Online Tution   »   Previous Year Paper   »   CBSE Class 10 Hindi Previous Year...

CBSE Class 10 Hindi Previous Year Question Papers With Solutions

Practice CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers with solutions given on this page and boost your preparation for CBSE Class 10th Term 2 Exam 2022. With the help of CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers, the students can get an idea about the marking scheme and types of Hindi questions asked in the board examination.

Class 10th Hindi Previous Year Question Paper

Solve all the CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers given on this page and assess your preparation for the term 2 examinations. Bookmark this page to get all the latest updates from the Central Board of Secondary Education.

CBSE Class 10 Hindi Previous Year Question Papers With Solutions_40.1
Also Check:

CBSE Class 10 Social Science SST Previous Year Papers CBSE Class 10 Science Previous Year Papers
CBSE Class 10 English Previous Year Question Papers CBSE Class 10 Maths Previous Year Question Papers
CBSE Class 10 Hindi Previous Year Question Papers CBSE Class 10 Computer Previous Year Question Papers

CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers

We have given CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers with solutions on this page. With solutions given on this page, students will know the art of answer writing. The students can frame their answers in the same way given on this page to get extra marks in their final examination. Practice all the CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers given on this page and pass your Class 10th Term 2 Exam 2022 with flying colours.

Class 10th Hindi A Previous Year Question Paper – 2020

खण्ड ‘क’

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन का निर्देशानुसार उत्तर लिखिए : [1 × 3 = 3]
(क) मुझे अपनी पत्नी और पुत्र की मृत्यु के साथ ही फ़ादर के शब्दों से झरती शांति भी याद आ रही है। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)

ख) रात हुई और आकाश में तारों के असंख्य दीप जल उठे। (सरल वाक्य में बदलिए)
(ग) माँ ने कहा कि शाम को जल्दी घर आ जाना। (रेखांकित उपवाक्य का भेद लिखिए)
(घ) पान वाले के लिए यह मजेदार बात थी लेकिन हालदार साहब के लिए चकित कर देने वाली। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
उत्तर:
(क) मुझे अपनी पत्नी और पुत्र की मृत्यु याद आ रही है। और साथ ही फादर के शब्दों से झरती शांति भी याद आ रही है।
(ख) रात होने पर आकाश में तारों के असंख्य दीप जल उठे।
(ग) माँ ने शाम को जल्दी घर आने के लिए कहा।
(घ) पान वाले के लिए जो बात मजेदार थी वह हालदार साहब के लिए चकित कर देने वाली थी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से किन्ही चार वाक्यों का निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिए :    [1 x 4 = 4]
(क) हालदार साहब ने पान खाया। (कर्मवाच्य में बदलिए)
(ख) दादा जी प्रतिदिन पार्क में टहलते हैं। (भाववाच्य में बदलिए)
(ग) गाँधी जी द्वारा विश्व को सत्य और अहिंसा का संदेश दिया गया। (कर्तृवाच्य में बदलिए)
(घ) पान कहीं आगे खा लेंगे। (कर्मवाच्य में बदलिए)
(ङ) खिलाड़ी दौड़ नहीं सका। (भाववाच्य में बदलिए)
उत्तर:
(क) हालदार साहब के द्वारा पान खाया गया।
(ख) दादा जी से प्रतिदिन पार्क में टहला जाता है।
(ग) गांधी जी ने विश्व को सत्य और अहिंसा का सन्देश दिया।
(घ) पान कहीं आगे से खा लेंगे।
(ङ) खिलाड़ी से दौड़ा नहीं गया।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं चार रेखांकित पदों का पद-परिचय लिखिए : [1 × 4 = 4]
(क) सुरभि विद्यालय से अभी-अभी आई है।
(ख) उसने मेरी बातें ध्यानपूर्वक सुनी।
(ग) शाबाश! तुमने बहुत अच्छा काम किया।
(घ) वहाँ दस छात्र बैठे हैं।
(ङ) परिश्रम के बिना सफलता नहीं मिलती।
उत्तर:
(क) संज्ञा, जातिवाचक, एकवचन, पुल्लिंग, अपादान कारक।
(ख) रीतिवाचक, क्रियाविशेषण, अव्यय।
(ग) सर्वनाम, मध्यमपुरुष वाचक, एकवचन।
(घ) विशेषण, निश्चित संख्यावाचक।
(ङ) सम्बन्धबोधक अव्यय|

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिएः [1 × 4 = 4]
(क) ‘भयानक रस’ का एक उदाहरण लिखिए।
(ख) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में रस पहचान कर लिखिएः
तनकर भाला यूँ बोल उठा
राणा ! मुझको विश्राम न दे।
मुझको वैरी से हृदय-क्षोभ
तू तनिक मुझे आराम न दे।
(ग) “जुगुप्सा’ किस रस का स्थायी भाव है?
(घ) ‘शांत’ रस का स्थायी भाव क्या है?
(ङ) किस रस को ‘रसराज’ भी कहा जाता है?
उत्तर:
(क) एक और अजगरहि लर्वी एक और मृगराय। विकल बटोही बीच ही परयो मूर्छा खाए।
(ख) वीर रस।
(ग) वीभत्स रस।
(घ) निर्वेद
(ङ) श्रृंगार।

खण्ड ‘ख’

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
दार्शनिक अरस्तू ने कहा है-“प्रत्येक व्यक्ति को उचित समय पर, उचित व्यक्ति से, उचित मात्रा में, उचित उद्देश्य के लिए, उचित ढंग से व्यवहार करना चाहिए।” वास्तव में प्रत्येक प्राणी का संबंध एक-एक क्षण से रहता है, किन्तु व्यक्ति उसका महत्त्व नहीं समझता। अधिकतर व्यक्ति सोचते हैं कि कोई अच्छा समय आएगा तो काम करेंगे। इस, दुविधा और उधेड़बुन में वे जीवन के अनेक अमूल्य क्षणों को खो देते हैं। किसी व्यक्ति को बिना हाथ-पाँव हिलाए संसार की बहुत बड़ी सम्पत्ति छप्पर फाड़कर कभी नहीं मिलती। समय उन्हीं के रथ के घोड़ों को हाँकता है, जो भाग्य के भरोसे बैठना पौरुष का अपमान समझते हैं। जो व्यक्ति श्रम और समय का पारखी होता है, लक्ष्मी भी उसी का वरण करती है। समय की कीमत न पहचानने वाले समय बीत जाने पर सिर धुनते रह जाते हैं। समय निरंतर गतिमान है। इसलिए हमें समय का मूल्य समझना चाहिए। साथ ही समयानुसार काम भी करना चाहिए। सफल जीवन की यही कुंजी है।

क) जीवन के अमूल्य क्षणों को किस प्रकार के व्यक्ति खो देते हैं? [2]

(ख) भाग्य के भरोसे बैठना पौरुष का अपमान क्यों कहा गया है? [2]

(ग) दार्शनिक अरस्तू के कथन का आशय लिखिए। [2]

(घ) लक्ष्मी किसे प्राप्त होती है? [1]

(ङ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक लिखिए। [1]

उत्तर:
(क) जो व्यक्ति यह सोचते हैं कि जब अच्छा समय आएगा तब काम करेंगे, ऐसे अकर्मण्य आलसी लोग जीवन के अमूल्य क्षणों को खो देते हैं।
(ख) भाग्य के भरोसे बैठना पुरुष का अपमान इसलिए है कि बिना हाथ पाँव हिलाये दुनिया में कुछ भी प्राप्त करना असंभव है

(ग) दार्शनिक अरस्तू ने कहा है-हर एक व्यक्ति के लिए उचित समय पर उचित मात्रा का ज्ञान होना आवश्यक है। तभी हम उचित व्यक्ति से उचित समय पर उचित व्यवहार कर सकते हैं।
(घ) जो व्यक्ति श्रम और समय का पारखी होता है उसी को लक्ष्मी प्राप्त होती है।
(ङ) समय की कीमत

प्रश्न 6.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
बहुत घुटन है बंद घरों में, खुली हवा तो आने दो,
संशय की खिड़कियाँ खोल, किरनों को मुस्काने दो।
ऊँचे-ऊँचे भवन उठ रहे, पर आँगन का नाम नहीं,
चमक-दमक, आपा-धापी है, पर जीवन का नाम नहीं
लौट न जाए सूर्य द्वार से, नया संदेशा लाने दो।
हर माँ अपना राम जोहती, कटता क्यों वनवास नहीं
मेहनत की सीता भी भूखी, रुकता क्यों उपवास नहीं।
बाबा की सूनी आँखों में चुभता तिमिर भागने दो।
हर उदास राखी गुहारती, भाई का वह प्यार कहाँ ?
डरे-डरे रिश्ते भी कहते, अपनों का संसार कहाँ ?
गुमसुम गलियों को मिलने दो, खुशबू तो बिखराने दो।
(क) ‘ऊँचे-ऊँचे भवन उठ रहे, पर आँगन का नाम नहीं-पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [2]
(ख) सूर्य द्वार से ही क्यों लौट जाएगा? [2]
(ग) आज रिश्तों के डरे-डरे होने का कारण आप क्या मानते हैं? [1]
(घ) ‘तिमिर’ शब्द का अर्थ लिखिए। [1]
(ङ) कवि ने क्या संदेश दिया है? [1]
अथवा
मेरा माँझी मुझसे कहता रहता था
बिना बात तुम नहीं किसी से टकराना।
पर जो बार-बार बाधा बन के आएँ,
उनके सिर को वहीं कुचल कर बढ़ जाना।
जानबूझ कर जो मेरे पथ में आती हैं,
भवसागर की चलती-फिरती चट्टानें
मैं इनसे जितना ही बचकर चलता हूँ,
उतनी ही मिलती हैं, ये ग्रीवा ताने।
रख अपनी पतवार, कुदाली को लेकर
तब मैं इनका उन्नत भाल झुकाता हूँ।
राह बनाकर नाव चढ़ाए जाता हूँ,
जीवन की नैया का चतुर खिवैया मैं
भवसागर में नाव बढ़ाए जाता हूँ।
(क) राह में आने वाली बाधाओं के साथ कवि कैसा व्यवहार करता है? [2]
(ख) कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है? स्पष्ट कीजिए। [2]
(ग) कवि ने अपना माँझी किसे कहा है? [1]
(घ) “उन्नत भाल’ का क्या आशय है? [1]
(ङ) जीवन की नैया का चतुर खिवैया’ किसे कहा गया है?   [1]
उत्तर:
(क) कवि कह रहा है कि शहरों में गगनचुंबी इमारतें खड़ी हैं लेकिन आपस में प्रेम, स्नेह, सौहार्द की भावना नहीं है। ऊंची इमारतें हैं लेकिन आंगन बिना प्रेम और स्नेह के सूने हैं।
(ख) जीवन की चमक-दमक और आपाधापी देखकर कवि को लगता है कि सूर्य कह द्वार से ही न लौट जाए।
(ग) आज रिश्तों में प्यार और अपनापन नहीं रह गया है, यही, कारण कवि को रिश्तों के डरे-डरे होने का लगता है।
(घ) अंधकार।
(ङ) कवि ने संदेश दिया है कि आज हम ऊंचे-ऊंचे भवनों में रहकर प्यार, प्रेम, स्नेह और अपनापन खो बैठे हैं।
अथवा
(क) कवि बाधाओं का सिर कुचलकर आगे बढ़ जाता है।
(ख) कवि बाधाओं से न घबराने की प्रेरणा दे रहा है। कवि कहता है कि जितना ही हम बाधाओं से दूर भागते हैं ये हमारा पीछा करती हैं इसलिए निडर होकर हमें बाधाओं का सामना करना चाहिए।
(ग) स्वयं को।
(घ) बड़ी से बड़ी विघ्र बाधाएँ।
(ङ) कवि स्वयं को जीवन की नैया का चतुर खिवैया कहता

खण्ड ‘ग’

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से किन्हीं एक विषय पर दिए गए
संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबन्ध लिखिए : [10]
(क) महानगरों में महिलाओं की सुरक्षा

  • जीवन शैली
  • कामकाजी महिलाओं की समस्या
  • सुरक्षा में कमियों के कारण व सुझाव

(ख) मित्र की परख संकट में ।

  • भले दिनों के मित्र
  • बुरे दिनों के मित्र
  • मित्र की परख

(ग) मेरी कल्पना का विद्यालय

  • विद्यालय में क्या है अनावश्यक
  • क्या-क्या है आवश्यक
  • विद्यालय और परिवेश

उत्तर:
(क) महानगरों में महिलाओं की सुरक्षा
हम सभी जानते हैं कि हमारा देश हिंदुस्तान पूरे विश्व में अपनी अलग रीति रिवाज तथा संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। भारत में प्राचीन काल से ही यह परंपरा रही है कि यहाँ महिलाओं को समाज में विशिष्ट आदर एवं सम्मान दिया जाता है। भारत वह देश है जहाँ महिलाओं की सुरक्षा और इज्जत का खास ख्याल रखा जाता है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी लक्ष्मी का दर्जा दिया गया है। अगर हम इक्कीसर्वी सदी की बात करें तो महिलाएं हर कार्यक्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला काम कर रही हैं चाहे वो राजनीति, बैंक, विद्यालय, खेल, पुलिस, रक्षा क्षेत्र, खुद का कारोबार हो या आसमान में उड़ने की अभिलाषा हो।

हम यह तो नहीं कह सकते कि हमारे देश में महिला सुरक्षा को लेकर कोई मुद्दा नहीं है परन्तु हम कुछ सकारात्मक बिंदुओं को अनदेखा भी नहीं कर सकते।

एक महिला को अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से जिंदगी जीये। वह जब चाहे तब अपनी मर्जी से कहीं भी कभी भी जा सकती है। लेकिन एक सवाल उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

आज ऐसा जमाना है जब जगह-जगह इंसान की शक्ल में भेड़िये घूम रहे हैं। वह भेड़िया आपके साथ में बैठा ऑफिस का कर्मचारी हो सकता है, आपका बॉस हो सकता है, आपके साथ बस या मेट्रो में बैठा यात्री हो सकता है, आपका अपना कोई रिश्तेदार हो सकता है या फिर स्वयं आपका कोई अच्छा और विश्वासपात्र मित्र भी।

किस वक्त कौन सा भेड़िया हमला बोल दे, इसकी क्या गारंटी है। स्वयं एक महिला होने के नाते मुझे यह बात कहते हुए बहुत दु:ख होता है कि हमारा समाज सुरक्षित नहीं है। केवल समाज ही क्यों…. आज तो घर में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। दिल्ली महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से देश का सबसे असुरक्षित शहर है एक नए सर्वेक्षण के अनुसार छुट्टियों में घूमने-फिरने या काम के लिए बाहर निकलने के लिहाज से दिल्ली को सबसे असुरक्षित महानगर माना गया है।

मुंबई को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से (34 प्रतिशत) सबसे सुरक्षित बताया गया जबकि 12 प्रतिशत मतों के साथ अहमदाबाद एवं बैंगलुरु दूसरे स्थान पर हैं।

(ख) मित्र की परख संकट में
मित्र जीवन के लिए परमावश्यक है। बिना मित्र के हम मनुष्य जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। सच्चा मित्र अर्थात जो विपत्ति में हमारा साथ दे ऐसा मित्र बहुत मुश्किल से मिल पाता है। सच्चा मित्र जीवन के लिए औषधि के समान है। सच्चा मित्र मुसीबत में सबसे पहले काम आता है। वह कठिनाई के दिनों में भी साथ नहीं छोड़ता है। रहीम दास जी ने कहा है,
”रहिमन विपदा हू भली जो थोड़े दिन होइ,
जगत में जानि पड़ते सब कोई।”

हित अनहित या वे कहते हैं कि थोड़े दिनों का कष्ट अच्छा है। क्योंकि उस समय हम अपने असली मित्र को पहचान सकते है।

ऐसा देखा जाता है कि सुख के समय जब व्यक्ति के पास धन, समाज में मनि, अच्छी नौकरी, सकुशल परिवार होता है तो उसके अनेक मित्र होते हैं। पर जैसे ही उसके पास नि का अभाव होता है या उसके बुरे दिन होते हैं, सभी मित्र जो सिर्फ नाम के मित्र थे उसे छोड़ देते हैं। जैसे जब तक तालाब में पानी रहता है अनेक मेढ़क उसके पास मँडराते रहते हैं और पानी सूखने पर तालाब को छोड़कर वो अन्य किसी जगह चले जाते हैं।

