Correct option is B
परिचय
साहित्यशास्त्र संस्कृत साहित्य के उन ग्रन्थों का समूह है, जिनमें काव्य, नाटक, अलंकार, रस आदि तत्त्वों का वैज्ञानिक रीति से विश्लेषण किया गया है।
व्याख्या
दिए गए तीन कथनों में से,
केवल दो कथन सही हैं: कथन 1 और कथन 2।
·
(b) केवलं द्वे
सम्यक् (केवल दो कथन सही हैं)।
सही कथनों का विवरण:
1.
रसस्य प्रमुख-भेदाः नाट्यशास्त्रे भरतमुनिना दत्ताः।
· यह कथन
सही है।
·
भरतमुनि को
रस सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने अपने ग्रंथ
'नाट्यशास्त्र' में सर्वप्रथम
'रस' की परिभाषा (विभावानुभाव...) और
आठ रसों (शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत) का विस्तृत विवेचन किया है।
2.
ध्वनिसिद्धान्तः आनन्दवर्धनेन प्रतिपादितः।
· यह कथन
सही है।
·
आनन्दवर्धन को
'ध्वनि सम्प्रदाय' का प्रवर्तक माना जाता है।
· उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ
'ध्वन्यालोक' में
ध्वनि (व्यंग्यार्थ) को काव्य की
आत्मा सिद्ध किया है:
"काव्यस्यात्मा ध्वनिः"।
रोचक तथ्य
3.
काव्यप्रकाशे 'रमणीयार्थप्रतिपादकः शब्दः काव्यम्' इति परिभाषा अस्ति। - यह कथन
गलत है।
· यह परिभाषा
पण्डितराज जगन्नाथ ने अपने ग्रंथ
'रसगंगाधर' में दी है।
·
काव्यप्रकाश (आचार्य
मम्मट) में काव्य की परिभाषा इस प्रकार दी गई है:
"तददोषौ सगुणावलङ्कृती पुनः क्वापि" (दोष रहित, गुण सहित और कहीं-कहीं अलंकार रहित भी शब्दार्थ को काव्य कहते हैं)।
·
पण्डितराज जगन्नाथ की परिभाषा है:
"रमणीयार्थप्रतिपादकः शब्दः काव्यम्" (रमणीय अर्थ का प्रतिपादन करने वाला शब्द काव्य है)।
· (a), (c), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।