Correct option is D
पारेचय
ब्रह्मसूत्र वेदान्त दर्शन का एक मूलभूत ग्रंथ है जो उपनिषदों के गूढ़ अर्थों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करता है, जिनमें ब्रह्म के स्वरूप और मोक्ष के मार्ग का विवेचन है।
व्याख्या
ब्रहासूत्रों का सही कालक्रमानुसार विकल्प (d) है: B, A, D, C. यह क्रम ब्रह्मसूत्रों के प्रथम अध्याय के प्रथम पाद के प्रारंभिक चार सूत्रों का सही अनुक्रम है, जिन्हें 'चतुःसूत्री' कहा जाता है:
B. अथातो ब्रह्मजिज्ञासा: यह पहला सूत्र है जो ब्रहाजिज्ञासा (ब्रह्म को जानने की इच्छा) की आवश्यकता को प्रतिपादित करता है। यह बताता है कि धर्म आदि के ज्ञान के बाद अब ब्रह्म को जानने की इच्छा करनी चाहिए।
A. जन्माद्यस्य यतःः यह दूसरा सूत्र है जो ब्रह्म के स्वरूप का लक्षण बताता है कि ब्रह्म वह है जिससे इस संपूर्ण जगत की उत्पत्ति, स्थिति और लय होता है।
D. छास्त्रयोनित्त्वात्: यह तीसरा सूत्र है जो ब्रा के ज्ञान के साधन को बताता है कि ब्रह्म को जानने का एकमात्र प्रमाण वेद या शास्त्र हैं।
C. तत्तु समन्वयात्ः यह चौथा सूत्र है जो बताता है कि समस्त उपनिषद वाक्यों का तात्पर्य ब्रह्म में ही समन्वित होता है, अर्थात् वे सभी ब्रह्म का ही प्रतिपादन करते हैं।