एक अच्छा मित्र सही सलाह देता है और हमें गलत रास्ते पर जाने से रोकता है। वह सुख-दु:ख का साथी होता है। सिर्फ सुख में साथ देने वाले व्यक्ति, असली मित्र नहीं होते हैं। सच्चा मित्र दु:ख में सहायता करता है। हम उस पर भरोसा कर सकते हैं। इसलिए मुसीबत में ही मित्र की परख होती है।

सच्चे मित्र आपके साथ बेवजह नाटकपन या बनावटीपन नहीं दिखाते अगर आपका मित्र आपकी व्यक्तिगत गोपनीय बातें दूसरे लोगों से साझा करता है, तो सच मानिए वह आपका सच्चा मित्र नहीं है उसे तुरंत छोड़ देने में ही आपकी भलाई है।

एक अच्छा दोस्त भावनात्मक रूप से बुद्धिमान होता है, वह आपको इसलिए नहीं ठुकरीता, क्योंकि लोग आपको अच्छा नहीं मानते या आपके बारे में आपके मित्रों को गलत राय देते हैं, बुरे समय में जब कोई आपके साथ नहीं होता, तब भी सच्चा मित्र आपका साथ नहीं छोड़ता। जीवन में एक अच्छे दोस्त का होना बहुत जरूरी है। एक ऐसा दोस्त जो हर मुश्किल में आपका साथ दे एक अच्छा दोस्त हमारे जीवन का अहम हिस्सा होता है। जिसकी जरूरत हमें उम्र के हर पड़ाव में होती है। दोस्ती का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है। मित्र राजदार भी होते हैं और सुख-दुख के साथी भी। अत: सच्चा मित्र जीवन के लिए परमावश्यक है।

(ग) मेरी कल्पना का विद्यालय
घर के बाद विद्यालय हर व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यालय एक ऐसा स्थान है, जहाँ लोग बहुत कुछ सीखते हैं और पढ़ते हैं। इसे ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। अपने विद्यालय या पाठशाला में हम सब जीवन का सबसे अधिक समय व्यतीत करते हैं। जिसमें हम कई विषयों में शिक्षा प्राप्त करते हैं।

स्कूल में हमारे अध्यापक गण अपना ज्ञान हमें प्रदान कर सफलता प्राप्त करने का रास्ता दिखाते हैं। विद्यालय का उदेश्य होता है कि विद्यार्थियों को उत्तम शिक्षा मिले। मेरी कल्पना का विद्यालय ऐसा होना चाहिए कि जहाँ शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ, विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास हो। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद, रहन-सहन, विज्ञान, कला के क्षेत्र में भी ज्ञान प्रदान किया जाये। सभी विषय के उच्च शिक्षित एवं जानकार शिक्षक विद्यालय में तैनात हो। विद्यालय में उपयुक्त पुस्तकालय हो जो इंटरनेट के माध्यम से विश्व से जुड़ी हो। परंपरागत शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलोजी का भी भरपूर उपयोग हो। विद्यालय में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं का उपयोग करते हुये, चुनिन्दा जानकर शिक्षकों के द्वारा ज्ञान प्राप्त किया। जा सके। विद्याथियों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ जैसे पुस्तकालय, इंटरनेट, कम्प्यूटर, प्रॉजेक्ट, आदि उपलब्ध हो मेधावी विद्यार्थी के साथ-साथ कमजोर विद्यार्थी पर भी शिक्षकों का पूरा ध्यान हो। अगर विद्यार्थी किसी कारणवश विद्यालय आने में असमर्थ हो तो वह इंटरनेट के माध्यम से भी अपने घर पर भी विद्यालय की कक्षा में मानसिक रूप से उपस्थित रह सके। इस प्रकार मेरी कल्पना का विद्यालय आज के युग से कदम से कदम मिलाकर चलाने वाला होना चाहिए।

मेरी कल्पना के विद्यालय में सर्वधर्म समभाव होना चाहिए। अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। हर विद्यार्थी स्वच्छंद रूप से बेहिचक प्रसन्नतापूर्वक शिक्षा ग्रहण कर सके।

मेरी कल्पना के विद्यालय में एक बहुत ही सुंदर पुस्तकालय होना बेहद आवश्यक है। जहाँ हर विषय और ज्ञान की पुस्तकों की भरमार हो जहाँ विद्यार्थी खुश होकर स्वाध्याय कर सके। हमारा विद्यालय हमारा विद्या का मंदिर होता है। जिस तरह से भक्त लोगों के लिए मंदिर और पूजा स्थल पवित्र स्थान होता है उसी तरह से एक विद्यार्थी के लिए उसका विद्यालय एक पवित्र स्थल होता है। इस पवित्र मंदिर के भगवान हैं हमारे गुरुजन जो हमारे अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर हमारे मन में ज्ञान रूपी प्रकाश को फैला देते हैं। अतः मेरी कल्पना का विद्यालय ज्ञान विज्ञान का और स्वस्थ स्वच्छ वातावरण का तथा शांति एकता सौहार्द्र और प्रेम का पवित्र मंदिर होना चाहिए जो छात्रों के भविष्य को उज्ज्वल और उन्नत दिशा में आगे बढ़ाए।

प्रश्न 8.
आपके क्षेत्र में डेंगू फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर उपयुक्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए। [5]
अथवा
अपने प्रिय मित्र को पत्र लिखकर धन्यवाद दीजिए कि आड़े वक्त में उसने किस तरह आपका साथ दिया था।
उत्तर:
परीक्षा भवन,
च, छ, ज, आगरा।
सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी।
त थ द, आगरा।
महोदय
सविनय निवेदन इस प्रकार है कि मैं च छ ज क्षेत्र का निवासी हूँ इस पत्र के द्वारा आपको ध्यान अपने क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्यों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। हमारे क्षेत्र में डेंगू प्रबल रूप से फैलता ही जा रही है जिस कारण अस्पतालों में , भी मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की सख्त कमी है। उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ और डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों की मृत्यु हो रही है।

अतः आप से निवेदन है कि हमारे क्षेत्र के अस्पताल में उचित । चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और दवाएँ उपलब्ध करवाई जाए जिससे डेंगू से पीड़ित मरीजों की जान बचाई जो सके।

यदि आपने मेरी समस्या पर अमल किया तो मैं और मेरे क्षेत्र के निवासी आपके अत्यंत आभारी रहेंगे।
सधन्यवाद!
भवदीय,
अ ब स
दिनांक 30 – 03 -20XX
अथवा
परीक्षा भवन,
त थ द, आगरा।
दिनांक 30 – 03 -20XX
प्रिय मित्र,
मधुर स्मृति
मैं यहाँ पर कुशल मंगल हूँ तथा तुम्हारी कुशलता की कामना ईश्वर से करता हूँ।

पत्र लिखने का कारण यह कि मैं तुम्हें तुम्हारी दयालुता और सहयोग भावना के लिए तहेदिल से धन्यवाद प्रकट करना चाहता हूँ।

मित्र जब मुझे पैसे की सख्त आवश्यकता थी और मैं लाचार था तब आड़े वक्त में तुमने मुझे पैसे देकर मेरी समस्या को दूर किया। मैं शुक्रगुजार हूँ कि तुम्हारा किस प्रकार कर्ज चुकाऊँ।

ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम्हारे जैसा मित्र सबको मिले। मैं तुम्हारी दयालुता को कभी भुला नहीं पाऊंगा घर में अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम देना और छोटे भाई बहन को प्यार।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
च छ ज

प्रश्न 9.
आपके शहर में एक नया वाटर पार्क खुला है, जिसमें पानी के खेल, रोमांचक झूलों, मनोरंजक खेलों और खान-पान की व्यवस्था है। इसके लिए एक विज्ञापन का आलेख लगभग 50 शब्दों में तैयार कीजिए। [5]
अथवा
आपके पिताजी अपनी पुरानी कार बेचना चाहते हैं। इसके लिए पूरा विवरण देते हुए एक विज्ञापन का आलेख लगभग 50 शब्दों में तैयार कीजिए।
उत्तर:
खुशखबरी! खुशखबरी ! | खुशखबरी!
आपके शहर में पहली बार
मसलती की बहार
आइए आइए ! वाटर पार्क का आनंद लीजिए।
पानी के रोमांचक खेल आनंददायक झूले
मनोरंजक खेलों के संग खान-पान के रंग
अपने शहर में वाटर पार्क का असीमित आनंद लीजिए।
जिंदगी को सुकून दीजिए।
आइए टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट
ऑफर सीमित समय के लिए
क्रिस्थल वाटर पार्क
नियर रोहिणी वेस्ट
मैट्रो स्टेशन
9871543098
अथवा
सेल! सेल! सेल!
पुरानी कार के दाम पर एकदम नई कार
खुशियों का खजाना अपार
एक वर्ष पुरानी स्विफ्ट मारुति कार सफेद रंग
एकदम चमचमाती हुई नवीनता के संग
कीमत 200000/ मात्र
जल्दी आओ जल्दी पाओ
सुनहरा मौका हाथ से छूटने न पाए
आइए सस्ते दाम में कार अपने नाम कीजिए।
मोहित शर्मा
76/2
चांदनी चौक
नई दिल्ली
7876144356.

खण्ड ‘घ’

प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिएः
पिता के ठीक विपरीत थीं हमारी बेपढ़ी-लिखी माँ। धरती से कुछ ज्यादा ही धैर्य और सहनशक्ति थी शायद उनमें । पिता जी की हर ज्यादती को अपना प्राप्य और बच्चों की हर उचित-अनुचित फरमाइश और जिद को अपना फर्ज समझकर बड़े सहज भाव से स्वीकार करती थीं वे। उन्होंने जिंदगी भर अपने लिए कुछ माँगा नहीं, चाहा नहीं केवल दिया ही दिया। हम भाई-बहिनों का सारा लगाव (शायद सहानुभूति से उपजा) माँ के साथ था लेकिन निहायत असहाय मजबूरी में लिपटा उनका यह त्याग कभी मेरा आदर्श नहीं बन सका न उनको त्याग, न उनकी सहिष्णुता
(क) माँ की उपमा धरनती से क्यों की गई है? [2]
(ख) लेखिका को माँ का कौन-सा रूप अच्छा नहीं लगता था? क्यों? [2]
(ग) लेखिका और उसके भाई-बहिनों की सहानुभूति किसके साथ थी?
उत्तर:
(क) लेखिका मन्नू भंडारी की माँ के अंदर धरती से भी अधिक धैर्य और सहनशक्ति थी। पिताजी की हर ज्यादती को अपना प्राप्य समझती थी और बच्चों की हर अनुचित फरमाइश और जिद को अपना फर्ज समझकर बड़े सहज भाव से स्वीकार करती थी। इसलिए उनकी उपमा धरती से की गयी है।
(ख) लेखिका को अपनी माँ का निहायत मजबूरी में लिप्त त्याग हौर सहनशक्ति वाला रूप अच्छा नहीं लगता था। क्योंकि लेखिका स्वच्छंद विचारों की और आजाद ख्यालों की थी। हर व्यक्ति को अपने जीवन को अपने तरीके से जीने की कला में वह विश्वास रखती थी।

(ग) लेखिका और भाई बहनों की सहानुभूति अपनी माँ के साथ थी।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से किन्ही चार प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए : [2 × 4 = 8]
(क) बालगोबिन भगत के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ लिखिए।
(ख) मन्नू भंड़ारी और उनके पिता के बीच मतभेद के दो कारण लिखिए।
(ग) कैप्टन कौन था ? वह मूर्ति के चश्मे को बार-बार क्यों बदल दिया करता था ?
(घ) फादर बुल्के को हिन्दी के बारे में क्या चिंता थी?
(ङ) खीरा काटने में नवाब साहब की विशेषज्ञता का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
(क) बालगोबिन भगत गृहस्थ होकर भी साधु का प्रतिनिधित्व करते थे। सामाजिक रूढ़वादिता में विश्वास नहीं रखते थे। वे कबीर को अपना साहब मानते थे और जो कुछ भी खेत में उपजता उसको सबसे पहले कबीर के मठ में रख देते थे।

(ख) मन्नू भंडारी के पिता चाहते थे कि वह घर में होने वाले राजनीतिक पार्टियों के लोगों के विचार सुने जाने और समझे कि देश में क्या कुछ हो रहा है, यही पिताजी के द्वारा दी गयी आजादी की सीमा थी, लेकिन मन्नू की आजादी की सीमा चारदीवारी से बाहर निकल कर आजादी के आंदोलन में भाग लेना था। इसी कारण अपने पिता के साथ मन्नू की वैचारिक टकराहट थी। क्योंकि दोनों के विचारों में विपरीत सोच थी। दूसरा मन्नू स्वच्छद ख्यालों वाली थी और पिता शक्की स्वभाव के थे।

(ग) कैप्टन चश्मे बेचने वाला दुबला पतला मरियल सा आदमी था। वह इतना बड़ा देशभक्त था कि रोज अपनी फेरी में से नया चश्मा नेताजी की बगैर चश्मे वाली मूर्ति पर लगा दिया करता था। उसकी देशभक्ति का मजाक उड़ाने के लिए लोग उसे कैप्टन कहकर पुकारते थे।

(घ) फादर बुल्के की चिंता हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखने की थी। हिंदी वालों के द्वारा हिंदी की उपेक्षा पर उन्हें बहुत दु:ख होता था। हर मंच से वे अपनी यह तकलीफ बयान करते।

(ङ) नवाब साहब ने पहले खीरों को धोया पोंछा सुखाया और फिर तौलिये से साफ किया। तत्पश्रात खीरों को फांकों में काटा और नमक लगाकर लाल मिर्च की सुर्खा बुरक दी। इतने इत्मीनान से खीरों को सूंघकर बिना खाये ही रसास्वादन करके खिड़की से बाहर फेंक दिया।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
लखन कहा हँसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।
का छति लाभु जून धनु तोरें । देखा राम नयन के भोरें ।।
छुअत टूट रघुपतिहू न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।।
बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा ।।।
बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोहि।
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्हीं। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।
सहसबाहुभुज छेदनिहारा । परसु बिलोकु महीपकुमारा।।
(क) परशुराम के क्रुद्ध होने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? [2]
(ख) प्रस्तुत काव्यांश के आधार पर लिखिए कि परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा। [2]
(ग) परशुराम के बारे में कौन-सी बात विश्व प्रसिद्ध थी? [1]
उत्तर:
(क) परशुराम के क्रुद्ध होने पर लक्ष्मण ने कहा हे मुनि हमारी समझ में तो सारे धनुष एक समान होते हैं। श्रीरामचंद्र ने तो इसे नए के धोखे में हुआ था और छूते ही टूट गया। श्रीराम चंद्र जी का इसमें कोई दोष नहीं है। आप तो व्यर्थ में ही इतना क्रोध कर रहे हैं।

(ख) परशुराम अपनी प्रशंसा करते हुए सभा में बोले- मैं बाल ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हूँ, सारा संसार मुझे क्षत्रिय कुल के विनाशक के रूप में जानता है। अपनी भुजाओं के बल से मैंने धरती को जीत लिया था और अनेक बार ब्राह्मणों को दान में दे दिया था।

(ग) परशुराम अत्यंत क्रोधी और पितृभक्त थे। पूरा संसार उन्हें क्षत्रिय कुल द्रोही के रूप में जानता था।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए : [2 x 4 = 8]
(क) सूरदास’ के पद के आधार पर लिखिए कि गोपियों ने किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं।
(ख) ‘उत्साह’ कविता में कवि बादल को गरजने के लिए क्यों कहता है? बादल से कवि की अन्य अपेक्षाएँ क्या हैं?
(ग) “छाया मत छूना’ कविता में ‘छाया’ शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में हुआ है? स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता क्या संदेश देती है।
(घ) ‘फसल’ कविता में ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है? अपने शब्दों में लिखिए।
(ङ) ‘संगतकार’ किन-किन रूपों में मुख्य गायक की सहायता करता है? कविता के आधार पर उसकी विशेष भूमिका को भी स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(क) गोपियों ने उद्धव से कहा हे उद्धव तुम तो कमल के पत्ते के समान हो जो जल में रहकर भी जल के प्रभाव में नहीं आता, तुम तेल के समान और कृष्ण जल के समान हैं जो तेल पर अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाता। गोपियाँ स्वयं को चींटी और कृष्ण को गुड़ के समान बताती हैं। गोपियाँ कहती हैं जिस प्रकार हारिल पक्षी अपनी लकड़ी को पंजों में दबाकर रहता है ठीक उसी प्रकार हमने कृष्ण को मजबूती से पकड़ रखा है।

