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CBSE Class 10 Term 1 Social Science (SST) Important MCQ Questions with Answers

CBSE Class 10 Term 1 Social Science (SST) Important MCQ Questions with Answers: The CBSE Class 10 Social Science Term 1 Paper is slated for November 30, 2021, and will consist only of various sorts of MCQs. Students must understand the fundamental ideas in order to perform well on these questions. Here are some of the crucial MCQs for Class 10 Social Science that you should practise before the exam to ensure that you know all of the significant events and information, as well as to help students make the most of their time and study efficiently for their Social Science exam. Important MCQs are offered chapter-by-chapter for the History, Geography, Political Science, and Economics components of the Class 10 Social Science, all of which have MCQs and answers.

Read: Check CBSE Term 1 Class 10 SST Question Paper &  Answey keys

 

CBSE  Term 1 Class 10th Social Science Important MCQs: History

Which of the following sentences best describes the Utopian Society?

An idealist society that can never be achieved
A society where everyone is equal
A society with a comprehensive constitution
A democratic society
Ans- An idealist society that can never be achieved.

Which of the following characteristics best represents the image of ‘Germania’?

Austerity and Asceticism
Revenge and Vengeance
Folk and Cultural Tradition
Heroism and Justice
Ans- Heroism and Justice.

Who founded the ‘Young Italy’ secret society?

Johann Gottfried Herder
Otto Von Bismarck
Metternich
Mazzini
Ans- Mazzini

Why did Gandhiji call the Non-Cooperation Movement to a halt?

Increasing pressure of the British government
Round Table conferences
Gandhiji’s arrest
The Chauri Chaura Incident
Ans- The Chauri Chaura Incident.

Why was a Satyagraha held in Champaran in 1916?

To oppose the plantation system
To oppose the British Laws
To oppose high land revenue
To protest against the oppression of mill workers
Ans- To oppose the Plantation System.

During World War II, which of the following powers was collectively known as the Axis?

Austria, Germany, Italy
Japan, Germany, Turkey
Germany, Italy, Japan
France, Japan, Italy
Ans- Germany, Italy, Japan.

Select European Managing Agency from the options below.

Andrew Yule
Birla Industries
Elgin Mill
Tata Iron and Steel Company
Ans- Andrew Yule.

What was the location of the first Indian Jute Mill?

Bengal
Madras
Bihar
Bombay
Ans- Bengal.

From when did Marcopolo acquire the knowledge of woodblock printing and return it to Italy?

India
Sri Lanka
Japan
China
Ans- China.

Martin Luther’s works and ideas inspired which of the following movements?

Reformation Movement
Renaissance movement
Counter-Reformation Movement
Intellectual Movement
Ans- The Reformation Movement.

CBSE SST Revision Study Notes for Class 10 Social Science History Chapters

 The Age of Industrialisation

  1. Patterns of urbanization
  2. Migration and the growth of towns.
  3. Social change and urban life.
  4. Merchants, middle classes, workers and urban poor.

 औद्योगीकरण का युग

इस अध्याय की मुख्य बातें :-

 

पूर्व औद्योगीकरण

 

औद्योगीकरण की गति

 

श्रमिकों का जीवन

 

भारत में कपड़ा उद्योग

 

औद्योगीकरण की अनूठी बात

 

औद्योगीकरण का युग :-

 

जिस युग में हस्तनिर्मित वस्तुएं बनाना कम हुई और फैक्ट्री , मशीन एवं तकनीक का विकास हुआ उसे औद्योगीकरण का युग कहते हैं ।

 

इसमें खेतिहर समाज औद्योगिक समाज में बदल गई ।

 

1760 से 1840 तक के युग को औद्योगीकरण युग कहा जाता है जो मनुष्य के लिए खेल परिवर्तन नियम जैसा हुआ

 

पूर्व औद्योगीकरण :-

 

यूरोप में औद्योगीकरण के पहले के काल को पूर्व औद्योगीकरण का काल कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो यूरोप में सबसे पहले कारखाने लगने के पहले के काल को पूर्व औद्योगीकरण का काल कहते हैं। इस अवधि में गाँवों में सामान बनते थे जिसे शहर के व्यापारी खरीदते थे।

 

औद्योगिक क्रांति से पहले :-

 

औद्योगिक क्रांति मध्य 18 वीं शताब्दी में प्रारंभ हुआ था । परंतु इससे पहले भी इंग्लैंड और यूरोप में अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन होने लगा था ।

 

