Correct option is B
परिचय
दशरूपक संस्कृत नाट्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें नाट्यकला के विभिन्न तत्वों का विस्तृत वर्णन है। 'अर्थोपक्षेपक' वे तत्व हैं जो नाटक के कथानक को आगे बढ़ाने या भूतकाल की घटनाओं को सूचित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जो मंच पर सीधे प्रदर्शित नहीं किए जा सकते.
व्याख्या
दशरूपक के अनुसार, अर्थोपक्षेपकों में चूलिका और अङ्कावतार परिगणित हैं।
· चूलिका (B): यह एक अर्थोपक्षेपक है जिसमें मंच के भीतर से (नेपथ्य से) पात्रों द्वारा कही गई बातें सुनाई जाती हैं, जो दर्शकों को आगामी घटनाओं या किसी गुप्त सूवना से अवगत कराती हैं।
· अङ्कावतारः(D): यह भी एक अर्थोपक्षेपक है जिसमें एक अंक की समाप्ति पर ही जगते अंक की कथावस्तु का कुछ अंश सूचित कर दिया जाता है, जिससे कथा का प्रवाह बना रहता है।
रोचक तथ्य
· परिभाषणम् (A): यह दखरूपक के अनुसार अर्थोपक्षेपकों में नहीं आता है। यह सामान्यतः किसी विषय की परिभाषा या व्याख्या को संदर्भित करता है।
· उपगूहनम् (C): यह नाट्यशासन में 'अर्थप्रकृति' के अंतर्गत आता है, जिसका अर्थ है किसी रहस्य या गुप्त बात को छिपाना या उसका संकेत देना, लेकिन यह सीचे अर्थोपक्षेपक की श्रेणी में नहीं आता।