(ख) कवि निराला जी एक क्रांतिकारी कवि हैं। वे क्रांति के द्वारा परिवर्तन लाने की बात कहते हैं। कवि का मानना है कि किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए कोमलता नहीं कठोरता की आवश्यकता होती है। इसलिए कवि बादलों को बरसने के स्थान पर गरजने का आह्वान कर रहे हैं।

(ग) छाया मत चूना कविता में छाया शब्द का प्रयोग अतीत की स्मृतियों के रूप में किया गया है। कवि अतीत को छाया के रूप में चित्रित कर रहा है। कविता यह सन्देश देती है कि यदि वर्तमान में हम अपने अतीत को याद करते हैं तो हमारा वर्तमान भी दु:खी हो जाता है। अतः हमे अतीत को भूलकर आने वाले भविष्य के लिए कार्य करना चाहिए।

(घ) फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि परिश्रमी किसानों को सलाम करना चाहता है। किसान तपती गर्मी, कड़कड़ाती तथा हाड़ कॅपकपाती ठण्ड तथा मूसलाधार वर्षा में भी दिन-रात परिश्रम करते हुए खून-पसीना एक करके फसल उगाने में लगा रहता है। उन्हीं के हाथों के स्पर्श के कारण फसलें खेतों में लहलहाती फलती-फूलती दिखाई देती हैं। कवि किसानों के प्रति अपनी आभार व्यक्त करना चाहती है।

(ङ) संगतकार मुख्य गायक को हमेशा बुलंदी पर पहुँचाने में मदद करता है। वह हमेशा मुख्य गायक के सुर में सुर मिलाकर उसको बुलँदी पर पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाता है। जिस प्रकार क्रिकेट के मैदान में सभी खिलाड़ी अपना प्रदर्शन करते हैं लेकिन श्रेय कैप्टन को जाता है। ठीक उसी प्रकार मुख्य गायक की सफलता के पीछे संगतकार का हाथ होता है।

प्रश्न 14.
‘माता का अंचल’ नामक पाठ में लेखक ने तत्कालीन समाज के पारिवारिक परिवेश का जो चित्रण किया है, उसे अपने शब्दों में लिखिए। [5]
अथवा
जॉर्ज पंचम की लाट पर किसी भी भारतीय नेता यहाँ तक की भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक किस ओर संकेत करता है ? आप इस बारे में क्या सोचते हैं।
उत्तर:
माता का अंचल ग्रामीण संस्कृति पर आधारित लेखक के बचपन का संस्मरण है उस समय के सामाजिक परिवेश में बच्चों का बचपन बहुत ही स्वच्छंद और आनंदमय था। लेखक भोलानाथ ने उस समय का वर्णन किया है कि उनका अधिक समय पिता के साथ ही बीतता था माता से सिर्फ दूध पीने का नाता था। सारा दिन भोलानाथ अपने मित्रों के साथ खेल तमाशों में व्यस्त रहता। पिता भी उसकी हर गतिविधि में शामिल रहते। परन्तु जब संकट आया तो भोलानाथ माँ की शरण में जा छुपता क्योंकि हर बच्चे को लगता है कि संकट के समय माँ का अंचल ही उसके लिए सबसे सुरक्षित और महफूज जगह है।
अथवा
रानी एलिजाबेथ भारत दौरे पर आ रही थी तो यह कहानी उसी समय की है। रानी के आने की खबर सुनकर शाही तंत्र में हड़कंप मच गया की जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर नाक गायब है। अब रानी आएगी और मूर्ति को देखेगी तो क्या सोचेगी। तुरंत ही मूर्तिकार को बुलाया गया और मूर्ति पर नाक लगाने का आदेश दे दिया गया। मूर्तिकार पूरे हिन्दुस्तान की सैर करके आया, हर पहाड़ पर गया परन्तु जॉर्ज पंचम की लाट जितनी नाप की नाक कहीं नहीं मिली। इस बात से यह सिद्ध होता है कि हमारी गुलामी की मानसिकता अभी तक गयी नहीं। अंग्रेजों और विदेशियों को खुश रखने के लिए हमारे शाही तंत्र के लोग अपने और अपनी जनता की नाक भी काटने से भी पीछे नहीं हटते।

Class 10th Hindi B Previous Year Question Paper – 2020

खण्ड ‘क’

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2 + 2 + 1 = 5]
(क) वर्तमान समय में शाश्वत मूल्यों की क्या उपयोगिता है? ‘गिन्नी का सोना’ पाठ के आधार पर लिखिए।
(ख) ततांरा-वामीरों की त्यागभरी मृत्यु से निकोबार में क्या परिवर्तन आया?
(ग) कलकत्तावासियों के लिए 26 जनवरी, 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था ?
अथवा
बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे? .
उत्तर:
(क) जिन मूल्यों पर देश तथा काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है उन्हें ही हम शाश्वत मूल्य कहते हैं। जैसे सत्य, अहिंसा, दया, त्याग एवं परोपकार आदि। वर्तमान समय में इन शाश्वत मूल्यों की आवश्यकता तो हैं लेकिन अपनाने वाले बहुत कम है। पाठ के आधार पर कहें तो वास्तविकता है कि लोग बाहरी आवरण व सौन्दर्य से अपना मन भर लेते हैं सच्चाई की गहराई इनसे कोसों दूर रहती है।

इन्हीं लोगों को आज का समाज आदर्शवादिता के रूप में देखता है यथार्थ में जब चर्चा होती है तो इन्हीं के आदर्श बहुत पीछे छूट जाते हैं।

इसी आधार पर व्यावहारिक व्यक्ति अपने जीवन मूल्यों को गिरने नहीं देता गाँधी जी ने भी यही किया कि अपने व्यवहार को ऊपर रखा उस पर बल दिया तभी. आदर्श अपने आप ऊपर उठने लगता है। यही इस पाठ का मूल्य है।

(ख) ततांरा-वामीरों की त्याग भरी मृत्यु से निकोबार में एक सुखद परिवर्तन यह हुआ कि निकोबार के लोग दूसरे गाँवों में भी वैवाहिक संबंध बनाने लगे थे।

(ग) कलकत्तावासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन बहुत महत्वपूर्ण था। इस दिन को अमर बनाने के लिए सबने एकजुट होकर काफी तैयारियाँ की, राष्ट्रीय झंडे लगाए गए, प्रत्येक मार्ग पर उत्साह और नवीनता दिखाई दे रही थी। सरकार के प्रतिबंधों के बावजूद हजारों की संख्या में जुलूस में भाग ले रहे थे मानो ऐसा लग रहा था कि आज स्वतंत्रता मिल गई हो।
अथवा
इस दुनिया के अस्तिव में आने पर सब जीव-जन्तु मानव मिल जुलकर रहते थे, सबका इस प्रकृति में हिस्सा था, मेरा-तेरा नहीं था।

समय के विकास में मनुष्य बुद्धि ने आपस में दीवारें खड़ी कर दी, अब सब डिब्बेनुमा घर कोठरी में सिमट कर रह गए।

लेकिन दूसरी ओर इस बढ़ती आबादी ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कंक्रीट की दुनिया को निर्माण किया।

यह निर्माण इस कदर बढ़ गया कि जमीन छोटी पड़ने लगी तब मनुष्य ने अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए बड़े-बड़े बिल्डरों के द्वारा मुंबई जैसे बड़े शहरों में समुद्र को घेरकर उसकी जमीन हथिया ली और समुद्र को पीछे धकेल दिया।

प्रश्न 2.
बड़े भाईसाहब के व्यक्तित्व की विशेषताओं पर सोदाहरण प्रकाश डालिए। [5]
अथवा
‘कारतूस’ पाठ के आधार पर सोदाहरण सिद्ध कीजिए कि वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था।
उत्तर:
भाई साहब के व्यक्तित्व की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) अध्ययनशील— बड़े भाईसाहब स्वभाव से ही अध्ययनशील थे। वे हरदम किताबों में लीन रहते थे। उनमें रटने की प्रवृत्ति थी।

(2) गंभीर प्रवृत्ति- भाई साहब गंभीर प्रवृत्ति के थे वे छोटे भाई के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते थे। उनका गंभीर स्वभाव ही उन्हें विशिष्टता प्रदान करता था।

(3) घोर परिश्रमी- भाई साहब जीवन में परिश्रम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। वह एक कक्षा में तीन बार फेल होकर भी लगन से पढ़ते रहे। वे दिन रात पढ़ते थे उनकी तपस्या बड़े-बड़े तपस्वियों को भी मात करती है।

(4) वाक्पटु- भाई साहब वाक कला में निपुण थे वह उदाहरणों के जरिए बात समझाने में निपुण थे इस कला के सामने सब उनके सामने नतमस्तक थे।

(5) संयमी व कर्तव्यपरायण– भाई साहब अत्यंत संयमी व कर्तव्यपरायाण थे। वह भी पतंग उड़ाना चाहते थे लेकिन छोटे भाई के आगे ऐसा नहीं करते थे। वह अपने कर्तव्य को बखूबी निभाते थे छोटे भाई के अभिमान को उन्होंने आड़े हाथ लिया जिससे उसका सिर श्रद्धा से झुक गया।

(6) उपदेश देने की कला में निपुण– उपदेश देने की कला में वे निपुण थे वे अपनी बात को साबित करने के लिए सुक्ति बारण चलाते थे।

(7) बड़ों का आदर— बड़े भाई साहब बड़ों का आदर करते थे। वह अपने माता-पिता, गुरुजनों का आदर करते थे और उनके अनुभवों को सम्मान देते थे।

अथवा

वज़ीर अली सचमुच एक जाँबाज सिपाही था। वह बहुत हिम्मती और साहसी था। उसे अपना लक्ष्य पाने के लिए जान की बाजी लगानी आती थी।

जब उससे अवध को नवाबी ले ली गई तो उसने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करना शुरू कर दिया। उसने गवर्नर जनरल के सामने पेश होने को अपना अपमान माना और पेश होने से साफ मना कर दिया। गुस्से में आकर कंपनी के वकील की हत्या कर डाली। यह हत्या शेर की माँद में जाकर शेर को ललकारने जैसी थी।

इसके बाद वह आजमगढ़ और गोरखपुर के जंगलों में भटकता रहा। वहाँ भी निडर होकर अँग्रेजों के कैम्प में घुस गया। उसे अपनी जान की परवाह नहीं थी। उसके जाँबाज सिपाही होने का परिचय उस कैंप में घुसकर कारतूस लेने में सफल हो जाता है तथा कर्नल उसे देखता रह जाता है। इन घटनाओं से पता चलता है कि वह सचमुच जाँबाज आदमी था।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2 + 2 + 1 = 5]
(क) कबीर की साखी के आधार पर लिखिए कि ईश्वर वस्तुत: कहाँ है। हम उसे क्यों नहीं देख पाते ?
(ख) सुमित्रानंदन पंत ने ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में तालाब की तुलना किससे की है और क्यों ?
(ग) कवि किन दिनों में प्रभु की याद बनाए रखना चाहता है? ‘आत्मत्राण’ कविता के आधार पर लिखिए।
अथवा
गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी क्यों छिपा लेती हैं? ‘बिहारी के दोहे’ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
(क) कबीर की साखी के आधार पर ईश्वर की प्राप्ति मन को एकाग्रचित्त करके आध्यात्मिक चिंतन द्वारा की जा सकती है।

मन की विषय-वासनाओं को त्याग कर ही हम भक्ति के मार्ग पर बढ़ सकते हैं। ईश्वर का निवास हमारे मन में होता है उसे कहीं बाहर मन्दिर मस्जिद में नहीं ढूँढ़ना पड़ता।

जैसे मृग की नाभि में कस्तूरी नामक सुगंधित पदार्थ होता है लेकिन वह अज्ञानता के कारण उसे ढूँढ़ने के लिए दूर जंगलों में भटकता रहता है।

अतः हमें अपने मन को एकाग्रचित्त करके ईश्वर को पाने में सफल हो सकते हैं।

(ख) कवि ने तालाब की समानता दर्पण से करते हुए यह दिखाया है कि जिस प्रकार दर्पण में चेहरा दिखाई देता है ठीक उसी प्रकार तालाब में ऊँचे-ऊँचे पर्वतों के प्रतिबिंब साफ दिखाई देते हैं। इस कारण उन्होंने तालाब की समानता दर्पण से की है।

(ग) आत्मत्राण कविता के आधार पर हम कह सकते हैं कि व्यक्ति को दु:खों और मुसीबतों को याद रखना चाहिए लेकिन दूसरी तरफ यह भी कहना है कि यदि हमारे पास सुख है तो भी हमें ईश्वर को भूलना नहीं चाहिए। परमात्मा को याद करना, धन्यवाद देना तथा उनके प्रति विनय प्रकट करना न भूलें।

अथवा

श्रीकृष्ण हर समय केवल बाँसुरी ही बजाते रहते हैं। ऐसे में गोपियों को भी भूल चुके हैं उनका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी को छिपा लेती हैं ताकि उनका पूरा ध्यान गोपियों पर रहे और वे उनसे बातें करें।

प्रश्न 4.
‘तोप’कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए। [5]
अथवा
‘कर चले हम फिदा’ कविता के आधार पर प्रतिपादित कीजिए कि बलिदानी वीर भारतीय युवकों से क्या अपेक्षा करते हैं और क्यों?
उत्तर:
धरोहर अनेक प्रकार की होती हैं तोप भी हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। यह तोप हमें 1857 के स्वतन्त्रता संघर्ष (संग्राम) की याद दिलाती है और देशवासियों को संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। धरोहरें हमें संस्कृति व इतिहास से जोड़ती हैं। यह हमारी परंपराओं, हमारे सैनानियों, बलिदानों का परिचय करवाती हैं।

कंपनी बाग और तोप ये दोनों अँग्रेजों की विरासत हैं। इन दोनों का प्रयोग भारतीय जनता के लिए किया गया था। अँग्रेजी सरकार ने भारतीय जनता को खुश करने के लिए जगह-जगह कंपनी बाग बनवाए। जिससे जनता प्रसन्न हुई। लेकिन दूसरी ओर अँग्रेजों ने जनता में विद्रोह को दबाने के लिए इस तोप का भी इस्तेमाल किया।

यह दोनों विरासतें भारतीय जनता को सावधान करने के लिए रखी गई है। ये विरासतें हमें विदेशी शक्तियों से सावधान करती हैं, ये कहती हैं कि विदेशी कंपनियों द्वारा दिए गए आकर्षणों में न फंसों।

अथवा

इस कविता में कवि ने संदेश दिया है कि देश की रक्षा करना हमारा सबसे अहम कर्तव्य है हमारे मन में यह भावना होनी चाहिए कि देश का सर ऊँचा रहे। किसी भी शत्रु के अपवित्र कदम इस देश पर न पड़ जाए।

हमारे अंदर इतनी शक्ति होनी चाहिए कि हम उसे उसके दुस्साहस का मजा चखा सकें।

विदेशी ताकतों का सामना करने के लिए सीमाओं को सशक्त बनाने के लिए लक्ष्मण रेखा जैसी मजबूत सीमा तैयार करनी चाहिए ताकि शत्रु देश में पाँव भी न रख पाएँ। यह देश को सुरक्षित रखने के लिए केवल हमारे सीमा प्रहरी ही नहीं हर एक नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए।