परंतु इसे फैक्ट्रियों में नहीं बनाया जाता था बल्कि हाथों से बनाया जाता था और व्यापारियों द्वारा बेचा जाता । यानी तभी यह सब व्यापारियों के नियंत्रण में था ।

 

औद्योगीकरण के इसी चरण को इतिहासकार आदि औद्योगीकरण कहते हैं । यहां आदि का अर्थ किसी भी वस्तु की पहली या प्रारंभिक अवस्था का संकेत ।

 

17 वीं और 18 वीं सदी में क्या हुआ :-

 

आबादी 

भूमंडलीकरण

  मांग 

 

अब शाहरी इलाके के जो व्यापारी , जनसंख्या के मांग के अनुसार उत्पादन को नहीं बढ़ा पा रहे थे । जिसकी वजह से वे ग्रामीण इलाकों में जाना प्रारंभ कर दिया वहां पर उन्होंने किसानों को रोजगार दिया और उत्पादन में वृद्धि कि ।

 

अब सवाल आता है कि किसानों ने नया रोजगार स्वीकार क्यों किया गांव के गरीब काश्तकार और दस्तकार सौदागरों के लिए काम करने लगे क्योंकि अब खुले खेत जा रहे थे और कॉमनस की बाड़ाबंदी की जा थी । छोटे किसान की जमीन खत्म हो रहे थी इसलिए गरीब किसान आमदनी के नए स्रोत ढूंढ रहे थे ।

 

व्यापारियों का गाँवों पर ध्यान देने का कारण :-

 

शहरों में ट्रेड और क्राफ्ट गिल्ड बहुत शक्तिशाली होते थे। इस प्रकार के संगठन प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर अपना नियंत्रण रखते थे। वे नये लोगों को बाजार में काम शुरु करने से भी रोकते थे। इसलिये किसी भी व्यापारी के लिये शहर में नया व्यवसाय शुरु करना मुश्किल होता था। इसलिये वे गाँवों की ओर मुँह करना पसंद करते थे।

 

ब्रिटेन में पूर्व औद्योगीकरण के लक्षण :-

 

शहर के व्यापारी गाँवों के किसानों को पैसे देते थे। वे किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार के लिये उत्पाद बनाने के लिये प्रोत्साहित करते थे।

 

गाँवों में जमीन कम पड़ने लगी थी। जनसंख्या बढ़ रही थी जिसकी जरूरत जमीन के छोटे टुकड़ों से पूरी नहीं होती थी। इसलिये किसानों को आय के अतिरिक्त साधनों की तलाश थी।

 

पूर्व औद्योगीकरण के समय विनिमयों का एक जाल फैला हुआ था जिसे व्यापारी लोग नियंत्रित करते थे। सामान का उत्पादन वैसे किसान करते थे जो कारखानों में काम करने की बजाय अपने खेतों में काम करते थे। अंतिम उत्पाद कई हाथों से होता हुआ लंदन के बाजारों तक पहुँचता था। फिर इन उत्पादों को लंदन से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता था।

 

कारखानों की शुरुआत :-

 

सबसे पहले इंगलैंड में कारखाने 1730 के दशक में बनना शुरु हुए। अठारहवीं सदी के आखिर तक पूरे इंगलैड में जगह जगह कारखाने दिखने लगे। 1760 में ब्रिटेन में 2.5 मिलियन पाउंड का कपास आयातित होता था। 1787 तक यह मात्रा बढ़कर 22 मिलियन पाउंड हो गई थी।

 

कारखानों से लाभ :-

 

कारखानों के खुलने से कई फायदे हुए। श्रमिकों की कार्यकुशलता बढ़ गई। अब नई मशीनों की सहायता से प्रति श्रमिक आधिक मात्रा में और बेहतर उत्पाद बनने लगे। औद्योगीकरण की शुरुआत मुख्य रूप से सूती कपड़ा उद्योग में हुई। कारखानों में श्रमिकों की निगरानी और उनसे काम लेना अधिक आसान हो गया।

 

औद्योगिक परिवर्तन की रफ्तार :-

 

ब्रिटेन में सूती कपड़ा और धातु उद्योग सबसे गतिशील उद्योग थे। औद्योगीकरण के पहले दौर में (1840 के दशक तक) सूती कपड़ा उद्योग अग्रणी क्षेत्रक था। रेलवे के प्रसार के बाद लोहा इस्पात उद्योग में तेजी से वृद्धि हुई। रेल का प्रसार इंगलैंड में 1840 के दशक में हुआ और उपनिवेशों में यह 1860 के दशक में हुआ। 1873 आते आते ब्रिटेन से लोहा और इस्पात के निर्यात की कीमत 77 मिलियन पाउंड हो गई। यह सूती कपड़े के निर्यात का दोगुना था।

