Correct option is A
Ans. (a):
कामता प्रसाद गुरु के अनुसार हिंदी भाषा की उत्पत्ति का सही अनुक्रम है:
- शौरसेनी
- नागर अपभ्रंश
- पश्चिमी हिंदी
- वर्तमान हिंदी
व्याख्या:
कामता प्रसाद गुरु ने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक विकास को निम्नलिखित क्रम में प्रस्तुत किया है:
शौरसेनी:
यह प्राकृत का एक रूप है, जो हिंदी भाषा की मूल आधारशिला मानी जाती है। शौरसेनी प्राचीन मध्यकालीन भाषाओं का स्रोत है।नागर अपभ्रंश:
यह शौरसेनी प्राकृत से विकसित हुआ और हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पश्चिमी हिंदी:
नागर अपभ्रंश से पश्चिमी हिंदी का विकास हुआ। यह आधुनिक हिंदी का प्राथमिक स्रोत है।वर्तमान हिंदी:
पश्चिमी हिंदी से विकसित होकर वर्तमान हिंदी का स्वरूप बना। यह आज के युग में मानक हिंदी का रूप है।:
Information Booster:
कामता प्रसाद गुरु का परिचय और योगदान
कामता प्रसाद गुरु हिंदी भाषा और व्याकरण के प्रतिष्ठित विद्वान, भाषाविद, और साहित्यकार थे। उन्होंने हिंदी भाषा की संरचना, विकास और व्याकरण पर गहन शोध किया और अपने कार्यों से हिंदी को एक वैज्ञानिक रूप दिया। उनकी रचनाएँ हिंदी भाषा के इतिहास और व्याकरण के अध्ययन के लिए अमूल्य मानी जाती हैं।
परिचय
- जन्म: 1875, उत्तर प्रदेश (मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी उल्लेख मिलता है)।
- मृत्यु: 1947।
- कामता प्रसाद गुरु ने हिंदी भाषा को सरल, सटीक और व्यवस्थित रूप देने का प्रयास किया।
- उनका सबसे प्रमुख योगदान हिंदी के व्याकरण और भाषा विकास पर आधारित है।
मुख्य योगदान
1. हिंदी व्याकरण (1917):
- यह उनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है।
- इसमें हिंदी भाषा की व्याकरणिक संरचना को वैज्ञानिक और तार्किक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- उन्होंने संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश के साथ हिंदी के विकास को स्पष्ट रूप से समझाया।
- हिंदी के व्याकरणिक सिद्धांतों को पहली बार व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया।
2. भाषा का विकास:
कामता प्रसाद गुरु ने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक विकास का विस्तृत अध्ययन किया। उनके अनुसार, हिंदी भाषा निम्नलिखित क्रम में विकसित हुई:
- प्राचीन संस्कृत
- लौकिक संस्कृत
- प्राकृत
- अपभ्रंश
- पश्चिमी हिंदी
- वर्तमान हिंदी
3. सरलता और वैज्ञानिकता:
- उन्होंने हिंदी व्याकरण को सरल और सुबोध बनाने पर बल दिया।
- उनके व्याकरण में भाषा के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, वाक्य रचना, और समास आदि का विस्तार से वर्णन है।
4. शब्द-निर्माण और तत्सम-तद्भव पर कार्य:
- उन्होंने हिंदी में तत्सम और तद्भव शब्दों के महत्व को रेखांकित किया।
- हिंदी भाषा में संस्कृत के प्रभाव को गहराई से समझाया।
5. भाषा शिक्षण:
- कामता प्रसाद गुरु ने हिंदी भाषा को शिक्षण के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किया।
- उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार और मानकीकरण में योगदान दिया।
हिंदी भाषा के विकास पर उनकी मान्यता
कामता प्रसाद गुरु के अनुसार, हिंदी भाषा का विकास निम्नलिखित चरणों में हुआ:
- संस्कृत: हिंदी भाषा का मूल स्रोत।
- प्राकृत: संस्कृत से विकसित भाषाएँ।
- अपभ्रंश: प्राकृत का परिष्कृत रूप।
- पश्चिमी हिंदी: नागर अपभ्रंश से विकसित।
- वर्तमान हिंदी: आधुनिक युग की मानक हिंदी।
उनकी रचनाएँ
- हिंदी व्याकरण (1917): हिंदी का पहला व्यवस्थित व्याकरण ग्रंथ।
- अन्य भाषाविदीय और साहित्यिक लेख।
महत्त्वपूर्ण बिंदु
- कामता प्रसाद गुरु को हिंदी व्याकरण का "शास्त्री" कहा जाता है।
- उन्होंने हिंदी भाषा की वैज्ञानिकता और व्याकरणिक संरचना को स्थापित किया।
- उनके कार्यों ने हिंदी भाषा को एक मानक रूप देने में मदद की।
निष्कर्ष
कामता प्रसाद गुरु का हिंदी भाषा के विकास और व्याकरण में योगदान अमूल्य है। उनकी रचनाएँ आज भी हिंदी भाषा और व्याकरण के अध्ययन के लिए आधारभूत मानी जाती हैं। उनके कार्यों ने हिंदी भाषा को एक मजबूत शैक्षिक और सांस्कृतिक आधार प्रदान किया।
