Correct option is B
परीक्षा गुरु लाला श्रीनिवास दास द्वारा रचित हिंदी का प्रथम उपन्यास माना जाता है, जो 1882 में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भारत के आर्थिक शोषण और लूट का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया गया है। कहानी के माध्यम से लेखक ने दिखाया है कि कैसे अंग्रेजों की नीतियों ने भारतीय समाज, विशेषकर मध्यम वर्ग, पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। उपन्यास का नायक मदनमोहन अंग्रेजी सभ्यता और संस्कृति से प्रभावित होकर अपने पारंपरिक मूल्यों से दूर होता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट आती है। यह उपन्यास प्रतीकात्मक रूप से ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत के आर्थिक शोषण और लूट का चित्रण करता है।
Information booster:
- परीक्षा गुरु हिंदी का प्रथम उपन्यास माना जाता है।
- लेखक लाला श्रीनिवास दास ने इसमें अंग्रेजी शासन के आर्थिक शोषण को उजागर किया है।
- उपन्यास में पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण के दुष्परिणाम दिखाए गए हैं।
- मदनमोहन का चरित्र तत्कालीन भारतीय समाज के मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
- उपन्यास में नैतिक शिक्षा और स्वदेशी मूल्यों की पुनर्स्थापना पर जोर दिया गया है।
Additional Knowledge:
(a) वामा शिक्षक (1872) : ईश्वरी प्रसाद एवं कल्याण राय द्वारा रचित इस उपन्यास मे ढाई गाँव के जमींदार लाल भगवानदास के परिवार की कथा प्रस्तुत की गई है । उपन्यास का पात्र मथुरादास बाल विवाह का विरोधी है ।
(b) परीक्षा गुरु(1882) : यह हिंदी का प्रथम उपन्यास है, जिसमें दिल्ली के रईस लाल मदनमोहन एवं उनके विवेकशील एवं चरित्रवान मित्र ब्रिजकिशोर की कथा है ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भारतीय समाज के आर्थिक और सांस्कृतिक शोषण का चित्रण किया गया है।
(c) नूतन ब्रह्मचारी: बालकृष्ण भट्ट द्वारा रचित यह उपन्यास धार्मिक और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित है, जिसमें ब्रह्मचर्य और नैतिकता पर विशेष ध्यान दिया गया है।विनायक राव केन्द्रीय पात्र है ।
(d) श्यामा स्वप्न: इसके रचीयता जगमोहन सिंह है , जिसमें 'श्यामा' नामक स्त्री के प्रति प्रेम को केंद्र में रखकर कहानी विकसित की गई है। इसे आख्यायिका शैली का प्रथम उपन्यास माना जाता है ।