 

लेकिन औद्योगीकरण का रोजगार पर खास असर नहीं पड़ा था। उन्नीसवीं सदी के अंत तक पूरे कामगारों का 20% से भी कम तकनीकी रूप से उन्नत औद्योगिक क्षेत्रक में नियोजित था। इससे यह पता चलता है कि नये उद्योग पारंपरिक उद्योगों को विस्थापित नहीं कर पाये थे।

 

सूती कपड़ा और धातु उद्योग पारंपरिक उद्योगों में बदलाव नहीं ला पाये। लेकिन पारंपरिक उद्योगों में भी कई परिवर्तन हुए। ये परिवर्तन बड़े ही साधारण से दिखने वाले लेकिन नई खोजों के कारण हुए। इस तरह के उद्योगों के उदाहरण हैं; खाद्य संसाधन, भवन निर्माण, बर्तन निर्माण, काँच, चमड़ा उद्योग, फर्नीचर, आदि।

 

जैसा कि आज भी हम देखते हैं; नई तकनीकों को पैर जमाने में काफी वक्त लगा। मशीनें महंगी होती थीं और उनके मरम्मत में भी काफी खर्च लगता था। इसलिये व्यापारी और उद्योगपति नई मशीनों से दूर ही रहना पसंद करते थे। आविष्कारकों या निर्माताओं के दावों के विपरीत नई मशीनें बहुत कुशल भी नहीं थीं।

 

इतिहासकार इस बात को मानते हैं कि उन्नीसवीं सदी के मध्य का एक आम श्रमिक कोई मशीन चलाने वाला नहीं बल्कि एक पारंपरिक कारीगर या श्रमिक होता था।

 

मानव शक्ति और भाप की शक्ति :-

 

उस जमाने में श्रमिकों की कोई कमी नहीं होती थी। इसलिये श्रमिकों की किल्लत या अधिक पारिश्रमिक की कोई समस्या नहीं थी। इसलिये महंगी मशीनों में पूँजी लगाने की अपेक्षा श्रमिकों से काम लेना ही बेहतर समझा जाता था।

 

मशीन से बनी चीजें एक ही जैसी होती थीं। वे हाथ से बनी चीजों की गुणवत्ता और सुंदरता का मुकाबला नहीं कर सकती थीं। उच्च वर्ग के लोग हाथ से बनी हुई चीजों को अधिक पसंद करते थे।

 

लेकिन उन्नीसवीं सदी के अमेरिका में स्थिति कुछ अलग थी। वहाँ पर श्रमिकों की कमी होने के कारण मशीनीकरण ही एकमात्र रास्ता बचा था।

 

श्रमिकों का जीवन :-

 

काम की तलाश में भारी संख्या में लोग गाँवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे थे। नौकरी मिलना इस बात पर निर्भर नहीं करता था कि किसी को क्या काम आता है। यह इस बात पर निर्भर करता था कि किसी के कितने अधिक दोस्त या रिश्तेदार पहले से ही वहाँ काम पर लगे हैं। जान पहचान के बगैर नौकरी मिलना बहुत मुश्किल होता था। किसी किसी को महीनों तक नौकरी पाने का इंतजार करना होता था। ऐसे लोग बेघर होते थे जिन्हें पुलों या रैन बसेरों में अपनी रातें बितानी पड़ती थी। कई निजी लोगों ने भी रैन बसेरे बनवाये थे। गरीबों के लिए बनी पूअर लॉ अथॉरिटी ऐसे लोगों के लिए कैजुअल वार्ड की व्यवस्था करती थी।

 

कई नौकरियाँ साल के कुछ गिने चुने महीनों में ही मिलती थीं। जैसे ही वे व्यस्त महीने समाप्त हो जाते थे तो बेचारे गरीब फिर से सड़क पर आ जाते थे। उनमें से कुछ तो अपने गाँव लौट जाते थे लेकिन ज्यादातर शहर में ही रुक जाते थे ताकि छोटे मोटे काम पा सकें।

 

स्पिनिंग जेनी मशीन का विरोध :-

 

उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में पारिश्रमिक में थोड़ा सा इजाफा हुआ था। लेकिन विभिन्न क्षेत्रकों के आँकड़े प्राप्त करना मुश्किल है क्योंकि उनमें हर साल काफी उतार चढ़ाव होता था। किसी भी श्रमिक के जीवन स्तर पर नियोजन की अवधि का पूरा असर पड़ता था। यदि किसी को साल के बारहों महीने काम मिल जाता था तो उसका जीवन सुखी रहता था। यदि किसी को साल के दो चार महीने ही काम मिलता था उसकी समस्याएँ जैसी की तैसी रहती थीं। उन्नीसवीं सदी के मध्य तक अच्छे दौर में भी शहरों की आबादी का लगभग 10% अत्यधिक गरीब हुआ करता था। आर्थिक मंदी के दौर में बेरोजगारी बढ़कर 35 से 75% के बीच हो जाती थी।

 

कई बार बेरोजगारी के डर से श्रमिक लोग नई तकनीक का जमकर विरोध करते थे। उदाहरण के लिए जब स्पिनिंग जेनी को लाया गया तो महिलाओं ने इन नई मशीनों को तोड़ना शुरु किया। उन महिलाओं को अपना रोजगार छिन जाने का डर था।

 

1840 के दशक के बाद शहरों में भवन निर्माण में तेजी आई। इससे रोजगार के नये अवसर पैदा हुए। 1840 में यातायात के क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या दोगुनी हो गई जो आने वाले तीस वर्षों में फिर से दोगुनी हो गई।

 

उपनिवेशो में औद्योगीकरण :-

 

आइए अब भारत पर नजर डाले और देखे की उपनिवेश में औद्योगीकरण कैसे होता है

 

भारत का कपड़ा उद्योग का युग :-

 

अठारहवीं सदी के मध्य तक ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में अपना बिजनेस जमा लिया था। इस अवधि में व्यापार के पुराने केंद्रों (जैसे सूरत और हुगली) का पतन हो चुका था, और व्यापार के नये केंद्रों (जैसे कलकत्ता और बम्बई) का उदय हुआ।

 

जब एक बार ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अपनी राजनैतिक प्रभुता स्थापित कर ली तो इसने व्यापार पर अपने एकाधिकार को जताना शुरु कर दिया।

 

कम्पनी ने कपड़ा व्यवसाय से जुड़े हुए पारंपरिक व्यापारियों और दलालों को उखाड़ना शुरु किया। उसके बाद कम्पनी ने बुनकरों पर सीधा नियंत्रण बनाने की कोशिश की। इस काम के लिए लोगों को वेतन पर रखा गया। ऐसे लोगों को गुमाश्ता कहा जाता था। गुमाश्ता का काम था बुनकरों के काम की निगरानी करना, आने वाले माल का संग्रहण करना और कपड़े की क्वालिटी की जाँच करना।

 

कम्पनी यह कोशिश भी करती थी कि बुनकर किसी दूसरे ग्राहक के साथ डील न कर लें। इस काम को पुख्ता करने के लिये एडवांस के सिस्टम का सहारा लिया जाता था। इस सिस्टम के तहत बुनकरों को कच्चे माल खरीदने के लिए कर्ज दिया जाता था। जब कोई बुनकर कर्ज ले लेता था तो इस बात के लिये बाध्य हो जाता था कि किसी अन्य व्यापारी को अपना माल न बेचे।

 

एडवांस के इस नये सिस्टम ने बुनकरों के लिए कई समस्याएँ खड़ी कर दी। पहले वे खाली समय में थोड़ी बहुत खेती कर लेते थे ताकि परिवार का पेट भरने के लिये काम भर का अनाज उगा सकें। अब उनके पास खाली समय नहीं बचता था। उन्हें अपनी जमीन काश्तकारों को देनी पड़ती थी।

 

पारंपरिक व्यापारियों के विपरीत गोमाश्ता बाहरी आदमी होता था। उसका गाँव में कोई नातेदार रिश्तेदार नहीं होता था। वह सिपाहियों और चपरासियों के साथ आता था। समय पर काम न पूरा होने की स्थिति में बुनकरों को दंड भी देता था। गोमाश्ता अक्सर हेकड़ी दिखाया करता था। कई बार गोमाश्ता और बुनकरों के बीच लड़ाई भी हो जाती थी।

 

एडवांस के सिस्टम के कारण आये बदलाव :-

 

एडवांस के सिस्टम के कारण कई बुनकर कर्ज के जाल में फँस गये। कर्णाटक और बंगाल के कई स्थानों पर तो बुनकर अपने गाँव छोड़कर दूसरे गाँवों में चले गये ताकि अपना करघा लगा सकें। कई बुनकरों ने एडवांस लेने से मना कर दिया, अपनी दुकान बंद कर दी और खेती करने लगे।

 

मैनचेस्टर का भारत में प्रकोप :-

 

