Correct option is C
परिचय
यह प्रश्न योगसूत्र के एक महत्वपूर्ण सूत्र से संबंधित है, जिसमें ईश्वर के स्वरूप का वर्णन किया गया है।
व्याख्या
सही विकल्प (c) है: अविद्यादयः क्लेशाः।
योगदर्शन के अनुसार, क्लेश पाँच प्रकार के होते हैं: अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश।
यह सूत्र बताता है कि ईश्वर वह पुरुषविशेष है जो इन पाँचों क्लेशों (अविद्या आदि), कर्मों (पुण्य-पाप), विपाक (कर्मों के फल) और आशय (संस्कार या वासना) से अप्रभावित रहता है।
रोचक तथ्य
(a) लौकिकाः क्लेशाः: यह सामान्य सांसारिक कष्टों को संदर्भित करता है, जो योगदर्शन में वर्णित क्लेशों का एक व्यापक वर्ग हो सकता है, लेकिन यह विशिष्ट दार्शनिक अर्थ नहीं है।
(b) पारलौकिकाः क्लेशाः यह परलोक से संबंधित कष्टों को दर्शाता है, जो लौकिक क्लेशों के समान ही व्यापक और कम विशिष्ट हैं।
(d) जय-पराजयादयः क्लेशाःः यह विजय और पराजय से उत्पन्न होने वाले सुख-दुख को संदर्भित करता है, जो राग और द्वेष जैसे क्लेशों के ही परिणाम हैं, न कि स्वयं मूल क्लेश।