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अधस्तनयुग्मानां समीचीनां तालिकां चिनुत- List-I List-II a. कुरंगक ! किमाद्यं तातस्य ? i. सुषेणस्य b. नास्तीदानीं यदि भवेत्कुमारं दृष
Question

अधस्तनयुग्मानां समीचीनां तालिकां चिनुत-

List-I
List-II
a. कुरंगक ! किमाद्यं तातस्य ?
i. सुषेणस्य
b. नास्तीदानीं यदि भवेत्कुमारं दृष्ट्वा
ii. राजा
с. प्रसार्य भुजौ 'एहयेहि' इत्याहवयन् शरीरार्धेन शयनादुद्ङ्गात्
iii. हर्षस्य
d. देव । तृतीयमह कृताहारस्यास्याद्य
iv. भण्डि

समुचितं विकल्पं चिनुत -

A.

a-iii, b-i, c-ii, d-iv

B.

a-iii, b-ii, c-i, d-iv

C.

a-ii, b-iii, c-i, d-iv

D.

a-i, b-ii, c-iii, d-iv

Correct option is A

परिचय: यह प्रश्न बाणभट्ट द्वारा रचित 'हर्षचरितम्' के अष्टम उच्छ्वास में वर्णित घटनाओं और पात्रों के संवादों से संबंधित है।
व्याख्या:
सही विकल्प (a) a-iii, b-i, c-ii, d-iv है।
यहाँ प्रत्येक युग्म की सही व्याख्या और उसका संदर्भ दिया गया है:

सूची-I (कथन)
सूची-II (वक्ता)
सन्दर्भ/स्पष्टीकरण
a. कुरंगक ! किमाद्यं तातस्य ?
iii. हर्षस्य
यह वाक्य हर्षवर्धन ने कुरंगक से पूछा था। इसका अर्थ है: "कुरंगक! आज पिताजी (प्रभाकरवर्धन) का क्या हाल है?" (हर्षचरित, 8वाँ उच्छ्वास)।
b. नास्तीदानीं यदि भवेत्कुमारं दृष्ट्वा
i. सुषेणस्य
यह वाक्य सुषेण (हर्ष के पिता के वैद्य) का है। जब प्रभाकरवर्धन की बीमारी चरम पर थी, तब सुषेण ने कहा: "अभी तो कोई आशा नहीं, यदि कुमार (हर्ष) को देखकर कुछ उत्साह मिले तो शायद..."।
c. प्रसार्य भुजौ 'एहयेहि' इत्याहवयन् शरीरार्धेन शयनादुद्ङ्गात्
ii. राजा
यह कथन राज्यवर्धन के संदर्भ में है। इसका अर्थ है: (राज्यवर्धन को देखकर) राजा (प्रभाकरवर्धन) ने अपनी भुजाएँ फैलाकर 'एहयेहि' (आओ, आओ) कहते हुए, आधे शरीर को बिस्तर से ऊपर उठा लिया।
d. देव । तृतीयमहः कृताहारस्यास्याद्य
iv. भण्डि
यह वाक्य भण्डि (हर्ष का सेनापति/मामा का पुत्र) ने हर्ष से कहा था। इसका अर्थ है: "देव (महाराज), आज इनको (राज्यश्री को) आहार किए हुए तीसरा दिन है।" यह राज्यश्री के विन्ध्याटवी में चले जाने के संदर्भ में है।

रोचक तथ्य:
· (a) यह कथन हर्ष की अपने पिता के स्वास्थ्य के प्रति चिन्ता को दर्शाता है।
· (b) सुषेण का यह निराशावादी कथन प्रभाकरवर्धन की गम्भीर अस्वस्थता को सूचित करता है।
· (c) यह प्रभाकरवर्धन का अपने ज्येष्ठ पुत्र राज्यवर्धन के प्रति स्नेह और आतुरता व्यक्त करता है।
· (d) भण्डि ने हर्ष को राज्यश्री की खोज में मिली सफलता और उसकी दयनीय स्थिति के बारे में बताया था।

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