Correct option is C
परिचय यह प्रश्न संस्कृत साहित्य के प्रमुख आचार्यों और उनके द्वारा रचित ग्रंथों के सही मिलान से संबंधित है, विशेष रूप से योग दर्शन से संबंधित ग्रंथों पर आधारित है।
व्याख्या
दिए गए विकल्पों में से, विकल्प (c) A-III, B-I, C-II, D-IV सही मिलान प्रस्तुत करता है।
A. बादरायणः - III. योगसूत्रभाष्यम्ः बादरायण को ब्रह्रासूत्र का रचयिता माना जाता है, लेकिन योगसूत्रभाष्य के संदर्भ में, यह प्रायः व्यास को संदर्भित करता है जो योगसूत्र पर भाष्य के रचयिता है। हालांकि, कुछ परंपराओं में बादरायण का संबंध भी इससे जोड़ा जाता है।
B. वाचस्पतिमिश्रः - 1. तत्त्ववैशारदी टीकाः वाचस्पतिमिश्र एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे जिन्होंने योगसूत्रभाष्य पर 'तत्त्ववैशारदी' नामक टीका लिखी थी, जो योग दर्शन के गहन सिद्धांतों को स्पष्ट करती है।
C. भोजः - II. राजमार्तण्डवृत्तिः- राजा भोज, जो एक महान विद्वान और संरक्षक थे, ने योगसूत्र पर 'राजमार्तण्डवृत्ति' नामक एक महत्वपूर्ण व्याख्या लिखी थी।
D. विज्ञानभिक्षुः - IV. योगवार्तिकम्ः- विज्ञानभिक्षु एक प्रमुख वेदांती और सांख्य-योग के विद्वान थे, जिन्होंने योगसूत्रभाष्य पर 'योगवार्तिकम्' नामक एक विस्तृत टीका लिखी थी।
रोचक तथ्य
विकल्प (a), (b), (d) में दिए गए अन्य मिलान गलत हैं क्योंकि वे आचार्यों और उनके ग्रंथों के सही युग्म को नहीं दशति हैं। उदाहरण के लिए, बादरायण का सीधा संबंध तत्त्ववैशारदी टीका से नहीं है, न ही भोज का संबंध योगवार्तिकम् से है।
योग दर्शन भारतीय दर्शन के छह आस्तिक दर्शनों में से एक है, जिसका मूल ग्रंथ पतंजलि का योगसूत्र है। इन आचार्यों की टीकाएँ और वृत्तियाँ योगसूत्र के सिद्धांतों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।