arrow
arrow
arrow
एतेषु युग्मेषु विचार्यताम् - 1. मुख्यार्थस्य स्वविशेषरूपार्थान्तरसंक्रमितत्वात् - अर्थान्तरसंक्रमितवाच्यत्वम् । 2. मुख्यार्थस्यात्यन्ततिरस्कृतत्
Question

एतेषु युग्मेषु विचार्यताम् -
1. मुख्यार्थस्य स्वविशेषरूपार्थान्तरसंक्रमितत्वात् - अर्थान्तरसंक्रमितवाच्यत्वम् ।
2. मुख्यार्थस्यात्यन्ततिरस्कृतत्वात् - अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यत्वम् ।
3. वस्त्वलंकाररूपत्वाच्छब्दशक्त्युद्भवो - द्विधा।
एतेषु कति युग्मानि सम्यक् ?

A.

केवलं एकं युग्मम्

B.

केवलं द्वे युग्मे

C.

सर्वाणि त्रीणि युग्मानि

D.

किञ्चन अपि युग्मं न समीचीनम्

Correct option is C


परिचय:
यह प्रश्न ध्वनि (व्यञ्जना व्यापार से प्राप्त अर्थ) के भेद-प्रभेदों से संबंधित है, जैसा कि आनन्दवर्धन ने ध्वन्यालोक में और बाद में मम्मट ने काव्यप्रकाश में वर्णित किया है। ध्वनि के मुख्यतः दो भेद हैं: अविवक्षितवाच्य ध्वनि (लक्षणा-मूला) और विवक्षितान्यपरवाच्य ध्वनि (अभिधा-मूला)।
व्याख्या:
सही उत्तर (c) सर्वाणि त्रीणि युग्मानि है, क्योंकि दिए गए तीनों कथन ध्वनि के लक्षण और उसके भेद के विषय में पूरी तरह से सही हैं।
· कथन 1: मुख्यार्थस्य स्वविशेषरूपार्थान्तरसंक्रमितत्वात् - अर्थान्तरसंक्रमितवाच्यत्वम्।
· यह कथन सही है।
· अर्थ: जहाँ मुख्य अर्थ (वाच्य) स्वयं को छोड़कर अपने ही विशेष रूप वाले अन्य अर्थ में संक्रमित हो जाता है, उसे अर्थान्तरसंक्रमितवाच्य ध्वनि कहते हैं।
· सन्दर्भ: यह अविवक्षितवाच्य ध्वनि का पहला भेद है।
· उदाहरण: 'देवदत्त! तुम गौः (गाय) हो।' यहाँ वाच्य अर्थ (गाय की जाति) विशेष रूप (मूर्खता) में संक्रमित होता है।
· कथन 2: मुख्यार्थस्यात्यन्ततिरस्कृतत्वात् - अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यत्वम्।
· यह कथन सही है।
· अर्थ: जहाँ मुख्य अर्थ (वाच्य) अत्यन्त तिरस्कृत (पूरी तरह से अनुपयोगी या बाधित) हो जाता है, उसे अत्यन्ततिरस्कृतवाच्य ध्वनि कहते हैं।
· सन्दर्भ: यह अविवक्षितवाच्य ध्वनि का दूसरा भेद है।
· उदाहरण: 'अयं पवित्रो देशः।' (यह अपवित्र देश है)। यहाँ 'पवित्र' का वाच्य अर्थ (शुद्धता) पूरी तरह तिरस्कृत होकर विपरीत व्यङ्ग्यार्थ (अपवित्रता) को व्यक्त करता है।
· कथन 3: वस्त्वलंकाररूपत्वाच्छब्दशक्त्युद्भवो - द्विधा।
· यह कथन सही है।
· अर्थ: शब्दशक्ति से उत्पन्न (शब्दशक्त्युद्भव) व्यङ्ग्य वस्तु और अलंकार के रूप में होने के कारण दो प्रकार का होता है।
· सन्दर्भ: यह विवक्षितान्यपरवाच्य ध्वनि के भेदों में आता है।
· भेद:
1. वस्तुध्वनि: जहाँ शब्दशक्ति से कोई वस्तु (भाव या विचार) व्यङ्ग्य होता है।
2. अलंकारध्वनि: जहाँ शब्दशक्ति से कोई अलंकार व्यङ्ग्य होता है।
रोचक तथ्य:
· अविवक्षितवाच्य ध्वनि को लक्षणा-मूला ध्वनि भी कहते हैं क्योंकि इसमें व्यञ्जना व्यापार लक्षणा पर निर्भर करता है।
· विवक्षितान्यपरवाच्य ध्वनि को अभिधा-मूला ध्वनि भी कहते हैं क्योंकि इसमें वाच्य अर्थ विवक्षित (इष्ट) होता है, पर वह अन्य (व्यङ्ग्य) अर्थ को अभिव्यक्त करके पर (चरितार्थ) होता है।

Free Tests

Free
Must Attempt

Unit & Measurement - 1

languageIcon English
  • pdpQsnIcon10 Questions
  • pdpsheetsIcon10 Marks
  • timerIcon5 Mins
languageIcon English
Free
Must Attempt

States of Matter

languageIcon English
  • pdpQsnIcon10 Questions
  • pdpsheetsIcon10 Marks
  • timerIcon5 Mins
languageIcon English
Free
Must Attempt

Classification of Plants

languageIcon English
  • pdpQsnIcon10 Questions
  • pdpsheetsIcon10 Marks
  • timerIcon5 Mins
languageIcon English

Similar Questions

test-prime-package

Access ‘Haryana Assistant Professor’ Mock Tests with

  • 60000+ Mocks and Previous Year Papers
  • Unlimited Re-Attempts
  • Personalised Report Card
  • 500% Refund on Final Selection
  • Largest Community
students-icon
354k+ students have already unlocked exclusive benefits with Test Prime!
Our Plans
Monthsup-arrow