उन्नीसवीं सदी की शुरुआत से ही भारत से कपड़ों के निर्यात में कमी आने लगी। 1811 – 12 में भारत से होने वाले निर्यात में सूती कपड़े की हिस्सेदारी 33% थी जो 1850 – 51 आते आते मात्र 3% रह गई।

 

ब्रिटेन के निर्माताओं के दबाव के कारण सरकार ने ब्रिटेन में इंपोर्ट ड्यूटी लगा दी ताकि इंगलैंड में सिर्फ वहाँ बनने वाली वस्तुएँ ही बिकें। ईस्ट इंडिया कम्पनी पर भी इस बात के लिए दबाव डाला गया कि वह ब्रिटेन में बनी चीजों को भारत के बाजारों में बेचे। अठारहवीं सदी के अंत तक भारत में सूती कपड़ों का आयात न के बराबर था। लेकिन 1850 आते-आते कुल आयात में 31% हिस्सा सूती कपड़े का था। 1870 के दशक तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 70% हो गई।

 

भारत में हाथ से बने सूती कपड़ों की तुलना में मैनचेस्टर की मशीन से बने हुए कपड़े अधिक सस्ते थे। इसलिये बुनकरों का मार्केट शेअर गिर गया। 1850 का दशक आते आते भारत के सूती कपड़े के अधिकांश केंद्रों में भारी गिरावट आ गई।

 

1860 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में गृह युद्ध शुरु हो चुका था। इसलिए वहाँ से ब्रिटेन को मिलने वाले कपास की सप्लाई बंद हो चुकी थी। इसके परिणामस्वरूप ब्रिटेन को भारत की ओर मुँह करना पड़ा। अब भारत से कपास ब्रिटेन को निर्यात होने लगा। इससे भारत के बुनकरों के लिए कच्चे कपास की भारी कमी हो गई।

 

उन्नीसवीं सदी के अंत तक भारत में भी सूती कपड़े के कारखाने खुलने लगे। भारत के पारंपरिक सूती कपड़ा उद्योग के लिए यह किसी आखिरी आघात से कम न था।

 

भारत में कारखानों की शुरुआत :-

 

बम्बई में पहला सूती कपड़ा मिल 1854 में बना और उसमें उत्पादन दो वर्षों के बाद शुरु हो गया। 1862 तक चार मिल चालू हो गये थे। उसी दौरान बंगाल में जूट मिल भी खुल गये। कानपुर में 1860 के दशक में एल्गिन मिल की शुरुआत हुई। अहमदाबाद में भी इसी अवधि में पहला सूती मिल चालू हुआ। मद्रास के पहले सूती मिल में 1874 में उत्पादन शुरु हो चुका था।

 

शुरु के व्यवसायी :-

 

भारत के कई बिजनेस ग्रुप के इतिहास में चीन के साथ होने वाला व्यापार छुपा हुआ है। अठारहवीं सदी के आखिर से ब्रिटिश भारत ने अफीम का निर्यात चीन को करना शुरु किया और वहाँ से चाय का आयात करना शुरु किया। इस काम में कई भारतीय व्यापारियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। वे पूँजी लगाते थे, माल मंगवाते थे और फिर माल को भेजते थे। जब उन व्यापारियों ने अच्छी पूँजी जमा कर ली तो वे भारत में औद्योगिक उपक्रम बनाने के सपने भी देखने लगे।

 

ऐसे लोगों में द्वारकानाथ टैगोर एक अग्रणी व्यक्ति थे जिन्होंने 1830 और 1840 के दशक में उद्योग लगाने शुरु किये। टैगोर का उद्योग 1840 के व्यापार संकट के दौर में तबाह हो गया। लेकिन उन्नीसवीं सदी के आखिरी दौर में कई व्यापारी सफल उद्योगपति हो गये। बम्बई में दिनशॉ पेटिट और जमशेदजी नसेरवनजी टाटा जैसे पारसी लोगों ने बड़े बड़े उद्योग स्थापित किये। कलकत्ता में पहला जूट मिल 1917 में एक मारवाड़ी उद्यमी सेठ हुकुमचंद द्वारा खोला गया था। इसी तरह से चीन से सफल व्यापार करने वालों ने बिड़ला ग्रुप को बनाया था।

 

बर्मा, खाड़ी देशों और अफ्रिका के व्यापार नेटवर्क के रास्ते भी पूँजी जमा की गई थी।

 

भारत के व्यवसाय पर अंग्रेजों का ऐसा शिकंजा था कि उसमें भारतीय व्यापारियों को बढ़ने के लिए अवसर ही नहीं थे। पहले विश्व युद्ध तक भारतीय उद्योग के के अधिकतम हिस्से पर यूरोप की एजेंसियों की पकड़ हुआ करती थी।

 

मजदूर कहाँ से आते थे?

