामाजिक बंधनों से जूझते हुए अपने अस्तित्व की खोज करती है।

    2. वरदान (1920):

    'वरदान' एक प्रेम कथा है, जिसमें प्रेमचंद ने दो प्रेमियों के माध्यम से प्रेम की सच्ची परिभाषा को प्रस्तुत किया है। उपन्यास में प्रेम के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया गया है।

    3. प्रेमाश्रम (1922):

    इस उपन्यास में ग्रामीण किसानों की समस्याओं, जमींदारी प्रथा, और सामाजिक अन्याय को दर्शाया गया है। कहानी में किसानों के संघर्ष और उनके अधिकारों की लड़ाई को प्रमुखता से दिखाया गया है।

    4. रंगभूमि (1925):

    'रंगभूमि' में सूरदास नामक एक अंधे भिखारी की कहानी है, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता है। उपन्यास सामाजिक असमानता, जातिवाद, और भ्रष्टाचार की आलोचना करता है।

    5. कायाकल्प (1926):

    इस उपन्यास में भारतीय ग्रामीण जीवन की जटिलताओं को दर्शाया गया है। मुख्य पात्र हरिदास की आत्म-खोज और सामाजिक सुधार की यात्रा को प्रस्तुत किया गया है।

    6. निर्मला (1927):

    'निर्मला' दहेज प्रथा और अनमेल विवाह की समस्याओं पर केंद्रित है। कहानी एक युवा लड़की की है, जिसका विवाह एक वृद्ध पुरुष से होता है, और वह अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करती है।

    7. गबन (1931):

    यह उपन्यास मध्यवर्गीय समाज की आर्थिक समस्याओं और नैतिक पतन को उजागर करता है। मुख्य पात्र रमानाथ अपनी पत्नी की इच्छाओं को पूरा करने के लिए गबन करता है, जिससे उसकी जिंदगी में अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

    8. कर्मभूमि (1933):

    'कर्मभूमि' में विभिन्न राजनीतिक समस्याओं और सामाजिक सुधार आंदोलनों का चित्रण है। उपन्यास में युवाओं की भूमिका और उनके संघर्ष को प्रमुखता से दिखाया गया है।

    9. गोदान (1936):

    प्रेमचंद का अंतिम और सबसे प्रसिद्ध उपन्यास, 'गोदान' भारतीय ग्रामीण जीवन की त्रासदी को दर्शाता है। मुख्य पात्र होरी महतो की कहानी किसानों की दुर्दशा, सामाजिक शोषण, और आर्थिक संघर्ष को उजागर करती है।

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