प्रश्न 5.
मानवीय मूल्यों के आधार पर इफ्फन और टोपी शुक्ला की दोस्ती की समीक्षा कीजिए। [5]
अथवा
हरिहर काका के जीवन के अनुभवों से हमें क्या सीख मिलती है? पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
पाठ के आधार पर टोपी हिन्दू परिवार से संबंध रखता था तथा इफ्फन मुसलमान थी किंतु फिर भी टोपी और इफ्फन में गल्ले संबंध थे। टोपी शुक्ला की पहली दोस्ती इफ्फन से हुई थी। दोनों विपरीत धर्मों के होने के कारण दोनों में अटूट व अभिन्न मित्र थे। पाठ के आधार पर कह सकते हैं कि इफ्फन के बिना टोपी शुक्ला की कहानी में अधूरापन लगेगा। दोनों के लिए रीति-रिवाज सामाजिक हैसियत, खान-पान आदि कोई महत्त्व नहीं रखते थे। दोनों का रिश्ता धर्म और जाति की सीमाएँ पार कर प्रेम के बंधन में बंध गया था। दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे थे। निष्कर्ष तौर पर कह सकते हैं कि दोनों दो जिस्म एक जान थे।

अथवा

यह कहानी ग्रामीण पारिवारिक जीवन तथा हमारी आस्था के प्रतीक धर्मस्थलों में अपने पाँव फैला रही स्वार्थ प्रवृत्ति को उजागर करती है। हरिहर केवल 15 बीगा जमीन के लिए अपने परिवार ठाकुरबारी के महंत उनके पीछे पड़ जाते हैं। परिवार उनकी जमीन को हड़पने को तैयार बैठा है और ठाकुर-बारी के महंत भी इसे इंतजार में है कि कब उनका समय पूरा हो।

इन सब सांसारिक चक्रों में फंस कर हरिहर काका ने अपने अनुभवों से सब अटकलों को मात दे दी वो जानते थे कि अपने साथ तो कुछ जाएगा नहीं सब यहीं पर रह जाना हैं अत: उन्होंने सोच लिया कि अपने जीते जी अपनी जमीन किसी के नाम नहीं करेंगे अगर जमीन किसी को दी तो उनका जीवन नरक बन जाएगा।

महंत द्वारा अपहरण करवा कर भी कोई लाभ नहीं उठा सके। अबे हरिहर काका समझ गए थे कि वह किसी के साथ नहीं रहेंगे। अपनी मदद के लिए उन्होंने एक नौकर रख लिया और पुलिस की देख-रेख में अपना जीवन मौज से बिताने लगे।

खण्ड ‘ख’

प्रश्न 6.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
आज का विद्यार्थी भविष्य की सोच में कुछ अधिक लग गया है। भविष्य कैसा होगा, वह भविष्य में क्या बनेगा, इस प्रश्न को सुलझाने में या दिवास्वप्न देखने में वह बहुत समय नष्ट कर देता है। भविष्य के बारे में सोचिए जरूर, लेकिन भविष्य को वर्तमान पर हावी मत होने दीजिए क्योंकि वर्तमान ही भविष्य की नींव बन सकता है। अतः नींव को मजबूत , बनाने के लिए आवश्यक है कि भान तो भविष्य को भी हो, लेकिन ध्यान वर्तमान पर रहे। आपकी सफलता का मूलमंत्र यही हो सकता है कि आप एक स्वप्न लें, सोचें कि आपको क्या बनना है और क्या करना है और स्वप्न के अनुसार कार्य करना प्रारंभ करें वर्तमान रूपी नींव को मजबूत करें और यदि वर्तमान रूपी नींव सबल बनती गई, तो भविष्य का भवन भी अवश्य बन जाएगा। जितनी मेहनत हो सके, उतनी मेहनत करें और निराशा को जीवन में स्थान न दें यह सोचते हुए समय खराब न करें कि अब मेरा क्या होगा मैं सफल भी हो पाऊँगा या नहीं? ऐसा करने में आपका समय नष्ट होगा और जो समय नष्ट करता है, तो समय उसे नष्ट कर देता है। वर्तमान में समय का सदुपयोग भविष्य के निर्माण में सदा सहायक होता है। भविष्य के बारे में अधिक सोच या अधिक सोच या अधिक चर्चा करने से चिताएँ घेर लेती हैं। ये चिंताएँ वर्तमान के कर्म में बाधा उत्पन्न करती हैं। ये बाधाएँ हमारे उत्साह को लगन को धीमा करती हैं और लक्ष्य हमसे दूर होता चला जाता है। नि:संदेह भविष्य के लिए योजनाएँ बनानी चाहिए, किंतु वर्तमान को विस्मृत नहीं करना चाहिए। भविष्य की नींव बनाने में वर्तमान का परिश्रम भविष्य की योजनाओं से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

(क) आज का विद्यार्थी अपना समय किन बातों में नष्ट कर देता है? इसे त्याज्य क्यों माना गया है? [2]

(ख) हमारी सफलता का मूलमंत्र क्या हो सकता है और कैसे?
(ग) समय का हमारे जीवन में क्या महत्त्व बताया गया है?        [2]
(घ) हम अंतत: लक्ष्य से कैसे दूर होते जाते हैं? इससे कैसे बचा जा सकता है?    [2]

(ङ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक लिखिए।    [1]
उत्तर:
(क) आज का विद्यार्थी भविष्य के सपनों, प्रश्नों और दिवास्वप्न देखने में समय नष्ट कर रहा है। इसे व्याज्य इसलिए माना गया है क्योंकि वह वर्तमान का त्याग कर रहा है।
(ख) हमारी सफलता का मूलमंत्र है कि हम अपने स्वप्न के अनुसार अपने लक्ष्य पाने का कार्य प्रारंभ करें।
(ग) समय का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। यह सही है। जो समय नष्ट करता है भविष्य में समय उसे नष्ट कर देता है।
(घ) लक्ष्य से हम अपनी चिंताओं, जो हमारे कर्म में बाधा उत्पन्न करती है यही बाधाएँ हमारे उत्साह और लगन को धीमा करके हमें हमारे लक्ष्य से दूर करती हैं। इससे बचने के लिए हमें भविष्य की योजनाएँ तो बनानी चाहिए लेकिन वर्तमान को विस्मृत किए बिना वर्तमान का परिश्रम भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

(ङ) समय का महत्त्व/सफलता का मूल मंत्र/परिश्रम भविष्य की डोर।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2 × 3 = 6]
मेरे अंदर एक देश बसता है।
जिंदगी से हारकर जब उदास होता है वह
प्यार देता है।
दुलार देता है।
अपनी बाँहों में कसता है।
मेरे अंदर
एक सभ्यता है।
एक संस्कृति है।
जो जीने की राह बताती है।
सदियों पुरानी होकर
अमर-नवीन कहलाती है।
स्कूल-कालेज-अस्पताल
कल-कारखाने-खेत
नहरें-बाँध-पुल हैं,
जहाँ श्रम के फूल खिलते हैं।
और अड़सठ करोड़ लोग एक-दूसरे के गले मिलते हैं।
मेरे अंदर
कश्मीर-ताज-अजंता-एलोरा का
कुँआरा रूप झिलमिलाता है।
हर नई साँस के संग
नया सूरजमुखी खिलखिलाता है।
(क) कवि के मन में जो देश बसा है, वह उसे निराशा के अवसरों पर भी क्या देता है? समझाइए।
(ख) देश की सभ्यता संस्कृति की विशेषताएँ क्या हैं?
(ग) आशय स्पष्ट कीजिए :
“हर नई साँस के संग
नया सूरजमुखी खिलखिलाता है।”

अथवा

तरूण, तुम्हारी शक्ति अतुल है।
जहाँ कर्म में वह बदली है।
वहाँ राष्ट्र को नया रूप
सम्मुख आया है।
वैयक्तिक भी कार्य तुम्हारा
सामूहिक है।
और
जहाँ हो
वहीं तुम्हारी जीवनधारा
जड़-चेतन को
आप्यायित, आप्लावित करती है
कोई देश
तुम्हारी साँसों से जीवित है
और तुम्हारी आँखों से देखा करता है
और तुम्हारे चलने पर चलता है
संकल्पों में इतनी है शक्ति तुम्हारे
जिससे कोई राष्ट्र बना-बिगड़ा करता है।
(क) राष्ट्र का नवीन रूप कब उभरता है और कैसे?
(ख) युवकों की जीवनधारा जड़-चेतन को किस प्रकार तृप्त करती है?
(ग) आशय स्पष्ट कीजिए :
“संकल्पों में इतनी है शक्ति तुम्हारे
जिससे कोई राष्ट्र बना-बिगड़ा करता है।”
उत्तर:
(क) कवि के मन में जो देश बसा है वह उसे निराशा के अवसरों पर प्यार, दुलार और वह अपनी बाँहों में कसता
(ख) देश की सभ्यता संस्कृति की विशेषताएँ है :
(1) वह संस्कृति हमें जीने की राह बताती है।
(2) पुरानी होकर भी आज अमर नवीन है।
(3) यह सभ्यता विकास की राह दिखाती है।
(4) यही सभ्भता है जहाँ श्रम के फूल खिलते हैं।
(5) यही सभ्यता है जहाँ 68 करोड़ लोग एक दूसरे के गले मिलते हैं।
(ग) यह वही सभ्यता है जहाँ हर एक नई साँस के साथ एक नया उत्साह, नई उमंग नई चाह के साथ रोज नया फूल खिलता है।
अथवा
(क) राष्ट्र का नवीन रूप मानव की शक्ति व कर्म से उभरता खण्७।
(ख) युवकों की जीवन धारा जड़ चेतन को आप्यायित, आप्लावित कर तृप्त करती है।

(ग) इन पंक्तियों का आशय है कि मानव के संकल्पों में इतनी शक्ति होती है कि कोई भी राष्ट्र बन और बिगड़ सकता है।

खण्ड ‘ग’

प्रश्न 8.
शब्द वाक्य में प्रयुक्त होने पर क्या कहलाता है? उदाहरण देकर समझाइए। [2]
अथवा
शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण देकर शब्द और पद में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शब्द वाक्य में प्रयुक्त होने के बाद ‘पद’ कहलाता है।
उदाहरण-(1) शब्द मोहन’
पद- ‘मोहन, पुस्तक पढ़ता है।
(2) ‘शब्द’ जब किसी वाक्य में प्रयुक्त होता है, उसके साथ को विभक्ति लग जाती है। तब शब्द, पद कहलाता है।
शब्द-पुस्तक
पद- राम ‘पुस्तक’ से याद करता है।
अथवा
शब्द एक स्वतंत्र और सार्थक इकाई है।
शब्द जब कोश में रहते हैं तो ‘शब्द’ कहलाते हैं।
उदाहरण- शब्द ‘महिमा’
पद- महिमा सोती है (‘महिमा’ यहाँ पद है)।

प्रश्न 9.
नीचे लिखे वाक्यों में से किन्हीं तीन वाक्यों का निर्देशानुसार रचना के आधार पर रूपांतरण कीजिए : [1 × 3 = 3]
(क) ग्वालियर में हमारा एक मकान था, उस मकाने के दालान में दो रोशनदान थे। (मिश्र वाक्य में)

(ख) तताँरा ने विवश होकर आग्रह किया। (संयुक्त वाक्य में)
(ग) आप जो कुछ कह रहे हैं यह बिलकुल सच है। (सरल वाक्य में)
(घ) प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर:
(क) ग्वालियर के हमारे मकान के दालान में दो रोशनदान (मिश्र वाक्य)
(ख) जब ततांरा विवश हुआ तब उसने आग्रह किया। (संयुक्त वाक्य)
(ग) आप का कहा बिल्कुल सच है। (सरल वाक्य)
(घ) जो प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों के जीवन में आदर्श होते हैं वह धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं। (मिश्र वाक्य)

प्रश्न 10.
(क) निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो पदों को समास-विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए :
ग्रंथकार, देशनिर्वासित, सज्जन     [1 × 2 = 2]
(ख) निम्नलिखित में से किन्हीं दो के समस्त पद बनाकर समास का नाम लिखिए : [1 × 2 = 2]
(i) जो नभ में विचरण करता है।
(ii) सीमा का प्रहरी
(iii) आठ अध्यायों का समूह
उत्तर:
(क) ग्रंथकार—ग्रंथ को करने वाला–कर्म तत्पुरूष
देशनिर्वासित- देश से निरवासित–अपादान तत्पुरुष
सज्जन-सज्जन हैं जो पुरूष (सत्+जन)-कर्मधारय्
(ख), (i) जो नभ में विचरण करता है— नभचर-बहुव्रीहि समास
(ii) सीमा का प्रहरी– सीमा प्रहरी- तत्पुरुष समास
(iii) आठ अध्यायों का समूह- अष्टाध्यायी— द्विगु समास

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से किन्हीं चार वाक्यों को शुद्ध कीजिए : [1 × 4 = 4]
(क) मैं यह कार्य आसानी पूर्वक कर सकता हूँ।
(ख) उस पर घड़ों पानी गिर गया।
(ग) जो मैंने करा वह तुम कभी नहीं कर सकते।
(घ) उसकी तो अक्ल मर गई।
(ङ) मैं सादरपूर्वक निवेदन करता हूँ।
उत्तर:
(क) मैं यह कार्य आसानी से कर सकता हूँ।
(ख) उस पर घड़ों पानी गिरा।
(ग) जो मैंने किया वह तुम कभी नहीं कर सकते।
(घ) उसकी तो अक्ल मरी गई।
(ङ) मैं सादर निवेदन करता हूँ।

प्रश्न 12.
किन्हीं दोरिक्त स्थानों की पूर्ति उचितमुहावरों द्वारा कीजिएः [1 × 2 = 2]
(क) मुझे ::::::” मत समझना, मैं तुम्हारी हर चाल समझता हूँ।
(ख) तुम तो हर छोटी-बड़ी बात पर :::::::: लेते हो।
(ग) भारतीय सैनिकों ने दुश्मन की सेना के ::::: दिए।
उत्तर:
(क) मुझे मूर्ख मत समझना, मैं तुम्हारी हर चाल समझता हूँ।
(ख) तुम तो हर छोटी-बड़ी बात पर आफत मोल लेते हो।
(ग) भारतीय सैनिकों ने दुश्मन की सेना के छक्के छुड़ा दिए।

खण्ड “घ”

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 80-100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए :
(क) पहला सुख-निरोगी काया

  • आशय
  • व्यायाम और स्वास्थ्य
  • समाज को लाभ

(ख) मोबाइल फोन

  • लोकप्रियता
  • सूचना क्रांति
  • लाभ-हानि

(ग) एक ठंडी सुबह

  • कब, कहाँ
  • क्यों है याद
  • क्या मिली सीख

उत्तर:
पहला सुख-निरोगी काया
एक सुखमय जीवन को जीने के लिए 7 सुखों की आवश्यकता होती है जिसमें सबसे पहला व प्रमुख सुख निरोगी काया है। अगर हम इस पहले सुख से ही वंचित रहेंगे तो दुनिया का कोई भी सुख हमें आनंद नहीं दे पाएगा।

इसीलिए कहा जाता हैं।
पहला सुख निरोगी काया
दूजा सुख घर में हो माया
तीजा सुख सुलक्षणा नारी
चौथा सुख हो पुत्र आज्ञाकारी
पाँचवाँ सुख हो सुन्दर वास
छठा सुख हो अच्छा पास
सातवाँ सुख हो मित्र घनेरे
और नहीं जगत में दुख बहुतेरे।

निरोगी काया के लिए सबसे पहले व्यायाम जरूरी है। प्रातःकालीन उठकर व्यायाम करना निरोगी काया का पहला गुण है यदि व्यायाम सही है तो स्वास्थ्य अपने आप ठीक रहता है। एक अस्वस्थ व्यक्ति का मन मष्तिष्क स्वभाव सभी अस्त-व्यस्त रहते हैं। एक निरोगी व्यक्ति अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोटी कमाने से लेकर विद्या अर्जित करने और कला कौशल क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। इसलिए निरोगी काया जीवन की प्रथम आवश्यकता है यदि व्यक्ति नीरोग है तो वह अपनी प्रसन्नता बनाये रह सकता है और दूसरों को भी बाँट सकता है।

वो समाज, वो देश विकास कर सकता है जिसका निवासी स्वस्थ हो। स्वस्थ व्यक्ति एक स्वस्थ समाज का व देश का निर्माण कर सकता है। जहाँ समाज को लाभ मिलेगा वहाँ समाज सुन्दर व स्वस्थ होगा। इसलिए कहा गया है कि व्यक्ति को स्वस्थ रहना चाहिए।

