Correct option is B
परिचय
यह प्रश्न भारतीय काव्यशास्त्र में वर्णित 'रस' (भावनात्मक अनुभूतियाँ) और उनसे संबंधित 'देवताओं' के उचित मिलान से संबंधित है।
व्याख्या
· शृङ्गारः(A) - विष्णु (II): श्रृंगार रस, जो प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक है, का संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है क्योंकि वे सृष्टि के पालक और सौंदर्य के अधिष्ठाता है।
· वीभत्सः (B) - महाकासः (III): वीभत्स रस, जो घृणा और जुगुप्ता का भाव उत्पन्न करता है, का संबंध महाकाल (शिव का रौद्र रूप) से है, क्योंकि वे विनाश और संहार के देवता हैं, जो वीभत्स दृश्यों से जुड़े हो सकते हैं।
· वीरः (C) - महेन्द्रः (I): वीर रस, जो शौर्य, पराक्रम और उत्याह का प्रतीक है, का संबंध इंद्र (महेन्द्र) से है, क्योंकि वे देवताओं के राजा और युद्ध के देवता हैं, जो वीरता का प्रदर्शन करते हैं।
· अदभुतः (D) - प्रक्षा (IV): अद्भुत रस, जो आश्चर्य और विख्मय का भाव जगाता है, का संबंध ब्रह्मा से है, क्योंकि वे सृष्टि के रचपिता हैं और उनकी रचनाएँ अद्भुत और विस्मयकारी होती हैं।
रोचक तथ्य
· भारतीय नाट्यशास्त्र में आठ मुख्य रस बताए गए हैं, जिनमें श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स और अद्भुत शामिल हैं। बाद में शांत रस को भी जोड़ा गया।
· प्रत्येक रस का अपना एक स्थायी भाव और एक विशिष्ट रंग होता है, जो उसकी प्रकृति को दर्शाता है।
· यह मिलान रस सिद्धांत के अनुसार विभिन्न देवताओं को उनके स्वभाव और कार्यों के आधार पर विशिष्ट रसों से जोड़ता है।