Correct option is C
उत्तर: (c) : ईश्वरदास निर्गुण भक्तिकाव्य के कवि नहीं हैं।
स्पष्टीकरण:
निर्गुण भक्ति काव्यधारा के अंतर्गत वे कवि आते हैं जिन्होंने निर्गुण ब्रह्म अर्थात निराकार ईश्वर की उपासना की। इसमें मुख्य रूप से ज्ञानमार्गी और प्रेममार्गी संप्रदाय शामिल होते हैं।
- मलूक दास, बाबा लाल दास और सुन्दरदास निर्गुण भक्तिकाव्य के कवि माने जाते हैं। उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना के माध्यम से ईश्वर के निराकार रूप का वर्णन किया।
- ईश्वरदास सगुण भक्ति धारा के कवि हैं। उन्होंने सगुण भक्ति पर आधारित कविताएँ लिखी हैं, जिनमें ईश्वर के साकार रूप की उपासना की गई है।
निर्गुण भक्ति के प्रमुख कवि:
- कबीरदास: निर्गुण भक्ति के मुख्य प्रवर्तक, जिन्होंने समाज में फैले आडंबर और कुरीतियों का विरोध किया।
- दादूदयाल: दादू पंथ के संस्थापक, जिन्होंने मानवतावादी दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया।
- मलूक दास: उन्होंने वैराग्य और आत्मज्ञान की व्याख्या की।
- सुन्दरदास: ज्ञानमार्गी संत, जिन्होंने अद्वैतवाद को प्रमुखता दी।
- बाबा लालदास: निर्गुण भक्ति के संत, जिन्होंने सरल भाषा में आध्यात्मिक विचार व्यक्त किए।
सगुण भक्ति के प्रमुख कवि:
- तुलसीदास: रामचरितमानस के रचयिता, जो राम के सगुण रूप के उपासक थे।
- सूरदास: कृष्ण भक्ति के महान कवि, जिन्होंने सगुण रूप में कृष्ण के बाल लीला और माधुर्य भाव को प्रस्तुत किया।
- ईश्वरदास: सगुण भक्ति के कवि, जिनकी कविताएँ साकार ईश्वर की उपासना पर आधारित हैं।
Information Booster:
मलूकदास, बाबा लालदास, सुन्दरदास, और ईश्वरदास हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण संत कवि हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं का विवरण निम्नलिखित है:
मलूकदास
- **प्रमुख रचनाएँ:**
- रत्नखान: इस ग्रंथ में मलूकदास जी ने अपने उपदेशों और भक्ति भावनाओं को संकलित किया है।
- ज्ञानबोध: यह रचना आत्मज्ञान और वैराग्य पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान का विस्तार किया है।
मलूकदास जी की भाषा में हिंदी, फारसी और अरबी शब्दों का समावेश है, जो उनके समय की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।
उनकी रचनाएँ सरल और प्रभावशाली हैं, जो आत्मबोध, वैराग्य, और प्रेम जैसे विषयों पर केंद्रित हैं।
बाबा लालदास
बाबा लालदास जी के जीवन और रचनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
उनकी रचनाओं की जानकारी के लिए और शोध की आवश्यकता है।
सुन्दरदास
- **प्रमुख रचनाएँ:**
- ज्ञान समुद्र: इस ग्रंथ में सुन्दरदास जी ने ज्ञान, भक्ति, और वैराग्य के विषयों पर विस्तार से चर्चा की है।
- साहित्य सिद्धांत: यह रचना काव्यशास्त्र और साहित्यिक सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें उन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओं का विश्लेषण किया है।
सुन्दरदास जी दादू पंथ के प्रमुख संत कवि थे, जिन्होंने अपने काव्य में सरल भाषा का प्रयोग करते हुए आध्यात्मिक विषयों को प्रस्तुत किया।
ईश्वरदास
- **प्रमुख रचनाएँ:**
- सत्यवती कथा: यह रचना अवधी भाषा में लिखी गई है, जो दिल्ली के सुल्तान सिकंदर शाह लोदी (संवत 1546-1574) के समय की मानी जाती है।
- इस ग्रंथ में सत्यवती की कथा का वर्णन है, जो धार्मिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित है।
ईश्वरदास जी की यह रचना अवधी साहित्य की प्राचीनतम कृतियों में से एक मानी जाती है।