(ख) मोबाइल फोन
पिछले कुछ दशकों से हमारे रोजाना जीवन में बहुत तबदीली हुई है। रोज बाजार में नए-नए उत्पादन सामने आ रहे हैं जो हमारी जीवन शैली को तब्तदील कर रहे हैं नए उत्पादों में एक है मोबाइल। यह बिना तार के नैटवर्क से जुड़ा होता है। मोबाइल सीधा किसी भी व्यक्ति से जुड़ सकता है जिसके पास मोबाइल है। इससे सारा संसार जैसे सुकुड़ सा गया है। अब यह बात सोचने की है कि मोबाइल फैशन का हिस्सा है या एक जरूरत है। आज संसार में इसकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसने तो लैपटॉप को भी पीछे छोड़ दिया है इसमें ऐसी ऐसी सुविधाएँ मिलने लगी हैं। यह बात सही है इस मोबाइल ने सूचना संचार के क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रांति ला दी है।

विज्ञान की इस तरक्की से हम कहाँ से कहाँ तक पहुँच चुके हैं। बच्चों से बुजुर्गों तक के जीवन में एक रचनात्मक परिवर्तन ला दिया है। जो कुछ बचा था वो मोबाइल कम्पनियों ने पूरा कर दिया है। कुछ प्राइवेट कंपनियों के आगमन से प्रतिस्पर्धा की बाढ़ सी आ गई है। आज के स्मार्ट फोन का प्रयोग करके हमें ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा प्राप्त हुई है। रेलवे टिकट, दवा, भोजन आदि सभी मोबाइल से घर बैठे मँगवा सकते हैं। विद्यार्थी वर्ग में यू-ट्यूब, व्हाट्सएप से शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक परिवर्तन लाकर इस क्षेत्र में लगातार परिवर्तन आ रहे हैं। दूसरा शौपिंग के क्षेत्र में भी परिवर्तन आए हैं। फ्लिपकार्ट, अमेज़न जैसी कम्पनियों ने भयंकर परिवर्तन ला दिया है।

नौकरियों के लिए भी मोबाइल महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। जिससे मोबाइल इन्टरनेट वरदान साबित हुआ है। लाभ के साथ-साथ इसकी हानियाँ भी उतनी अधिक हैं। समाज में आतंकवादी भी इससे हानि पहुँचा रहे हैं। विद्यार्थी भी अपना अधिक समय इस पर बिताते हैं इससे उनको शारीरिक हानियाँ बहुत अधिक बढ़ गयी हैं। मोबाइल बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड से चोरी भी अधिक बढ़ गई है। आतंकी फोन पर वायरस व स्पामिंग आदि भेजकर गोपनीय जानकारी चोरी करके आपराधिक कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। निष्कर्ष रूप से हम कह सकते है कि मोबाइल के लाभ-हानि दोनों है।

(ग) एक ठंडी सुबह
25 दिसम्बर का दिन था। प्रात:काल सात बजे सोकर उठने पर मैंने महसूस किया आज की सुबह पहले से ठंडी है। खिड़की के बाहर देखा तो दूर-दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। चारों ओर कुहरा छाया हुआ था। मन न होते हुए भी मुझे बिस्तर से उठना पड़ा। नित्यकर्म से निपट कर गर्म कपड़े पहनकर घर से बाहर निकला। बाहर बर्फीली हवा चल रही थी। सड़क पर बर्फ भी जमी हुई थी। यह सब दिसम्बर के समय था हिमाचल प्रदेश के कुल्लु का यह दृश्य था। इस ठंडी सुबह में बहुत ही बहुत कम लोग नजर आ रहे थे।

पास की नहर भी जम गई थी पेड़ों के पत्तों पर बर्फ चमक रही थी। बर्फ के छोटे-छोटे कण सूरज के हल्की किरणों से जगमगा रहे थे। चारों ओर निस्तब्धता छाई हुई थी। मेरा शरीर एक दम सुन्न सा पड़ गया था और काँपने भी लगा था। सामान्य सर्दी में रहने वाले हम इतनी बर्फ वाली ठंड में जो कभी न देखी न ही सही अब तक केवल सपनों आशाओं में कल्पना करते थे आज प्रत्यक्ष देखने व सहने से जीवन का आनन्द मिल रहा था तो आज का दिन याद तो रहेगा ही। इस प्रकार के मौसम से सीख मिलती है कि जीवन के अनेक रंग हैं जिसका आनन्द
भी उठाना चाहिए पर अपने स्वाथ्य को ध्यान में रखकर

प्रश्न 14.
अपने विद्यालय में पीने के स्वच्छ पानी की समुचित व्यवस्था हेतु प्रधानाचार्य को एक पत्र लिखिए। [5]
अथवा
आपके बचत खाते का ए. टी. एम. कार्ड खो गया है। इस संबंध में तत्काल उचित कार्यवाही करने हेतु बैंक प्रबंधक को पत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रेषक,
परीक्षा भवन,
आगरा।
श्रीमान प्रधानाचार्य,
क ख ग विद्यालय,
जिला आगरा
आगरा।
विषय : स्वच्छ पानी हेतु।
महोदय,
मैं आपके विद्यालय की कक्षा IX का छात्र/छात्रा हूँ। पिछले कई समय से हमारे विद्यालय में स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं है। छात्र डर से आपको बताने में असमर्थ थे। लेकिन पिछले दिनों यह व्यवस्था बहुत खराब हो गई कई विद्यार्थियों की तबियत खराब हो गई जिससे पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी समस्या सामने आई। डाक्टर से सलाह लेने पर पता चला कि यह समस्या पानी की वजह से है। देखने व समझने से पता चला कि विद्यालय के पानी का स्तर ठीक नहीं है अर्थात् स्वच्छता में कमी है टंकी बहुत समय से साफ नहीं हुई पानी में दुर्गंध भी आ रही है। एक जागरूक नागरिक होने व आपके विद्यालय का विद्यार्थी होने के नाते मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि विद्यालय में स्वच्छ पानी की व्यवस्था की जाए टंकी को हर तीन महीने में साफ किया जाए टंकी के पानी में पानी साफ करने की मशीन लगाई जाए जिससे सभी विद्यार्थियों को स्वच्छ पानी पीने को मिले।

आशा है आप हमारी इस समस्या को प्राथमिकता देकर जल्द से जल्द दूर करेंगे।
सधन्यवाद।
प्रार्थी,
क ख ग।
कक्षा IX

अथवा

प्रेषक,
अ ब क,
नई दिल्ली।
दिनांक-20 मार्च, 20XX
प्रबंधक,
यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया,
नजफगढ़,
नई दिल्ली
महोदय
मैं (नाम:…………) आपके बैंक का निर्धारित ग्राहक हूँ। दिनांक 18 मार्च 20XX को मैं दिल्ली से आगरा बस से सफर का रहा था। अधिक भीड़ होने के कारण बैठने की जगह नहीं मिली गाजियाबाद पहुँचने पर पता चला मेरी जेब कट गई है। जो पर्स निकाला गया उसमें मेरा ए.टी.एम ड्राइविंग लाइसेंस कुछ रूपये व अन्य जरूरी कागज थे। बहुत खोजने पर भी वह नहीं मिला। अतः गाजियाबाद थाने में मैंने प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) करवा दी है और सभी खाते बंद करने की सूचना फोन के द्वारा सम्बंधित विभाग को दे दी है। आपसे अनुरोध है इस संबंध में बैंक के द्वारा की जाने वाली उचित कार्यवाही शीघ्रता से पूरी करके मुझे नया ए.टी.एम कार्ड देने की कृपा करे।
सधन्यवाद।
प्रार्थी
अ ब स
नई दिल्ली।

प्रश्न 15.
एक सूचना तैयार कीजिए जिसमें सभी विद्यार्थियों से निर्धन बच्चों के लिए ‘पुस्तक-कोष’ में अपनी पुरानी पाठ्य-पुस्तकों का उदारतापूर्वक योगदान देने हेतु अनुरोध किया गया हो। [5]
अथवा
आपको विद्यालय में एक बटुआ मिला है, जिसमें कुछ रुपयों के साथ कुछ जरूरी कार्ड भी हैं। छात्रों से इसके मालिक की पूछताछ और वापस पाने की प्रक्रिया बताते हुए 25-30 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए।
उत्तर:
क.ख.ग विद्यालय लखनऊ
दिनांक-2 अप्रैल 20XX
(समस्त विद्यार्थियों हेतु)

‘सूचना’ पुस्तक कोष हेतु’

विद्यालय के समस्त विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में एक निर्धन बच्चों के लिये पुस्तक कोष बनाया जा रहा है। सभी विद्याथियों से निवेदन है कि वे अपनी पुरानी कक्षा की पाठ्य पुस्तकों को उदारतापूर्वक इस कोष में जमा कर सकते हैं जिसमें कक्षा 1 से XII की पुस्तक ही मान्य होगी।

आपके इस उदारतापूर्वक कार्य से निर्धन बच्चों को आगे भविष्य में सहयोग होगा और वह अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।
आदेशानुसार
प्रधानाचार्य
छात्र सचिव
क ख ग

अथवा

उत्थान विद्यालय
क. ख, ग नगर
दिनांक-18 अप्रैल 20XX
(समस्त विद्यार्थियों हेतु)
सूचना: खोया पाया विभाग
दिनांक 16 मार्च 20XX को विद्यालय प्रांगण में एक बटुआ मिला है जिसमें कुछ रूपयों के साथ कई जरूरी कार्ड भी हैं।

जिसका भी यह बटुआ है वह दिनांक 18-3-20XX से दिनांक 25-3-20XX तक सुबह 10 बजे से 1 बजे तक छात्र सचिव से संम्पर्क कर ले सकते हैं।

इसके लिए उनके पास अपना पहचान पत्र या अन्य संबंधित पहचान पत्र होना जरूरी है। संपूर्ण जानकारी के बाद ही उन्हें वापस किया जा सकेगा।
धन्यवाद
संपर्क हेतु
छात्र सचिव
मो. 9000800070.

प्रश्न 16.
आपको टी.वी. देखना बहुत पसंद है परन्तु आपकी माताजी को यह समय की बर्बादी लगती है। आपके और आपकी माताजी के बीच जो संवाद होंगे, उन्हें लगभग 50 शब्दों में लिखिए। [5]
अथवा
एक दुर्घटना के बाद दो बच्चों में सड़क सुरक्षा की समस्या पर परस्पर संवाद को लगभग 50 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘संवाद’
गौरव- हाँ माँ मैं यहाँ हूँ।
माताजी- क्या कर रहे हो।
गौर– टीवी देख रहा हूँ।
माताजी– गौरव यह पढ़ाई का समय है टीवी बंद कर दो।
गौरव– बस माँ अभी मैच खत्म होने वाला है।
माताजी– गौरव परीक्षा नजदीक आ रही हैं कोर्स भी पूरा करना है।
गौरव- हो जाएगा माँ।
माताजी- टीवी देखने से कोर्स पूरा होता है क्या? चलो इसे बंद करो।
‘गौरव- माँ बस हो जाएगी खत्म।
माताजी— बेटा यह समय की बर्बादी है और कुछ नहीं जितना समय तुम इसमें लगाते हो उतना समय पढ़ाई में लगाओ तो और अच्छे नम्बर आ सकते हैं।
गौरव- माँ आप तो हमेशा ही डाँटती रहती हो।
माताजी— मेरा डाँटना तुम्हारे अच्छे भविष्य के लिए है न कि तुम्हें नाराज करने के लिए।
गौरव- ठीक हैं माँ तुम्हारी बात समझ आ गई। मैं टीवी बंद करके मेहनत से अपनी परीक्षा की तैयारी करूंगा।

अथवा

राम– श्याम देखो कितनी बुरी दुर्घटना है।
श्याम– स्कूटर सवार बचा कि नहीं।
राम– लगता तो नहीं। श्याम क्यों ऐसा बोल रहे हो।
राम— उसने हैलमैट नहीं पहन रखा था।
श्याम– टैम्पू वाले का क्या हाल हैं ये भी तो उलट गया।
राम- टैम्पू तेजी पर था स्कूटर वाला गलत साइड (तरफ) से था।
श्याम- क्यों आजकल के स्कूटर सवार अपना जोश दिखाते हैं। हैलमेट होने पर भी नहीं पहनते हैं।
राम- उसने हैलमेट नहीं पहन रखा था लेकिन कान में मोबाइल की लीड थी। इसलिए टैम्पू की आवजे व हॉर्न उसे सुनाई नहीं दिया।
श्याम– दे दी उसने अपनी जान सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं करते हैं। तेजी से वाहन चलाते हैं।
राम— तेजी का नतीजा देख लिया अब उसके परिवार वालों का क्या होगा अकेला ही बेटा था जैसे पता चला है।
श्याम– हमें सड़क सुरक्षा के सभी नियमों का पालन करना चाहिए तभी सब सुरक्षित है। बच्चों को परिवार वालों व पुलिस को सख्ती से निपटना होगा।
राम- भगवान सभी को सद्बुद्धि दे।

प्रश्न 17.
सूती वस्त्र तैयार करने वाली कंपनी ‘क-ख-ग पैरहन’ की ओर से दी जा रही छूट का उल्लेख करते हुए एक विज्ञापन का आलेख लगभग 50 शब्दों में तैयार कीजिए। [5]
अथवा
दिल्ली पुस्तक मेले में भाग ले रहे ‘क-ख-ग प्रकाशन की ओर से लगभग 50 शब्दों में एक विज्ञापन का आलेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
CBSE Class 10 Hindi Previous Year Question Papers With Solutions_50.1

Class 10th Hindi A Previous Year Question Paper – 2019

खण्ड ‘क’

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए :
जीप कस्बा छोड़कर आगे बढ़ गई तब भी होलदार साहब इस मूर्ति के बारे में ही सोचते रहे, और अंत में निष्कर्ष पर पहुँचे कि कुल मिलाकर कस्बे के नागरिकों का यह प्रयास सराहनीय ही कहा जाना चाहिए। महत्त्व मूर्ति के रंग या कद का नहीं, उस भावना का है; वरना तो देशभक्ति भी आजकल मज़ाक की चीज़ होती जा रही है।

दूसरी बार जब हालदार साहब उधर से गुजरे तो उन्हें मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया। ध्यान से देखा तो पाया कि चश्मा दूसरा है।
(क) हालदार साहब को कस्बे के नागरिकों का कौन-सा प्रयास सराहनीय लगा और क्यों? [2]

(ख) ‘देशभक्ति भी आजकल मजाक की चीज होती जा रही है।’ इस पंक्ति में देश और लोगों की किन स्थितियों की ओर संकेत किया गया है? [2]
(ग) दूसरी बार मूर्ति देखने पर हालदार साहब को उसमें क्या परिवर्तन दिखाई दिया? [1]
उत्तर:
(क) हालदार साहब को कस्बे के नागरिकों के द्वारा नेताजी की मूर्ति का लगाना सराहनीय लगा, क्योंकि इसमें कस्बे वालों की देशभक्ति की भावना दिखाई दे रही थी।

(ख) हालदार साहब को लगा कि कैप्टन जो मूर्ति का चश्मा बदलता रहता था, पान वाले ने उसका मजाक उड़ाया था। नेता जी की प्रतिमा देशभक्ति की परिचायक थी। हालदार साहब को यह कतई पसन्द नहीं था कि प्रतिमा से संबंधित किसी चीज का कोई मजाक उड़ाए। वे बार-बार सोचते कि उस कौम का क्या होगा जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी, जवानी-जिन्दगी सब कुछ देश पर न्योछावर करने वालों पर हँसती है। उन्हें बहुत खराब लगा कि देश भक्ति भी आजकल मजाक की चीज होती जा रही है।

