Correct option is C
परिचय
अभिहितान्वयवाद मीमांसा दर्शन से संबंधित एक सिद्धांत है जो यह बताता है कि शब्दों का अर्थ पहले व्यक्तिगत रूप से समझा जाता है (अभिहित), और फिर इन व्यक्तिगत अर्थों को जोड़कर वाक्य का अर्थ (अन्वय) समझा जाता है।
व्याख्या
· अभिहितान्वयवाद के प्रमुख समर्थक प्रभाकर भट्ट (प्रभाकर मीमांसा के प्रवर्तक) और शालिकनाथ मिश्र हैं।
· प्रभाकर मीमांसा में, शब्दों को पहले अपने अर्थों को व्यक्त करने वाला माना जाता है, और फिर उन अर्थों का आपस में संबंध स्थापित होता है, जिससे वाक्य का अर्थ स्पष्ट होता है।
· शालिकनाथ मिश्र, प्रभाकर के शिष्य थे और उन्होंने भी अभिहितान्वयवाद का समर्थन किया और इसके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया।
रोचक तथ्य
· कुमारिलभट्टः- कुमारिलभट्टः भाट्ट मीमांसा के प्रमुख आचार्य हैं और वे अभिहिता-वयवाद के विरोधी तथा अन्विताभिधानवाद के समर्थक हैं। उनके अनुसार, शब्द अपने अर्थों को तभी व्यक्त करते हैं जब वे किसी वाक्य में अन्वित (जुड़े हुए) होते हैं।
· पार्थसारथिमित्रः पार्थसारथिमिश्र भी भाट्ट मीमांसा के अनुयायी हैं और वे भी अन्विताभिधानवाद का समर्थन करते हैं ।