Correct option is A
उत्तर:(a) आदिमरात्रि की महक
स्पष्टीकरण:
'ठुमरी' फणीश्वरनाथ रेणु का एक प्रसिद्ध कहानी संग्रह है, जिसमें 'पंचलाइट', 'तीसरी कसम' (जिसे 'मारे गए गुलफाम' के नाम से भी जाना जाता है) और 'रसप्रिया' जैसी कहानियाँ शामिल हैं। 'आदिमरात्रि की महक' एक अलग कहानी संग्रह है, जिसमें इसी नाम की कहानी संकलित है। इसलिए, 'आदिमरात्रि की महक' कहानी 'ठुमरी' संग्रह में नहीं है।
णीश्वरनाथ रेणु हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकारों में से एक हैं, जिन्होंने ग्रामीण भारत के जीवन को अपनी कहानियों में सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी चार प्रमुख कहानियाँ—'आदिम रात्रि की महक', 'पंचलाइट', 'तीसरी कसम', और 'रसप्रिया'—भारतीय ग्रामीण समाज की विविधता और गहन मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती हैं।
Information Booster:
1. आदिम रात्रि की महक:यह कहानी एक रेलवे कर्मचारी के नौजवान सहायक की ज़िन्दगी को केंद्र में रखती है। रेणु ने इसमें ग्रामीण जीवन की सादगी और उसमें निहित जटिलताओं को उकेरा है। कहानी में पात्रों के माध्यम से मानवीय भावनाओं, संघर्षों, और सामाजिक ताने-बाने का चित्रण किया गया है। यह कहानी उनके संग्रह 'आदिम रात्रि की महक' में संकलित है।
2. पंचलाइट:'पंचलाइट' कहानी महतो टोली के ग्रामीणों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने पहली बार अपने गाँव में पेट्रोमेक्स (पंचलाइट) लाया है। गाँव के लोग इस नई वस्तु के उपयोग से अनभिज्ञ हैं और इसे जलाने में असमर्थ रहते हैं। कहानी में ग्रामीण समाज की सरलता, आपसी संबंधों, और नई तकनीक के प्रति उनकी जिज्ञासा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह कहानी रेणु के संग्रह 'ठुमरी' में शामिल है।
3. तीसरी कसम:मूलतः 'मारे गए गुलफाम' नाम से प्रसिद्ध यह कहानी गाड़ीवान हीरामन और नौटंकी गायिका हीराबाई की कथा है। हीरामन अपने बैलगाड़ी में हीराबाई को मेले तक ले जाता है, और इस यात्रा के दौरान उनके बीच एक अनकहा प्रेम पनपता है। कहानी ग्रामीण समाज की नैतिकता, प्रेम की पवित्रता, और सामाजिक बंधनों को बखूबी दर्शाती है। इस पर आधारित फिल्म 'तीसरी कसम' भी बनी, जिसने इसे और प्रसिद्धि दिलाई। यह कहानी भी 'ठुमरी' संग्रह में संकलित है।
4. रसप्रिया:यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो संगीत के प्रति अत्यधिक समर्पित है और अपने जीवन में संगीत को सर्वोपरि मानता है। कहानी में संगीत के माध्यम से मानवीय भावनाओं, प्रेम, और सामाजिक संबंधों की गहनता को उजागर किया गया है। 'रसप्रिया' भी 'ठुमरी' संग्रह का हिस्सा है।
रेणु की ये कहानियाँ ग्रामीण भारत की सजीव तस्वीर प्रस्तुत करती हैं, जहाँ सरलता, प्रेम, संघर्ष, और सामाजिक ताने-बाने की जटिलताएँ एक साथ बुनी हुई हैं। उनकी लेखनी में आंचलिक भाषा, लोकगीत, और स्थानीय संस्कृति का समावेश उनकी कहानियों को और भी प्रभावशाली बनाता है।
Additional knowledge:
उपन्यास:
मैला आँचल (1954): यह उपन्यास बिहार के ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत करता है, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण किया गया है।
परती परिकथा (1966): इस उपन्यास में रेणु ने ग्रामीण भारत की समस्याओं, विशेषकर भूमि और कृषि से संबंधित मुद्दों को उठाया है।
जुलूस (1968): यह उपन्यास सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों के बीच आम जनता के संघर्षों को दर्शाता है।
दीर्घतपा (1964): इस कृति में मानवीय संबंधों और उनकी जटिलताओं का सूक्ष्म चित्रण किया गया है।
कितने चौराहे (1966): यह उपन्यास समाज में व्याप्त विभिन्न विचारधाराओं और उनके टकराव को प्रस्तुत करता है।
पलटू बाबू रोड (1971): इस उपन्यास में शहरी जीवन की समस्याओं और मानवीय संवेदनाओं का चित्रण है।
कहानी संग्रह:
अग्निखोर (1973): इस संग्रह में समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती कहानियाँ शामिल हैं।
अच्छे आदमी (1982): यह संग्रह मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित कहानियों का संग्रह है।
