hamburger menu
All Coursesall course arrow
adda247
reward-icon
adda247
    arrow
    arrow
    arrow
    - एतेषु कथनेषु विचार्यताम् 1. पञ्चीकरणप्रक्रिया अद्वैतवेदान्ते स्वीक्रियते। 2. पञ्चतन्मात्रमध्ये शब्दतन्मात्रम् अस्ति। 3. वेदान्तदर्शने परिणा
    Question

    - एतेषु कथनेषु विचार्यताम्
    1. पञ्चीकरणप्रक्रिया अद्वैतवेदान्ते स्वीक्रियते।
    2. पञ्चतन्मात्रमध्ये शब्दतन्मात्रम् अस्ति।
    3. वेदान्तदर्शने परिणामवादः स्वीक्रियते।
    एतेषु कति कथनानि सम्यक् ?

    A.

    केवलम् एकम्

    B.

    केवलं द्वे

    C.

    सर्वे त्रयः

    D.

    न कश्चित्

    Correct option is B


    परिचय पञ्चीकरण अद्वैत वेदान्त की एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सूक्ष्म भूतों (तन्मात्राओं) से स्थूल भूतों की उत्पत्ति होती है।
    व्याख्या
    दिए गए तीन कथनों में से, केवल दो कथन सही हैं: कथन 1 और कथन 2।
    · (b) केवलं द्वे सम्यक् (केवल दो कथन सही हैं)।
    सही कथनों का विवरण:
    1. पञ्चीकरणप्रक्रिया अद्वैतवेदान्ते स्वीक्रियते।
    · यह कथन सही है।
    · अद्वैत वेदान्त (विशेषतः शारीरक मीमांसा के अनुयायी) पञ्चीकरण प्रक्रिया को स्वीकार करते हैं।
    · इस प्रक्रिया के अनुसार, प्रत्येक स्थूल महाभूत (पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश) की उत्पत्ति पाँच सूक्ष्म महाभूतों के मिश्रण से होती है, जिसमें एक भूत का आधा भाग और अन्य चार भूतों का आठवाँ-आठवाँ भाग सम्मिलित होता है।
    2. पञ्चतन्मात्रमध्ये शब्दतन्मात्रम् अस्ति।
    · यह कथन सही है।
    · तन्मात्राएँ (सूक्ष्म भूत) पाँच होती हैं, जो क्रमशः आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी की सूक्ष्म अवस्थाएँ हैं।
    · ये तन्मात्राएँ हैं: शब्दतन्मात्रम्, स्पर्शतन्मात्रम्, रूपतन्मात्रम्, रसतन्मात्रम्, गन्धतन्मात्रम्
    · शब्दतन्मात्र इनमें से पहला है, जो आकाश का सूक्ष्म रूप है।
    रोचक तथ्य
    3. वेदान्तदर्शने परिणामवादः स्वीक्रियते। - यह कथन गलत है।
    · वेदान्त दर्शन (विशेषतः शंकराचार्य का अद्वैत वेदान्त) विवर्तवाद को स्वीकार करता है, परिणामवाद को नहीं।
    · विवर्तवाद : कारण का रूप बदले बिना केवल आभास के रूप में कार्य की उत्पत्ति (जैसे रस्सी में साँप का भ्रम)। अद्वैत वेदान्त के अनुसार, ब्रह्म का जगत् के रूप में दिखना विवर्त है।
    · परिणामवाद : कारण का वास्तव में परिवर्तित होकर कार्य का रूप लेना (जैसे दूध का दही में बदलना)। सांख्य दर्शन और रामानुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत वेदान्त परिणामवाद को स्वीकार करते हैं।
    · (a), (c), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।

    Free Tests

    Free
    Must Attempt

    General Studies Subject Test 01

    languageIcon English
    • pdpQsnIcon20 Questions
    • pdpsheetsIcon20 Marks
    • timerIcon15 Mins
    languageIcon English
    Free
    Must Attempt

    HSSC CET Group-C (Reasoning Ability) Practice set 01

    languageIcon English
    • pdpQsnIcon20 Questions
    • pdpsheetsIcon20 Marks
    • timerIcon20 Mins
    languageIcon English
    Free
    Must Attempt

    HSSC CET Group-C (English Language) Practice set 01

    languageIcon English
    • pdpQsnIcon20 Questions
    • pdpsheetsIcon20 Marks
    • timerIcon20 Mins
    languageIcon English
    test-prime-package

    Access ‘Haryana Assistant Professor’ Mock Tests with

    • 60000+ Mocks and Previous Year Papers
    • Unlimited Re-Attempts
    • Personalised Report Card
    • 500% Refund on Final Selection
    • Largest Community
    students-icon
    345k+ students have already unlocked exclusive benefits with Test Prime!
    Our Plans
    Monthsup-arrow