(ग) दूसरी बार मूर्ति देखने पर हालदार साहब ने देखा कि मूर्ति का चश्मा बदल गया था। साईकिल पर चश्मे बेचने वाला मूर्ति का चश्मा बदल दिया करता था। मोटे फ्रेम वाले चश्मे की जगह तार के फ्रेम वाले चश्मे ने ले ली थी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए : [2 × 4 = 8]
(क) ‘बालगोबिन भगत’ पाठ में किन सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार किया गया है?
(ख) महावीर प्रसार द्विवेदी शिक्षा-प्रणाली में संशोधन की बात क्यों करते हैं?**
(ग) ‘काशी में बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक हैं – कथन का क्या आशय है?
(घ) वर्तमान समाज को संस्कृत कहा जा सकता है या ‘सभ्य ? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।**
उत्तर:
(क) बालगोबिन भगत पाठ में दर्शाई गई सामाजिक रूढ़ियाँ

  • समाज में स्त्री द्वारा मृतक को आग देने का नियम नहीं था, पर बालगोबिन ने पुत्र के क्रिया कर्म के समय पतोहू द्वारा आग दिलाई। यह उस समय के नियम के विरुद्ध था।
  • उन्होंने पतोहू के भाई को बुलाकर पतोहू के पुनर्विवाह पर जोर दिया।

(ग) काशी में बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक हैं। काशी आज भी बिस्मिल्ला खाँ के सुर पर सोती और जागती है। काशी में मरण भी मंगल माना गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि काशी के पास बिस्मिल्ला खाँ जैसा हीरा रहा है जो दो कौमों को एक होने की प्रेरणा देता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए : [5]
हमारें हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जकरी।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी
सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तौ ‘सूर तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी।
(क) ‘हारिल की लकरी’ किसे कहा गया है और क्यों? [2]
(ख) तिनहिं लै सौंपौ’ में किसकी ओर क्या संकेत किया गया है? [2]
(ग) गोपियों को योग कैसा लगता है? क्यों? [1]
उत्तर:
(क) गोपियाँ “हारिल की लकरी’ श्रीकृष्ण के लिए कहती हैं। क्योंकि जैसे हारिल पक्षी लकड़ी के आश्रय को नहीं छोड़ता, उसी प्रकार गोपियाँ श्रीकृष्ण के आश्रय को नहीं छोड़ सकतीं। उन्होंने मन-क्रम-वचन पूरी तरह से श्रीकृष्ण को पकड़ रखा है।

(ख) गोपियाँ उद्धव को कहती हैं कि हम तो पूरी तरह कृष्णमय हो गई हैं और हमें योग की जरूरत नहीं है। हमारा मन भ्रमित नहीं है। इस योग की आवश्यकता तो उनको है। जिनका मन चकरी के समान घूमता रहता है, एक जगह नहीं लगता, इसलिए इस योग को ऐसे लोगों को सौंप दो।

(ग) गोपियाँ कहती हैं कि योग उन्हें कड़वी ककड़ी की तरह लगता है जिसे खाया या निगला नहीं जा सकता है। गोपियाँ यह भी कहती हैं कि वे पूरी तरह कृष्णमय हो गई

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए : [2 × 4 = 8]
(क) जयशंकर प्रसाद के जीवन के कौन-से अनुभव उन्हें आत्मकथा लिखने से रोकते हैं ?**
(ख) बादलों की गर्जना का आह्वान कवि क्यों करना चाहता है? ‘उत्साह कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
(ग) ‘कन्यादान’ कविता में व्यक्त किन्हीं दो सामाजिक कुरीतियों को उल्लेख कीजिए।
(घ) संगतकार की हिचकती आवाज उसकी विफलता क्यों नहीं
उत्तर:
(ख) बादलों की गर्जना” से तात्पर्य क्रांतिकारी स्वर भरना है। कविता के माध्यम से कवि क्रांति की आवश्यकता को चिन्हित करता है। बादल क्रांति के प्रतीक हैं। यह क्रांति रूपी बादल पीड़ित प्यासे जन की आकांक्षाओं को पूरी करेगा और दूसरी तरफ वही बादल नई कल्पना और नए अंकुर उगाएगा।

(ग) कन्यादान कविता में उल्लेखित कुरीतियाँ

  • बाल विवाह-लड़कियों की शादी उनके सयानी होने से पहले (18 वर्ष की आयु से पहले) कर दी जाती थी।
  • समाज में लड़कियाँ केवल घर की चारदीवारी तक सीमित रहती थीं। उन्हें अपने वेश-भूषा, रूप-सौन्दर्य पर ध्यान न देकर केवल घर के चूल्हे-चौके पर ध्यान देना होता था।

(घ) यद्यपि संगतकार की आवाज कमजोर और काँपती हुई थी, परन्तु वह आवाज की कमी उसकी विफलता नहीं थी। वह प्रयास करता था कि गायक के रूप में उसकी आवाज मुख्य गायक से अधिक महत्त्वपूर्ण न हो जाए। इसलिए यह उसकी विफलता नहीं, मनुष्यता का सूचक है। वह दूसरों को आगे बढ़ाता और स्वयं को पीछे रखता है।

प्रश्न 5.
“आज आपकी रिपोर्ट छाप हूँ तो कल ही अखबार बंद हो जाए” -स्वतंत्रता संग्राम के दौर में समाचार-पत्रों के इस रवैये पर ‘एही तैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा’ के आधार पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से लगभग १५० शब्दों में चर्चा कीजिए।” [4]
अथवा
‘मैं क्यों लिखता हूँ’ पाठ के आधार पर बताइए कि विज्ञान के दुरुपयोग से किन मानवीय मूल्यों की क्षति होती हैं ? इसके लिए हम क्या कर सकते हैं ?**

खण्ड ‘ख’

प्रश्न 6.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए :
महात्मा गांधी ने कोई 12 साल पहले कहा थामैं बुराई करने वालों को सजा देने का उपाय ढूँढ़ने लगूं तो मेरा काम होगा उनसे प्यार करना और धैर्य तथा नम्रता के साथ उन्हें समझाकर सही रास्ते पर ले आना। इसलिए असहयोग या सत्याग्रह घृणा का गीत नहीं है। असहयोग का मतलब बुराई करने वाले से नहीं, बल्कि बुराई से असहयोग करना है।

आपके असहयोग का उद्देश्य बुराई को बढ़ावा देना नहीं है। अगर दुनिया बुराई को बढ़ावा देना बंद कर दे तो बुराई अपने लिए आवश्यक पोषण के अभाव में अपने-आप मर जाए । अगर हम यह देखने की कोशिश करें कि आज समाज में जो बुराई है, उसके लिए खुद हम कितने जिम्मेदार हैं तो हम देखेंगे कि समाज से बुराई कितनी जल्दी दूर हो जाती हैं। लेकिन हम प्रेम की एक झूठी भावना में पड़कर इसे सहन करते हैं। मैं उस प्रेम की बात नहीं करता, जिसे पिता अपने गलत रास्ते पर चल रहे पुत्र पर मोहांध होकर बरसाता चला जाता है, उसकी पीठ थपथपाता है; और न मैं उस पुत्र की बात कर रहा हूँ जो झूठी पितृभक्ति के कारण अपने पिता के दोषों को सहन करता है। मैं उस प्रेम की चर्चा नहीं कर रहा हूँ। मैं तो उस प्रेम की बात कर रहा हूँ, जो विवेकयुक्त है और जो बुद्धियुक्त है और जो एक भी गलती की ओर से आँख बंद नहीं करता। यह सुधारने वाला प्रेम है। (क) गांधीजी बुराई करने वालों को किस प्रकार सुधारना चाहते| [2]
(ख) बुराई को कैसे समाप्त किया जा सकता है? [2]
(ग) ‘प्रेम’ के बारे में गांधीजी के विचार स्पष्ट कीजिए। [2]
(घ) असहयोग से क्या तात्पर्य है? [1]
(ङ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपर्युक्त शीर्षक दीजिए। [1]
उत्तर:
(क) गांधीजी बुराई करने वाले को उनसे प्यार करके, धैर्य, नम्रता के साथ उन्हें समझाकर सही रास्ते पर लाना चाहते
(ख) बुराई को असहयोग से समाप्त किया जा सकता है। असहयोग का मतलब बुराई करने वाले से नहीं, बल्कि बुराई का साथ न देना है।
(ग) प्रेम के बारे में गांधीजी के विचार यह हैं कि जो विवेकयुक्त, बुद्धियुक्त और जो एक भी गलती की ओर से अपनी आँखें बंद नहीं करें पुत्र के प्रति पिता का अंधा मोह और पिता के प्रति पुत्र की झूठी पितृभक्ति प्रेम नहीं है।
(घ) “असहयोग” का अर्थ है साथ न देना। यहाँ पर गांधीजी का असहयोग से अर्थ है ‘बुराई में साथ न देना।
(ङ) उपयुक्त शीर्षक समाज से बुराइयों का अंत

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए :
तुम्हारी निश्चल आँखें
तारों-सी चमकती हैं मेरे अकेलेपन की रात के आकाश में प्रेम
पिता का दिखाई नहीं देता है।
जरूर दिखाई देती होंगी नसीहतें
नुकीले पत्थरों-सी
दुनिया भर के पिताओं की लंबी कतार में
पता नहीं कौन-सा कितना करोड़वाँ नंबर है मेरा
पर बच्चों के फूलोंवाले बगीचे की दुनिया में
तुम अव्वल हो पहली कतार में मेरे लिए
मुझे माफ करना मैं अपनी मूर्खता और प्रेम में समझता था
मेरी छाया के तले ही सुरक्षित रंग-बिरंगी दुनिया होगी तुम्हारी
अब जब तुम सचमुच की दुनिया में निकल गई हो।
मैं खुश हूँ सोचकर
कि मेरी भाषा के अहाते से परे है तुम्हारी परछाई।
(क) बच्चे माता-पिता की उदासी में उजाला भर देते हैं-यह भाव किन पंक्तियों में आया हैं? [1]
(ख) प्रायः बच्चों को पिता की सीख कैसी लगती है? [1]
(ग) माता-पिता के लिए अपना बच्चा सर्वश्रेष्ठ क्यों होता है? [1]
(घ) कवि ने किस बात को अपनी मूर्खता माना है और क्यों? [2]
(ङ) भाव स्पष्ट कीजिए : ‘प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता। [2]
उत्तर:
(क) तुम्हारी निश्चल आँखें तारों-सी चमकती हैं।
मेरे अकेलेपन की रात के आकाश में।
(ख) प्रायः बच्चों को पिता की सीख नुकीले पत्थरों की तरह लगती है।
(ग) बच्चे से अत्यधिक प्रेम के कारण माता-पिता को अपना बच्चा सर्वश्रेष्ठ लगता है।
(घ) कवि ने इस बात को अपनी मूर्खता माना है कि एक बच्चा अपने माता-पिता की छाया के नीचे भली-भाँति फल-फूल सकता है और खुश रह सकता है।
(ङ) पिता बच्चे के प्रेम में यदि सही मार्ग दिखाने के लिए उसे नसीहत देता है, तो बच्चों को वे नसीहतें नुकीले पत्थरों की तरह चुभने लगती हैं। बच्चा उन नसीहतों के पीछे पिता के छिपे हुए प्रेम को नहीं देखता।

खण्ड ‘ग’

प्रश्न 8.
निर्देशानुसार उत्तर लिखिए। [1 × 3 = 3]
(क) बालगोबिन जानते हैं कि अब बुढ़ापा आ गया। (आश्रित उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए।)
(ख) मॉरीशस की स्वच्छता देखकर मन प्रसन्न हो गया। (मिश्र वाक्य में बदलिए)

(ग) गुरुदेव आराम कुर्सी पर लेटे हुए थे और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे थे। (सरल वाक्य में बदलिए)
उत्तर:
(क) आश्रित उपवाक्य : अब बुढ़ापा आ गया है। भेद : संज्ञा उपवाक्य
(ख) मिश्र वाक्य : जब मॉरीशस की स्वच्छता देखी तब मन प्रसन्न हो गया।

(ग) सरल वाक्य : गुरुदेव आराम कुर्सी पर लेटकर प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द ले रहे थे।

प्रश्न 9.
निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिए : [1 × 4 = 4)
(क) मई महीने में शीला अग्रवाल को कॉलेज वालों ने नोटिस थमा दिया। (कर्मवाच्य में)
(ख) देशभक्तों की शहादत को आज भी याद किया जाता है। (कर्तृवाच्य में)
(ग) खबर सुनकर वह चल भी नहीं पा रही थी। (भाववाच्य में)
(घ) जिस आदमी ने पहले-पहल आग का आविष्कार किया होगा, वह कितना बड़ा आविष्कर्ता होगा। (कर्तृवाच्य में)
उत्तर:
(क) कर्मवाच्य : कॉलेज वालों के द्वारा मई महीने में शीला अग्रवाल को नोटिस थमा दिया गया।
(ख) कर्तृवाच्य : देश भक्तों की शहादत को आज भी याद करते हैं।
(ग) भाववाच्य : खबर सुनकर उससे चला भी नहीं जा रहा था।
(घ) कर्तृवाच्य : जिस आदमी ने पहले-पहल आग का आविष्कार किया, वह कितना बड़ा आविष्कर्ता होगा।

प्रश्न 10.
रेखांकित पदों का पद-परिचय लिखिए। [1 × 4 = 4]
अपने गाँव की मिट्टी छूने के लिए मैं तरस गया
उत्तर:
पद परिचय
गांव की – संज्ञा पद, सम्बन्ध कारक, जातिवाचक संज्ञा, एकवचन
मिट्टी- संज्ञा पद, जातिवाचक संज्ञा, एकवचन, कर्मकारक
मैं- सर्वनाम, पुरुषवाचक, उत्तम पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन, वर्ताकारक
तरस गया— क्रिया पदबंध अकर्मकद्ध, भूतकाल, पुल्लिंग, एकवचन

प्रश्न 11.
(क) “रति’ किस रस का स्थायी भाव है? [1]
(ख) ‘करुण रस का स्थायी भाव क्या है? [1]
(ग) “हास्य रस का एक उदाहरण लिखिए। [1]
(घ) निम्नलिखित पंक्तियों में रस पहचान कर लिखिए : [1]
मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे,
यमराज से भी युद्ध को प्रस्तुत सदा मानो मुझे।
उत्तर:
(क) रति-श्रृंगार रस
(ख) करुण रस का स्थायी भाव-शोक,
(ग) हास्य रस का स्थायी भाव-होस
(घ) उल्लेखित पंक्तियाँ–वीर रस

खण्ड “घ”

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं
के आधार पर 200 से 250 शब्दों में निबन्ध लिखिए। .[10]
(क) महानगरीय जीवन

  • विकास की अंधी दौड़
  • संबंधों का ह्रास
  • दिखावा

(ख) पर्वो का बदलता स्वरूप

  • तात्पर्य
  • परंपरागत तरीके
  • बाजार का बढ़ता प्रभाव

(ग) बीता समय फिर लौटता नहीं

  • समय का महत्त्व
  • समय नियोजन
  • समय आँवाने की हानियाँ

उत्तर:
(क) महानगरीय जीवन
वर्तमान समय में भारत के अनेक प्रमुख नगर महानगरों में परिवर्तित होते जा रहे हैं। एक नई महानगरीय सभ्यता पनपती जा रही है। आज के दौर में विकास की अंधी दौड़ में हर एक इन्सान उसका हिस्सा बनने की कोशिश कर रहा है। जबकि असलियत यह है कि यह विकास की दौड़ बाहर से देखने पर जितनी लुभावनी लगती है, लोगों को इसमें नौकरी और व्यापार के अवसर दिखाई देते हैं। जिससे उनकी आय उन्हें मोह लेने वाली लगती है। परन्तु जब उन्हें वास्तविकता का सामना करना पड़ता है। तो उनके सारे सपने बिखर जाते हैं, असलियत में जिन्दगी बहुत कठिनाइयों भरी होती है। महानगरों में रहने की समस्या बहुत ज्यादा है। अच्छे घरों के लिए बहुत किराया देना पड़ता है। झुग्गी-झोंपड़ी पहले तो रहने वाली नहीं होती बल्कि साथ में गन्दगी, स्वच्छता की कमी रहती है। महानगरों में पहुँचकर जिन्दगी की कठिनाइयों को झेलते-झेलते आपसी संबंधों का ह्मस शुरू हो जाता है। रिश्ते चाहे माता-पिता के साथ हों, पति-पत्नी के बीच हों, बच्चों के साथ, रिश्तेदारियों में दोस्ती, आदि में किसी के पास भी वक्त नहीं होता और उनके सम्बन्ध के बीच खटास आने लगती है। इसमें कुछ कारण तो आदमी के रहने की जगह से काम करने की जगह के बीच दूरियों और उसमें लगता समय जो कभी-कभी 12 से 14 घण्टे रोजाना का होता है, बहुत बड़ा हाथ है।