 

ज्यादातर औद्योगिक क्षेत्रों में आस पास के जिलों से मजदूर आते थे। इनमें से अधिकांश मजदूर आस पास के गाँवों से पलायन करके आये थे। फसल की कटाई और त्योहारों के समय वे अपने गाँव भी जाते थे ताकि अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। ऐसा आज भी देखने को मिलता है। दिल्ली और पंजाब में काम करने वाले मजदूर छुट्टियों में बिहार और उत्तर प्रदेश वापस जाते हैं।

 

कुछ समय बीतने के बाद, लोग काम की तलाश में अधिक दूरी तक भी जाने लगे। उदाहरण के लिए यूनाइटेड प्रोविंस के लोग भी बम्बई और कलकत्ता की तरफ पलायन करने लगे।

 

लेकिन काम मिलना आसान नहीं होता था। उद्योगपति अक्सर लोगों को काम पर रखने के लिए जॉबर की मदद लेते थे जो किसी प्लेसमेंट कंसल्टेंट की तरह काम करता था। अक्सर कोई पुराना और भरोसेमंद मजदूर जॉबर बन जाता था। जॉबर अक्सर अपने गाँव के लोगों को प्रश्रय देता था। वह उन्हें शहर में बसने में मदद करता था और जरूरत के समय कर्ज भी देता था। इस तरह से जॉबर एक प्रभावशाली व्यक्ति बन गया था। वह लोगों से बदले में पैसे और उपहार माँगता था और मजदूरों के जीवन में भी दखल देता था।

 

औद्योगिक विकास का अनूठापन :-

 

यूरोप की मैनेजिंग एजेंसी कुछ खास तरह के उत्पादों में ही रुचि दिखाती थी। वे अपना ध्यान चाय और कॉफी के बागानों, खनन, नील और जूट पर लगाती थीं। ऐसे उत्पाद की जरूरत मुख्य रूप से निर्यात के लिए होती थी और उन्हें भारत में बेचा नहीं जाता था।

 

भारत के व्यवसायी यहाँ के बाजार में मैनचेस्टर के सामानों से प्रतिस्पर्धा से बचना चाहते थे। उदाहरण के लिए वे सूत के मोटे कपड़े बनाते थे जिनका इस्तेमाल या तो हथकरघा वाले करते थे या जिनका निर्यात चीन को होता था।

 

बीसवीं सदी के पहले दशक तक औद्योगीकरण के ढ़र्रे पर कई बदलावों का प्रभाव पड़ चुका था। यह वह समय था जब स्वदेशी आंदोलन जोर पकड़ रहा था। औद्योगिक समूहों ने संगठित होना शुरु कर दिया था ताकि सरकार से अपने सामूहिक हितों की बात कर सकें। उन्होंने सरकार पर आयात शुल्क बढ़ाने और अन्य रियायतें देने के लिए दबाव डाला। यह वह समय था जब भारत से चीन को होने वाला भारतीय धागे का निर्यात घट रहा था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि चीनी और जापानी मिलों के उत्पाद ने चीन के बाजार को भर दिया था। भारतीय उत्पादकों ने सूती धागे को छोड़कर वस्त्र बनाने पर अधिक जोर दिया। 1900 और 1912 के बीच भारत में सूती कपड़े का उत्पादन दोगुना हो गया।

 

पहले विश्व युद्ध तक उद्योग के विकास की दर धीमी थी। युद्ध ने स्थिति बदल दी। ब्रिटेन की मिलें सेना की जरूरतें पूरा करने में व्यस्त हो गईं। इससे भारत में आयात घट गया। भारत की मिलों के सामने एक बड़ा घरेलू बाजार तैयार था। भारत की मिलों को ब्रिटेन की सेना के लिए सामान बनाने के लिए भी कहा गया। इस तरह से घरेलू और विदेशी बाजारों में माँग बढ़ गई। इससे उद्योग धंधे में तेजी आ गई।

 

युद्ध खत्म होने के बाद भी मैनचेस्टर यहाँ के बाजार में अपनी खोई हुई पकड़ दोबारा नहीं बना पाया। अब ब्रिटेन के उद्योग संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी और जापान से टक्कर लेने की स्थिति में नहीं थे।

 

लघु उद्योगों का वर्चस्व :-

 

उद्योग में वृद्धि के बावजूद अर्थव्यवस्था में बड़े उद्योगों का शेअर बहुत कम था। लगभग 67% बड़े उद्योग बंगाल और बम्बई में थे। देश के बाकी हिस्सों में लघु उद्योग का बोलबाला था। कामगारों का एक बहुत छोटा हिस्सा ही रजिस्टर्ड कम्पनियों में काम करता था। 1911 में यह शेअर 5% था और 1931 में 10%.

