arrow
arrow
arrow
तो पर वारौं उरबसी, सुनि, राधिके सुजान।तू मोहन कैं उर बसी ह्वै उरबसी-समान।।इस दोहे में सखी राधा से क्या कह रही है?
Question

तो पर वारौं उरबसी, सुनि, राधिके सुजान।

तू मोहन कैं उर बसी ह्वै उरबसी-समान।।
इस दोहे में सखी राधा से क्या कह रही है?

A.

राधा के रूप की तारीफ कर नायक से प्रेम करने के लिए उत्कंठित करती है।

B.

नायक की बेवफाई के कारण उससे दूर रहने की सलाह देती है।

C.

(c) नायक की धृष्टता के कारण मान करने को कहती है।

D.

(d) राधा के रूप की तारीफ करके उसका मान छुड़ाती है।

Correct option is D

उत्तर: (d) राधा के रूप की तारीफ करके उसका मान छुड़ाती है।

स्पष्टीकरण:

इस दोहे में सखी राधा से कहती है कि वह उसके सौंदर्य पर उर्वशी जैसी अप्सरा को भी न्यौछावर कर सकती है, क्योंकि राधा श्रीकृष्ण के हृदय में उसी प्रकार बसी हुई है जैसे उर्वशी नामक आभूषण हृदय में सुशोभित होता है। इस प्रकार, सखी राधा के रूप की प्रशंसा करके उसका मान (अभिमान) छुड़ाने का प्रयास कर रही है।

Information Booster:

बिहारी सतसई महाकवि बिहारीलाल की प्रसिद्ध रचना है, जिसमें 713 दोहे संकलित हैं। यह काव्य संग्रह हिंदी साहित्य के रीतिकाल की उत्कृष्ट कृतियों में से एक माना जाता है। बिहारीलाल ने अपने दोहों में संक्षिप्तता, गहन अर्थ, और अलंकारिक सौंदर्य का समावेश किया है, जो पाठकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

बिहारी सतसई की विशेषताएँ:

  1. संक्षिप्तता में गहनता: बिहारी के दोहे छोटे होते हुए भी गहन अर्थ और भाव प्रकट करते हैं।

  2. अलंकारों का प्रयोग: उन्होंने श्लेष, अनुप्रास, रूपक आदि अलंकारों का कुशलता से प्रयोग किया है।

  3. प्रेम और भक्ति का समावेश: राधा-कृष्ण के प्रेम, भक्ति, नीति, और जीवन के विभिन्न पहलुओं का सुंदर चित्रण किया गया है।

बिहारी के पाँच प्रसिद्ध दोहे एवं उनका अर्थ:

  1. दृग उरझत, टूटत कुटुम, जुरत चतुर-चित्त प्रीति।
    परति गाँठि दुरजन हिये, दई नई यह रीति।।

    अर्थ: प्रेम की यह नई रीति है कि आँखें उलझती हैं, परिवार टूटता है, चतुर लोगों के हृदय जुड़ते हैं, लेकिन दुष्टों के हृदय में गाँठ पड़ जाती है।

  2. सतसइया के दोहरा, ज्यों नावक के तीर।
    देखन में छोटे लगैं, घाव करैं गम्भीर।।

    अर्थ: बिहारी के दोहे छोटे होते हैं, लेकिन उनके अर्थ गहरे और प्रभावशाली होते हैं, जैसे तीर छोटा होता है लेकिन घाव गहरा करता है।

  3. नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास यहि काल।
    अली कली में ही बिन्ध्यो, आगे कौन हवाल।।

    अर्थ: जब फूल में पराग, मधुर मकरंद और पूर्ण विकास नहीं हुआ है, तब ही भौंरा कली में बिंध गया है; आगे क्या होगा?

  4. कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
    इहिं खाए बौराय नर, वह पाए बौराय।।

    अर्थ: धतूरे में सोने से भी सौ गुना अधिक मादकता होती है; इसे खाने से और सोने को पाने से मनुष्य पागल हो जाता है।

  5. या अनुरागी चित्त की, गति समझै नहिं कोय।
    ज्यों-ज्यों बूड़े स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जल होय।।

    अर्थ: प्रेमी के चित्त की गति को कोई नहीं समझ सकता; जैसे-जैसे वह श्याम (कृष्ण) के रंग में डूबता है, वैसे-वैसे वह उज्ज्वल (निर्मल) होता जाता है

    Additional Knowledge:

    बिहारीलाल हिंदी साहित्य के रीतिकाल के प्रमुख कवि थे, जिनका जन्म 1603 ईस्वी में मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के बसुआ (गोविंदपुर) गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित केशव राय चौबे था। बचपन में ही वे अपने पिता के साथ ओरछा चले गए, जहाँ उन्होंने हिंदी, संस्कृत, और प्राकृत भाषाओं का अध्ययन किया। बाद में, आगरा में उन्होंने उर्दू और फारसी भाषाओं का भी ज्ञान प्राप्त किया।

    बिहारीलाल का विवाह मथुरा के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जिसके बाद वे ससुराल में ही रहने लगे। कुछ समय बाद, वे जयपुर के महाराजा जयसिंह के दरबार में राजकवि के रूप में नियुक्त हुए। कहा जाता है कि महाराजा जयसिंह अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ समय बिताने में इतने व्यस्त थे कि राजकाज की उपेक्षा कर रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए, बिहारीलाल ने एक दोहा भेजा:

    नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास यहि काल।
    अली कली ही सौं बिंध्यो, आगे कौन हवाल।।

    इस दोहे का प्रभाव इतना गहरा हुआ कि महाराजा ने तुरंत राजकाज में ध्यान देना शुरू किया।

    बिहारीलाल की एकमात्र प्रसिद्ध रचना 'बिहारी सतसई' है, जिसमें 719 दोहे संकलित हैं। इन दोहों में श्रृंगार, नीति, और भक्ति के सुंदर चित्रण मिलते हैं। उनकी रचनाएँ 'गागर में सागर' भरने की कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जहाँ छोटे-छोटे दोहों में गहन अर्थ समाहित हैं।

    अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद, बिहारीलाल वृंदावन चले गए, जहाँ 1663 ईस्वी में उनका निधन हुआ। हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमूल्य है, और वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।


Free Tests

Free
Must Attempt

Basics of Education: Pedagogy, Andragogy, and Hutagogy

languageIcon English
  • pdpQsnIcon10 Questions
  • pdpsheetsIcon20 Marks
  • timerIcon12 Mins
languageIcon English
Free
Must Attempt

UGC NET Paper 1 Mock Test 1

languageIcon English
  • pdpQsnIcon50 Questions
  • pdpsheetsIcon100 Marks
  • timerIcon60 Mins
languageIcon English
Free
Must Attempt

Basics of Education: Pedagogy, Andragogy, and Hutagogy

languageIcon English
  • pdpQsnIcon10 Questions
  • pdpsheetsIcon20 Marks
  • timerIcon12 Mins
languageIcon English

Similar Questions

test-prime-package

Access ‘UGC NET Hindi’ Mock Tests with

  • 60000+ Mocks and Previous Year Papers
  • Unlimited Re-Attempts
  • Personalised Report Card
  • 500% Refund on Final Selection
  • Largest Community
students-icon
354k+ students have already unlocked exclusive benefits with Test Prime!
Our Plans
Monthsup-arrow