पर इन सबके बावजूद महानगरों की चमक-दमक का आकर्षण गांवों के लोगों को अपनी तरफ खींचता है। महानगरों में खाने-पीने की कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। बढ़ते हुए ट्रांसपोर्ट की वजह से वहाँ का वातावरण बहुत प्रदूषित रहने लगा है। इसलिए न वहाँ शुद्ध हवा मिलती है और न ही शुद्ध जल । महानगरों में मध्यम वर्गीय नौकरी-पेशा लोगों को एक और समस्या का सामना करना पड़ता है, वह है दिखावा या दूसरे शब्दों में आन-बान-शान का दिखावा । घर में, आस-पड़ोस में कोई समारोह हो तो ब्यूटी पार्लर, पहनने वाले एक-एक कपड़े और आभूषण का नया होना एक अनिवार्य अंग बन गया है और अगर घर में या रिश्तेदारी में शादी समारोह हो तो लेन-देन का दिखावा अपने चरम पर पहुँच जातो है। इन सब बातों को सामने रखें तो महानगरीय जिन्दगी ‘ में आराम कम और कठिनाइयाँ ज्यादा हैं।

(ख) पर्वो का बदलता स्वरूप समय के साथ-साथ हमारे सभी पर्व और त्योहारों का स्वरूप बदलता जा रहा है। पहले किसी भी पर्व में लोग पूरे उत्साह से भाग लिया करते थे, मंदिरों में पूरी श्रद्धा से पूजा-पाठ चला करता था। प्रत्येक घर में किसी न किसी रूप में एक मंदिर भी हुआ करता था। परन्तु आधुनिक युग में लोगों के पास समय को अभाव रहने लगा। जो लोग किसी पर्व को मनाते भी हैं उनमें ज्यादातर सिर्फ औपचारिकता दिखाने लग गए हैं। भारत में कई पर्व ऐसे भी हुआ करते थे जिसमें आदमी और औरतें दिन-भर का उपवास रखते थे, परन्तु अब इसमें किसी की कोई रुचि नहीं बची।

पर्वो व त्योहारों के परंपरागत तरीके को हम अगर याद करें, तो त्योहार किसी राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना के मुख्य अंग, स्वरूप एवं प्रतीक हुआ करते हैं। उनसे यह जाना जाता है कि कोई राष्ट्र, वहाँ रहने । वाली जातियों, उनकी सभ्यता और संस्कृति कितनी अपनत्वपूर्ण, जीवंत और प्राणवान है। पुराने वक्त में त्योहारों और पर्यों के अवसर पर ये घर-परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्यों को समीप आने, मिल बैठने, एक-दूसरे के सुख-आनंद को साझा बनाने के अवसर होते थे।

पर्वो और त्योहारों के बदलते स्वरूप के लिए आज बाजार का बढ़ता प्रभाव है। किसी भी पर्व को लोकप्रिय बनाने के लिए उससे सम्बन्धित गानों की सीडी छोटे बड़े नये-नये स्टाइल के कपड़े, चुन्नियाँ आदि पहले से मिलनी शुरू हो जाती हैं। बाजार के बदलते और बढ़ते प्रभाव के कारण दिवाली चाइनीज पटाख़ों से भर जाती है।

(ग) बीता समय फिर लौटता नहीं समय यानी वक्त एक ऐसी चीज़ है कि एक बार वो बीत जाये तो फिर नहीं आता और इस बात का मलाल रहता है। कि वह काम समय पर क्यों नहीं किया। विशेषतः आफिस में, समय पर काम न होने से कई बार आर्थिक नुकसान तक हो जाता है। इसलिए सभी को समय के महत्व को समझना जरूरी है। समय वह धन है जिसका सदुपयोग न करने से वह व्यर्थ चला जाता है। हमें समय का महत्त्व तब पता लगता है जब दो मिनट के विलंब के कारण गाड़ी छूट जाती है। जीवन में वही व्यक्ति सफल हो पाते हैं। जो समय का पालन करते हैं। लोगों को अपने समय को नियोजित करने की कला भी आनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को एक मीटिंग में जाना है, एक अफसर से अलग मीटिंग है, और शाम को अपनी शादी की सालगिरह की पार्टी भी देनी है, तो इसमें हर एक काम के लिए समय निकालना पड़ेगा।

कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो बेकार की बातों में समय को आँवा देते हैं। मनोरंजन के नाम पर भी बहुत समय आँवाया जाता है। बहुत से व्यक्ति समय गॅवाने में जैसे-मोबाईल पर गेम खेलने, बेकार की व्हाट्स ऐप पर बातें लिखने में आनंद का अनुभव करते हैं, परन्तु यह प्रवृत्ति हानिकारक है। समय के ऊपर तुलसीदास ने ठीक ही कहा है
“समय चूकि पुनि का पछताने, का वर्षा जब कृषि सुखाने”

प्रश्न 13.
आपके क्षेत्र के पार्क को कूड़ेदान बना दिया गया था। अब पुलिस की पहल और मदद से पुनः बच्चों के लिए खेल का मैदान बन गया है। अतः आप पुलिस आयुक्त को धन्यवाद पत्र लिखिए। [5]
अथवा
पटाखों से होने वाले प्रदूषण के प्रति ध्यान आकर्षित करते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
उत्तर:
अपनी पता
परीक्षा भवन
क. ख. ग.,
नई दिल्ली-1100XX
सेवा में,
पुलिस आयुक्त
पश्चिमी दिल्ली
दिनांक-18 मई, 20XX
(3) विषय-आभार व्यक्त करने हेतु।
महोदय, हम मदनपुर निवासी इस क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों और आपको धन्यवाद देना चाहते हैं। हम दिल से आभारी रहेंगे। इस क्षेत्र के पार्क में पिछले कुछ वर्षों में कूड़ा फेंक–फेंक कर उसे कूड़ाघर में तब्दील कर दिया था।

परन्तु पुलिस से मीटिंग के बाद, पार्क के पास एक बोर्ड लगवाया गया कि उस क्षेत्र में कूड़ा फेंकना मना है। पुलिस विभाग के एक सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति ने कूड़ा डालने वालों को वहाँ आने से मना कर दिया। फिर आसपास के रिहायशी इलाकों वाले लोगों के साथ पार्क में एक फुटपाथ का निर्माण कर पार्क को एक नया रूप मिला। अब सुबह और शाम को लोग पार्क में घूमने आने लगे हैं और इसका श्रेय पुलिस विभाग को मिलना चाहिए।

एक बार फिर से इस क्षेत्र के लोग आपको धन्यवाद देते हैं।
मदनपुर क्षेत्र के निवासी
(सेक्रेटरी)
अथवा
58, पंकज लेन
वसंत कुंज,
नई दिल्ली।
दिनांक-25 अगस्त, 20XX
प्रिय मित्र,
तुम्हारा पत्र मिला। जानकर खुशी हुई कि तुम्हारे माताजी–पिताजी इन दिनों यूरोप घूमने गए हुए हैं और वे सभी प्रमुख जगहों पर जाएँगे। यूरोप घूमकर वापस आने वाले लोग वहाँ के वातावरण जो पूर्णतया प्रदूषण रहित है, का वर्णन करते हैं।

हमारे देश में अब अगले महीने दीपावली का पर्व आ रहा है। जहाँ तक दियों या बल्ब से शहर का रोशन होना बहुत अच्छा । लगता है वहीं दिवाली और दिवाली से पूर्व पटाखे चलाने से। होने वाले प्रदूषण से वातावरण इतना खराब हो जाता है कि पटाखों से निकलने वाले सल्फर के कणों के कारण सांस लेना। दूभर हो जाता है और यह कई बीमारियों की जड़ है। इसलिए मैं तो तुमसे यही कहना चाहूँगा कि खुद भी पटाखे चलाने से परहेज करो और अपने आसपास के लोगों को भी पटाखों से। होने वाले प्रदूषण के बारे में बताओ।
तुम्हारा मित्र
क.ख.ग.

प्रश्न 14.
पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगभग 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए। [5]
अथवा
विद्यालय के वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा निर्मित हस्तकला की वस्तुओं की प्रदर्शनी के प्रचार हेतु लगभग 50 शब्दों में एक ‘ विज्ञापन लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगाये गए विज्ञापन
पर्यावरण जागरूकता दौड़ दिनांक 16 अगस्त 20XX को इण्डिया गेट से शुरू होगी।
पर्यावरण यानी पौधों का वृक्षारोपण को बढ़ावा देने हेतु निम्न वर्गों में दौड़ों का आयोजन किया जा रहा है।
• 10 किमी की दौड़-भारतीय व अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों द्वारा
• 5 किमी की दौड़-महिलाओं के लिए
• 1 किमी की दौड़-वरिष्ठ नागरिकों के लिए
आप अपना पंजीकरण 10 अगस्त, 20XX तक करवा सकते हैं। भाग लेने वाले प्रतिभागियों को एक-एक टी शर्ट दौड़ शुरू होने से पहले मिलेगी।
संयोजक–दिल्ली संघ
फोन नं. FGHXXXXYZ
अथवा
विद्यालय के वार्षिकोत्सव पर हस्तकला प्रदर्शनी
सूचना
विद्यालय वार्षिकोत्सव कमेटी
भारती स्कूल, आगरा
20 अगस्त, 20XX
हमारे विद्यालय में 25 अगस्त, 20XX को वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उसी दिन विद्यालय के क्रीड़ांगन में विद्यार्थियों द्वारा निर्मित हस्तकला की वस्तुओं की प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया है। जो लोग प्रदर्शित वस्तुओं को खरीदने के इच्छुक होंगे वो सीधे उस स्टाल से खरीद सकते हैं।

सभी विद्यार्थियों के परिवारीजन वार्षिकोत्सव व प्रदर्शनी में आमन्त्रित हैं।
सेक्रेटरी
विद्यालय वार्षिकोत्सव कमेटी
भारती स्कूल, आगरा

Class 10th Hindi B Previous Year Question Paper – 2019

खंड ‘क’

प्रश्न 1.
शब्द पद कब बन जाता है ? उदाहरण देकर तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जब कई वर्षों का सार्थक समूह अर्थात् शब्द किसी वाक्य में प्रयुक्त होता है, तब वह शब्द पद बन जाता है। जैसे–मेहनत-(शब्द) मेहनत से जी नहीं चुराना चाहिए। मेहनत एक शब्द है, लेकिन जब वह वाक्य में प्रयुक्त हो जाता है, तो वह पद बन जाता है। यहाँ पर मेहनत वाक्य में प्रयुक्त हुआ है, अतः यह पद है।

प्रश्न 2.
नीचे लिखे वाक्यों का निर्देशानुसार रूपांतरण कीजिए : [1 × 3 = 3]
(क) जापान में चाय पीने की एक विधि है जिसे ‘चा-नो-यू’ कहते हैं। (सरल वाक्य में)

(ख) तताँरा को देखते ही वामीरो फूट-फूट कर रोने लगी। (मिश्र वाक्य में)
(ग) तताँरा की व्याकुल आँखें वामीरो को ढूंढ़ने में व्यस्त थीं। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर:
(क) सरल वाक्य-जापान में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) मिश्र वाक्य-जैसे ही वामीरो ने राँतारा को देखा वैसे ही वह फूट-फूट कर रोने लगी।
(ग) ‘संयुक्त वाक्य-हँतारा की आँखें व्याकुल थीं और वामीरो को ढूँढ़ने में व्यस्त थीं।

प्रश्न 3.
(क) निम्नलिखित शब्दों का सामासिक पद बनाकर समास के भेद का नाम भी लिखिए : [1 × 2 = 2]
जन का आंदोलन, नीला है जो कमल
(ख) निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह करके समास के भेद का नाम लिखिए : [1 × 2 = 2]
नवनिधि, यथासमय
उत्तर:
(क) जनांदोलन – तत्पुरुष समास
नीलकमल — कर्मधारय समास
(ख) नौ निधियों का समाहार-द्विगु समास समय के अनुसार
अव्ययीभाव समास

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए : [1 × 4 = 4]
(क) वह गुनगुने गर्म पानी से स्नान करता है।
(ख) माताजी बाजार गए हैं।
(ग) अपराधी को मृत्युदंड की सजा मिलनी चाहिए।
(घ) मैं मेरा काम कर लूंगा।
उत्तर:
(क) वह गुनगुने पानी से स्नान करता है।
(ख) माताजी बाजार गई हैं।
(ग) अपराधी को मृत्युदंड मिलना चाहिए।
(घ) मैं अपना काम कर लूंगा।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग इस प्रकार कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए [2]
उत्तर:
मौत सिर पर होना- अपने भाई की मृत्यु का बदला लेने के लिए रमेश मौत सिर पर लिए घूम रहा है।
चेहरा मुरझा जाना— जब से दिनेश को अपने अधिकारी से डाँट पड़ी है, तबसे उसका चेहरा मुरझाया हुआ है।

खंड ‘ख’

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 20-30 शब्दों में लिखिए :
(क) तताँरा–वामीरो कथा के आधार पर प्रतिपादित कीजिए कि रूढ़ियाँ बंधन बनने लगें तो उन्हें टूट जाना चाहिए। [2]
(ख) हमारी फिल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ‘ग्लोरीफाई’ क्यों कर दिया जाता है ? ‘तीसरी कसम’ के शिल्पकार शैलेन्द्र के आधार पर उत्तर दीजिए ।** [2]
(ग) ‘गिरगिट’ पाठ में चौराहे पर खड़ा व्यक्ति जोर-जोर से क्यों चिल्ला रहा था ?**
उत्तर:
(क) रूढ़ियाँ जब तक हमारी सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा करती हैं, तब तक तो वे सही हैं, पर जब वे रूढ़ियाँ हमारे लिए बंधन बन जाती हैं, तब वे बोझ स्वरूप हो जाती हैं। तब इनका टूटना ही अच्छा है। इसका कारण यह है कि तब ये रूढ़ियाँ हमारी प्रगति के मार्ग को अवरुद्ध कर देती हैं। यह हमें समय की गति के साथ नहीं चलने देतीं। हमें आधुनिक विचारों को अपनाने से रोकती हैं। ऐसे में ये रूढ़ियाँ हमारे पैरों की बेड़ियाँ बन जाती हैं। इनका टूटना ही अच्छा है।

प्रश्न 7.
“बड़े भाई साहब’ कहानी के आधार पर लगभग 100 शब्दों में लिखिए की लेखक ने समूची शिक्षा प्रणाली के किन पहलुओं पर व्यंग्य किया है? आपके विचारों से इसका क्या समाधान हो सकता है ? तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।
अथवा
‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बढ़ती हुई आबादी का पशुपक्षियों और मनुष्यों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है ? इसका समाधान क्या हो सकता है ? उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए।
उत्तर:
‘बड़े भाई साहब’ पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के निम्न तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है।
(i) इस शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजी शिक्षा पर बहुत अधिक बल दिया जाता है। इसके बिना बालक का पूरा विकास नहीं हो पाता है।
(ii) इस प्रणाली में रटंत विद्या को बढ़ावा दिया जाता है, जो बालक के स्वाभाविक विकास के विपरीत है।
(iii) इस शिक्षा प्रणाली में बीजगणित और रेखागणित को समझना लोहे के चने चबाने जैसा है।
(iv) इस शिक्षा में इंग्लैंड को इतिहास पढ़ना जरूरी है। वहाँ के बादशाहों के नाम याद रखना आसान नहीं है। इसका कोई लाभ भी नहीं है।
(v) इस शिक्षा प्रणाली में बे-सिर-पैर की बातें पढ़ाई जाती हैं जिसका कोई लाभ नहीं है।
(vi) छोटे-छोटे विषयों पर लंबे-चौड़े निबंध लिखने को कहा जाता है।