 

बीसवीं सदी में हाथ से होने वाले उत्पाद में इजाफा हुआ। हथकरघा उद्योग में लोगों ने नई टेक्नॉलोजी को अपनाया। बुनकरों ने अपने करघों में फ्लाई शटल का इस्तेमाल शुरु किया। 1941 आते आते भारत के 35% से अधिक हथकरघों में फ्लाई शटल लग चुका था। त्रावणकोर, मद्रास, मैसूर, कोचिन और बंगाल जैसे मुख्य क्षेत्रों में तो 70 से 80% हथकरघों में फ्लाई शटल लगे हुए थे। इसके अलावा और भी कई नये सुधार हुए जिससे हथकरघा के क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ गई थी।

 

बाजार में होड़ :-

 

ग्राहकों को रिझाने के लिए उत्पादक कई तरीके अपनाते थे। ग्राहक को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन एक जाना माना तरीका है।

 

मैनचेस्टर के उत्पादक अपने लेबल पर उत्पादन का स्थान जरूर दिखाते थे। ‘मेड इन मैनचेस्टर’ का लबेल क्वालिटी का प्रतीक माना जाता था। इन लेबल पर सुंदर चित्र भी होते थे। इन चित्रों में अक्सर भारतीय देवी देवताओं की तस्वीर होती थी। स्थानीय लोगों से तारतम्य बनाने का यह एक अच्छा तरीका था।

 

उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध तक उत्पादकों ने अपने उत्पादों को मशहूर बनाने के लिए कैलेंडर बाँटने भी शुरु कर दिये थे। किसी अखबार या पत्रिका की तुलना में एक कैलेंडर की शेल्फ लाइफ लंबी होती है। यह पूरे साल तक ब्रांड रिमाइंडर का काम करता था।

 

भारत के उत्पादक अपने विज्ञापनों में अक्सर राष्ट्रवादी संदेशों को प्रमुखता देते थे ताकि अपने ग्राहकों से सीधे तौर पर जुड़ सकें।

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CBSE Term 1 Class 10th Social Science Important MCQs: Geography

Iron ore is a kind of which of the following resources?
Renewable
Biotic
Flow
Non-renewable
Ans: Non-renewable

Which of the following is the primary cause of Punjabi land degradation?
Intensive cultivation
Deforestation
Over irrigation
Overgrazing
Ans: Over irrigation

Terrace cultivation is practised in ______
Punjab
Plains of Uttar Pradesh
Haryana
Uttarakhand
Ans: Uttarakhand

What are the resources that have been surveyed and their quality and quantity decided for use?
Potential Resources
Individual Resources
Developed Resources
Stock
Ans: Developed Resources

What is the ancient Alluvial Soil’s alternative name?
Bangar
Khadar
Kanker
Arid
Ans: Bangar

Which of the following assertions is not a genuine basis for flora and fauna extinction?
Agricultural expansion.
Large scale developmental projects.
Grazing and fuelwood collection.
Rapid industrialisation and urbanisation.
Ans: Grazing and fuelwood collection

Which form of transportation is most effective at reducing trans-shipment losses and delays?
Railways
Roadways
Pipeline
Waterways
Ans: Pipeline

Species in danger of extinction are known as:
Rare Species
Extinct species
Endangered Species
Vulnerable Species
Ans: Endangered Species

What are the names of the forests and wastelands owned by both the government and private persons and communities?
Reserved Forests
Protected Forests
Unclassed Forests
Private Forests
Ans: Unclassed Forests

The east-west route connects which two of the following extreme locations?
Mumbai and Kolkata
Mumbai and Nagpur
Silcher and Porbandar
Nagpur and Siligudi
Ans: Silcher and Porbandar

Which of the following minerals is generated when rocks decompose and a residual bulk of weathered material remains?
coal
bauxite
gold
zinc
Ans: bauxite

The sand of Monazite contains which of the following minerals?
oil
thorium
coal
uranium
Ans: thorium

Which of the following rocks has minerals deposited and collected in its strata?
metamorphic rocks
sedimentary rocks
igneous rocks
none of the above
Ans: sedimentary rocks

Which of the following minerals is the most abundant in Koderma, Jharkhand?
iron ore
copper
mica
bauxite
Ans: mica

