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    प्रथमसूच्या सह द्वितीयसूचीं सुमेलयत-                   
    Question

    प्रथमसूच्या सह द्वितीयसूचीं सुमेलयत-

     

                                     List I

                                     

                                     List II

    A.

    जेगीयते

    I.

    णिजन्तरूपम्

    B.

    निद्रापयति

    II.

    यङन्तरूपम्

    C.

    दिदृक्षते

    III.

    नामधातुरूपम्


    D.

    कलहायते


    IV.

    सन्नन्तरूपम्

    अधस्तनेषु समीचीनं विकल्पं चिनुत-


    A.

    A-IV,B-II,C-III,D-I


    B.

    A-II,B-I,C-IV,D-III

     

    C.

    A-II,B-IV,C-I,D-III


    D.

     A-III,B-II,C-IV,D-I

    Correct option is B

    परिचय

    यह प्रश्न संस्कृत व्याकरण से संबंधित है, जिसमें विभिन्न प्रकार के धातु रूपों (क्रियापदों) को उनके सही व्याकरणिक नाम से मिलाना है।

    व्याख्या




    • A. जेगीयते - II. यङन्तरूपम्

    • 'जेगीयते' 'गा' धातु से बना यङन्त रूप है, जो बार-बार गाने या अत्यधिक गाने के अर्थ में प्रयुक्त होता है। यङन्त प्रत्यय धातु से जुड़कर पुनरावृत्ति या तीव्रता का अर्थ व्यक्त करता 12

    • B. निद्रापयति - 1. णिजन्तरूपम्

    • 'निद्रापयति' 'निद्रा' (नींद) से बने णिजन्त धातु 'निद्रापि' का रूप है, जिसका अर्थ है 'सुलाना'। णिजन्त प्रत्यय (णि) प्रयोजक क्रियाओं को बनाने के लिए प्रयुक्त होता है, जहाँ कर्ता किसी और को क्रिया करने के लिए प्रेरित करता है।

    • C. दिदृक्षते - IV. सन्नन्तरूपम्

    • 'दिदृक्षते' 'दृश्' (देखना) धातु से बना सन्नन्त रूप है, जिसका अर्थ है 'देखने की इच्छा करना'। सन्नन्त प्रत्यय (सन्) धातु से जुड़कर इच्छावाचक क्रियाओं को बनाता है।

      • D. कलहायते - III. नामधातुरूपम्

      • 'कलहायते' 'कलह' (झगड़ा) नामक शब्द से बना नामधातु रूप है, जिसका अर्थ है 'झगड़ा करना'। नामधातु वे धातु होते हैं जो संज्ञा, विशेषण या अव्यय से बनते हैं, और 'क्यच्', 'क्यष्', 'काम्यच्' आदि प्रत्ययों के योग से क्रियापद के रूप में प्रयुक्त होते हैं।


      रोचक तथ्य


      • णिजन्तरूपम्ः ये रूप 'प्रेरणार्थक' क्रियाएँ होती हैं, जिनमें कर्ता स्वयं क्रिया न करके किसी और से करवाता है।


      • यङन्तरूपम्ः ये रूप 'तीव्रता' या 'पुनरावृत्ति' का भाव दशति हैं, जैसे 'बार-बार पढ़ना' या 'बहुत रोना'।


      • सन्नन्तरूपम्ः ये रूप 'इच्छा' का भाव व्यक्त करते हैं, जैसे 'खाने की इच्छा करना' या 'जीतने की इच्छा करना।

      • नामधातुरूपम्ः ये रूप मूलतः धातु नहीं होते, बल्कि संज्ञा, विशेषण आदि से क्रियापद के रूप में प्रयुक्त होते हैं। ये संस्कृत व्याकरण की एक अनूठी विशेषता है जो भाषा को अधिक लचीलापन प्रदान करती है।


      Answer: सही विकल्प है 2. A-II,B-I,C-IV,D-III



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