Which of the following minerals is generated when rocks decompose and a residual bulk of weathered material remains?
coal
gold
zinc
bauxite
Ans: bauxite

Which of the following industries produces telephones, computers, and other electronic devices?
Aluminium
Information Technology
Electronic
Steel
Ans: Electronic

Which of the following means of transportation is the most essential in India?
Roadways
Airways
Railways
Pipeline
Ans: Railways

Which of the following words is used to describe two or more countries’ trade?
Internal trade
External trade
Local trade
International trade
Ans: International trade

Black soil is found in?
Rajasthan
Jharkhand
Jammu and Kashmir
Gujarat
Ans: Gujarat

One of the deepest land-locked and well-protected ports along with the east coast among the following is:
Chennai
Paradwip
Vishakhapatnam
Tuticorin
Ans: Vishakhapatnam

One of the following is announced by the government in support of a crop:
Minimum support price
Moderate support price
Influential support price
Maximum support price
Ans: Minimum support price

Rabi Crops are harvested in what months?
January to March
October to December
April to June
July to September
Ans: April to June

Tidal energy is?
Human-made
Abiotic
Non-recyclable
Replenishable
Ans: Replenishable

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CBSE Term 1 Class 10th Social Science SST Important MCQs: Political Science

An example of horizontal sharing of power is:
Power-sharing between different levels of the government
Power Sharing between different states
Power-sharing between different organs of the government
Power-sharing between different political parties
Ans- Power Sharing between different organs of the government.

Which of the following subjects is not there in the state’s list?
Agriculture
Education
National Defence
Law and Order
Ans- National Defence.

How many of the political parties are registered with the Election Commission of India:
750 parties
Less than 750 parties
More than 750 parties
705 parties
Ans- More than 750 parties.

An important feature of the Federal system:
The national government gives some power to the provincial government
Power is distributed among the legislature, executive and judiciary
Elected officials exercise supreme power in the government
Government power is divided between different levels of government
Ans- Government power is divided between different levels of government.

This country is a ‘coming together federation’:
India
Belgium
USA
Spain
Ans- USA.

Which among these countries has the highest participation of women in public life?
Sweden and India
Nepal and Finland
Sweden and Africa
Norway and Sri Lanka
Ans- Sweden and Africa.

Indian constitution does not _____
Give official status of one religion
Prohibits discrimination on the grounds of religion
Gives all individuals freedom to profess any religion
Ensure equality of citizens within religious minorities
Ans- Gives official status to one religion.

Gender division refers to:
The unequal role assigned by society to men and women
Absence of voting rights for women in democracies
Biological difference between men and women
Unequal child sex ratio
Ans- The Unequal role assigned by society to men and women.

Power Sharing stresses more on which of the following of the prudential reasons:
Reducing the possibility of conflict between various social groups
Bringing stability in the political order
A fair chance to minority
All of the Above
Ans- All of the Above.

How did Belgium solve its problem?
Rejecting majoritarianism
Respecting the interests of different communities
The power-sharing mechanism
All of the Above
Ans- All of the Above.

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CBSE Term 1 Class 10th Social Science SST Important MCQs: Economics

What is the other name of the term ‘Per Capita Income’?
Average Income
Income Distribution Parameter
Marginal Income
Ans: Average Income

The reason of Underemployment is:
People are working less than what they are capable of doing
People are not paid for their work
People do not want to work
People are working in a lazy manner
Ans: People are working less than what they are capable of doing

The full form of NREGA is:
National Rozgaar Employment Guarantee Act
National Rural Employment Government Act
National Rural Education Guarantee Act
National Rural Employment Guarantee Act
Ans: National Rural Employment Guarantee Act

The odd one from the following is:
Postman
cobbler
soldier
police constable
Ans: cobbler

Dependence on the informal sector can be reduced by:
if banks and cooperatives increase their lending, especially in the rural areas
formal sector loans expand, and everyone receives loans with less interest rates
interest rates are decreased on credit
All the above
Ans: All the above

Who takes most of the decisions regarding savings and loan activities, in an SHG?
Members
Non-government organisation
Bank
Ans: Members.

The liberalisation of foreign trade and investments in India is supported by:
International Labour Organisation (ILO)
World Trade Organisation (WTO)
International Monetary Fund (IMF)
World Bank
Ans: World Trade Organisation (WTO)

What connected the countries in earlier times?
Labour
Technology
Trade
Religion
Ans: Trade

What actually is the term that means rapid integration or interconnection between countries?
Privatisation
Socialisation
Globalisation
Liberalisation
Ans: Globalisation

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