हम लेखक के विचारों से सहमत हैं क्योंकि इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली में बालकों की मौलिकता नष्ट हो जाती है, उसको स्वाभाविक विकास नहीं हो पाता।

अथवा

बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर बहुत दुष्प्रभाव पड़ा। इस बढ़ती हुई आबादी ने प्रकृति के संतुलन को गड़बड़ा दिया। इस आबादी ने समुद्र को पीछे धकेलना शुरू कर दिया, पेड़ों को रास्ते से हटाना और प्रदूषण को बढ़ाना शुरू कर दिया। पशु-पक्षी बस्तियाँ छोड़कर कहीं भाग गए। वातावरण में गर्मी होने लगी। इस प्रकार बढ़ती आबादी से पर्यावरण प्रदूषित हो गया। ईश्वर ने धरती के साथ-साथ अनगिनत ऐसी वस्तुएँ बनाई हैं, जो मानव हित में हैं, लेकिन स्वयं को बुधिमान समझने वाला मानव इन सबसे लाभ उठाकर स्वार्थी हो गया। स्वार्थ के वशीभूत होकर उसने नई-नई खोज करनी शुरू कर दीं। नई-नई खोजों की लालसा में उसने प्रकृति का अत्यष्टि कि दोहन करना शुरू कर दिया। दोहन इतना अधिक था कि सहनशील प्रकृति व्याकुल हो उठी। प्रकृति के इस असंतुलन का परिणाम यह भी हुआ कि पक्षियों ने बस्तियों से भागना शुरू कर दिया। अब भयंकर गर्मी पड़ने लगी। भूकंप, बाढ़, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदा आने लगीं। नित्य नए-नए रोग पनपने लगे।

इन सभी समस्याओं का समाधान है कि आबादी पर रोक लगाई जाए। प्रदूषण को नियंत्रित किया जाए और प्रकृति ‘ के साथ छेड़-छाड़ बंद करके अधिकाधिक वृक्षारोपण किया जाए।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 20-30 शब्दों में लिखिए :
(क) महादेवी वर्मा की कविता में ‘दीपक’ और ‘प्रियतम’ किन के प्रतीक हैं ?** [2]
(ख) ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर पर्वत के रूप-स्वरूप का चित्रण कीजिए। [2]
(ग) बिहारी ने ‘जगतु तपोबन सौ कियौ क्यों कहा है ? [1]
उत्तर:
(ख) ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में पर्वत श्रृंखला को ही मेखलाकार कहा गया है। पर्वत की ढाल भी मेखलाकार (करधनी के आकार) की होती है। हजारों फूल खिले हैं। पहाड़ पर खड़े पेड़ बहुत ऊँचे हैं। पहाड़ से गिरने वाले झरने झर-झर करते हुए शोर कर रहे हैं।

(ग) ग्रीष्म ऋतु की भयंकर गर्मी की मार के कारण सारा संसार तपोवन के समान तप रहा हैं तेज गर्मी सहन नहीं हो पा रही है। इसलिए बिहारी ने ‘जगतु तपोवन’ शब्दों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 9.
‘कर चले हम फिदा’ अथवा ‘मनुष्यता’ कविता का प्रतिपाद्य लगभग 100 शब्दों में लिखिए।    [5]
उत्तर:
‘कर चले हम फिदा’ गीत प्रसिद्ध शायर कैफी आज़मी द्वारा रचित है। इसे उन्होंने चीनी आक्रमण की पृष्ठभूमि में बनी फिल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखा था। इस फिल्म में हिमालय क्षेत्र में लड़े गए भारत-चीन युद्ध का चित्रांकन किया गया है। इस कविता में देशभक्ति की भावना को प्रतिपादित किया गया है। इस कविता को पढ़कर हमें अपने देश के सैनिकों पर गर्व होता है। इन सैनिकों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए देश की रक्षा हेतु अपना अमर बलिदान दिया। मरते दम तक वे देश-रक्षा के प्रयासों में लगे रहे और अपनी इस धरोहर को अपने साथियों को सौंप कर चले गए। हम सभी को मिलकर अपनी पवित्र धरती की रक्षा करनी है। इस देश की रक्षा में अनेक सैनिकों ने अपना रक्त बहाया है। हिमालय हमारे देश के मान-सम्मान का प्रतीक है, हमें किसी भी हालत में इसके सिर को झुकने नहीं देना है।

अथवा

‘मनुष्यता’ कविता में कवि मैथिलीशरण गुप्त अपनों के लिए जीने-मरने वालों को मनुष्य तो मानता है, लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है कि ऐसे मनुष्यों में मनुष्यता के पूरे-पूरे लक्षण भी हैं। वह तो उन मनुष्यों को ही महान मानता है। जो अपना और अपनों के हित चिंतन से कहीं पहले, दूसरों का हित चिंतन करते हों। उनमें परोपकार प्रेम, एकता, दया, करूणा और त्याग जैसे गुण हों, जिसके कारण युगों-युगों तक लोग उन्हें याद कर सकें। ऐसे लोगों की मृत्यु को ही सुमृत्यु कहा जाता है। रंतिदेव, दधीचि, उशीनर, कर्ण आदि ऐसे ही महान व्यक्ति थे। हमें कभी भी वैभव और धन में अंधा नहीं हो जाना चाहिए। सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के | लिए जीता है और मरता है और एकमत होकर आगे बढ़ता है।

प्रश्न 10.
इफ्फन और टोपी शुक्ला की मित्रता भारतीय समाज के लिए किस प्रकार प्रेरक है ? जीवन-मूल्यों की दृष्टि से लगभग 150 शब्दों में उत्तर दीजिए। [5]
अथवा
‘हरिहर काका’ कहानी के आधार पर बताइए कि एक महंत से समाज की क्या अपेक्षा होती है? उक्त कहानी में महंतों की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए। उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
उत्तर:
टोपी और इफ्फन की कहानी, राही मासूम रज़ा के उपन्यास ‘टोपी शुक्ला को एक अंश है। लेखक ने इस कहानी का आधार दो बच्चों को बनाया है। एक हिंदू परिवार से संबंध रखने वाला है-टोपी, दूसरा है-इफ्फन, जो मुस्लिम परिवार से संबंध रखता है। दोनों में गहरी मित्रता है। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुःख बाँटते हैं। टोपी इफ्फन के घर भी जाता है।

टोपी को इफ्फन की दादी से बेहद लगाव है, जबकि उसे अपनी दादी बिल्कुल अच्छी नहीं लगती। जिस स्नेह और अपनेपन को वह अपने घर में हूँढता था, वह उसे इफ्फन के घर, उसकी दादी से मिलता था। जब इफ्फन की दादी को देहांत हुआ तो वह बहुत उदास हो गया। उसने कहा तेरी दादी की जगह मेरी दादी क्यों नहीं मर गई। उस दिन दोनों खूब रोए। टोपी और इफ्फन की मित्रता ऐसी थी कि दोनों को एक-दूसरे के बगैर चैन नहीं मिलता था।

उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि मित्रता की भावना को मजहब और जाति की दीवारों में कैद नहीं किया जा सकता। आज समाज में टोपी और इफ्फन जैसी मित्रता की बहुत अधिक आवश्यकता है। बच्चों में उत्पन्न प्रेम और अपनेपन का आधार मजहब या सम्पन्न परिवार के लोग नहीं होते। यह भी सच है कि मनुष्य पहले मनुष्य है, वह हिंदू या मुसलमान बाद में है। टोपी और इफ्फन की मित्रता से हमें प्रेरणा मिलती है। कि ऐसी सच्ची मित्रता सांप्रदायिक भावना, तनाव और झगड़ों को समाप्त करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है। ऐसी मित्रता समाज में मौजूद मजहब की दीवारों को भी तोड़ सकती हैं।

अथवा

महंतों से कोई भी समाज यह अपेक्षा रखता है कि ये ईश्वर के दिखाए मार्ग से लोगों को अवगत कराएँ, धर्म और अधर्म की वास्तविक परिभाषा को लोगों के समक्ष लाएँ, दुःखियों और बेसहारों को मंदिर/आश्रम इत्यादि में स्थान देकर उनमें भगवान के प्रति आस्था एवं विश्वास जगाएँ।

‘हरिहर काका’ पाठ में महंत को धूर्त, मक्कार, चालाक, स्वार्थी एवं हिंसक प्रवृत्ति वाला बताया गया है। वह हरिहर काका को अपने जाल में फंसाने को हर संभव उपाय करता है। पहले समझाता-बुझाता तथा अच्छे खाने का जाल फेंकता है, फिर हरिहर काका को पिटवाने तक से बाज नहीं आता। वह एक प्रकार से महंत न होकर एक गुंडा है जो धर्म गुरु का चोगा पहनकर अनैतिक कार्यों में लिप्त रहता है। वह कहीं से भी धार्मिक व्यक्ति प्रतीत नहीं होता। ठाकुरबारी में साधु-संतों का रहन-सहन, ठाठ-बाट इस बात का प्रतीक था। ठाकुरबारी के साधु-संत कामधाम करने में कोई रुचि नहीं लेते थे। वह ठाकुर जी को भोग लगाने के नाम पर दोनों समय हलवा-पूड़ी खाते थे और आराम से पड़े रहते थे। वे सिर्फ बातें बनाना जानते थे। गाँव के लोगों में ठाकुरबारी के प्रति अंधभक्ति थी। वे लोग ठाकुरबारी में प्रवचन सुनकर और ठाकुरजी के दर्शन कर अपना जीवन सार्थक मानते थे।

खंड ‘ग’

प्रश्न 11.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर 20-30 शब्दों में लिखिए :
हँसी भीतरी आनंद का बाहरी चिह्न है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम से उत्तम वस्तु एक बार हँस लेना तथा शरीर को अच्छा रखने की अच्छी से अच्छी दवा एक बार खिलखिला उठना है। पुराने लोग कह गए हैं कि हँसो और पेट फुलाओ। हँसी कितने ही कला-कौशलों से भरी है। जितना ही अधिक आनंद से हँसोगे उतनी ही आयु बढ़ेगी। एक यूनानी विद्वान कहता है कि सदा अपने कर्मों पर खीझने वाला हेरीक्लेस बहुत कम जिया, पर प्रसन्न मन डेमाक्रीट्स 109 वर्ष तक जिया। हँसी-खुशी का नाम जीवन है। जो रोते हैं उनका जीवन व्यर्थ है। कवि कहता है- ‘जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं। मनुष्य के शरीर के वर्णन पर एक विलायती विद्वान ने पुस्तक लिखी है। उसमें वह कहता है कि उत्तम सुअवसर की हँसी उदास-से-उदास मनुष्य के चित्त को प्रफुल्लित कर देती है। आनंद एक ऐसा प्रबल इंजन है कि उससे शोक और दुख की दीवारों को ढा सकते हैं। प्राण रक्षा के लिए सदा सब देशों में उत्तम-से-उत्तम उपाय मनुष्य के चित्त को प्रसन्न रखना है। सुयोग्य वैद्य अपने रोगी के कानों में आनंदरूपी मंत्र सुनाता

एक अंग्रेज डॉक्टर कहता है कि किसी नगर में दवाई लदे हुए बीस गधे ले जाने से एक हँसोड़ आदमी को ले जाना अधिक लाभकारी है।
(क) हँसी भीतरी आनंद को कैसे प्रकट करती है? [2]
(ख) पुराने समय में लोगों ने हँसी को महत्त्व क्यों दिया? [2]
(ग) हँसी को एक शक्तिशाली इंजन के समान क्यों कहा गया है? [2]
(घ) हेरीक्लेस और डेमाक्रीट्स के उदाहरण से लेखक क्या स्पष्ट करना चाहता है? [2]
(ङ) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। [1]
उत्तर:
(क) जो व्यक्ति जितना प्रसन्न और जीवन से संतुष्ट होगा, वह उतना ही स्वस्थ रहेगा। हँसी भीतरी आनंद का बाहरी चिह्न है। हमारे अंदर की खुशी, हमारी हँसी से झलकती है।

(ख) पुराने समय में लोगों ने हँसी को महत्त्व इसलिए दिया है क्योंकि वे मानते थे कि हँसी अनेक कला-कौशलों से भली है। जितना ही अधिक आनंद से हम हँसेंगे, उतनी ही हमारी आयु बढ़ेगी।

(ग) हँसी (आनंद) को एक शक्तिशाली इंजन के समान इसलिए बताया गया है क्योंकि हँसी उदास-से-उदास मनुष्य के चित्त को प्रफुल्लित कर देती है और बड़े-से-बड़े शोक और दुःख को ढहाने में सक्षम कर सकती है।

(घ) लेखक कहता है कि हँसी और आयु में सीधा संबंध है। जितना अधिक आनंद से हँसेंगे उतनी ही आयु बढ़ेगी। हेरीक्लेस हर बात पर खीझता था इसलिए बहुत कम जिया, परंतु डेमोक्रीट्स सदैव प्रसन्न रहता था इसलिए 109 वर्षों तक जिया।।

(ङ) शीर्षक — ‘हँसना : एक उत्तम औषधि

प्रश्न 12.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर 20-30 शब्दों में लिखिए :
मैं चला, तुम्हें भी चलना है असि धारों पर
सर काट हथेली पर लेकर बढ़ आओ तो।।
इस युग को नूतन स्वर तुमको ही देना है,
अपनी क्षमता को आज ज़रा आज़माओ तो।
दे रहा चुनौती समय अभी नवयुवकों को
मैं किसी तरह मंजिल तक पहले पहुँचूँगा।
तुम बना सकोगे भूतल का इतिहास नया,
मैं गिरे हुए लोगों को गले लगाऊँगा।
क्यों ऊँच-नीच, कुल, जाति रंग का भेद-भाव ?
मैं रूढ़िवाद का कल्मष–महल ढहाऊँगा।
जिनका जीवन वसुधा की रक्षा हेतु बना
मरकर भी सदियों तक यों ही वे जीते हैं।
दुनिया को देते हैं यश की रसधार विमल
खुद हँसते-हँसते कालकूट को पीते हैं।
है अगर तुम्हें यह भूख-“मुझे भी जीना है’
तो आओ मेरे साथ नींव में पड़ जाओ।
ऊपर इसके निर्मित होगा आनंद-महल
मरते-मरते भी दुनिया में कुछ कर जाओ।
(क) कवि को नवयुवकों से क्या-क्या अपेक्षाएँ हैं ? [2]
(ख) ‘मरकर भी सदियों तक जीना’ कैसे संभव है ? स्पष्ट कीजिए। [2]
(ग) भाव स्पष्ट कीजिए : [2]
‘दुनिया को देते हैं यश की रसधार विमल,
खुद हँसते-हँसते कालकूट को पीते हैं।
उत्तर:
(क) कवि नवयुवकों से अपना सर्वस्व न्यौछावर करके, देश की उन्नति और उत्थान की अपेक्षा करता है। उसे विश्वास है कि इस देश का युवा ऊँच-नीच, कुल, जाति, रंग आदि सभी भेदभावों को भुलाकर एक नए राष्ट्र का निर्माण और नवयुग का निर्माण करने में सक्षम है।

(ख) ‘मरकर भी सदियों तक जीना’-पंक्ति का अर्थ है कि जो मनुष्य अपने देश और देशवासियों के विकास और उत्थान के लिए प्रयासरत रहते हैं, वे इतिहास के पन्नों पर अमर हो जाते हैं। सदियों तक लोग उनके बलिदान और त्याग को याद करते हैं। इस प्रकार वे सदा के लिए अमर हो जाते हैं।

(ग) प्रस्तुत काव्य पंक्तियों द्वारा कवि साहसी और बलिदानी नवयुवकों के विषय में बताते हुए कह रहे हैं कि सदैव देश और समाज का हित चाहने वाले लोग, दुनिया को अपने बलिदान और त्याग से अपना बना लेते हैं और एक नए राष्ट्र का निर्माण करते हैं। त्याग रूपी इस विष को वे हँसते-हँसते अपने राष्ट्रहित के लिए पी जाते हैं। और इतिहास के पृष्ठों पर अमर हो जाते हैं।

खंड ‘(घ)’

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 80-100 शब्दों का अनुच्छेद लिखिए : [5]
(क) भारतीय किसान के कष्ट

  • अन्नदाता की कठिनाइयाँ
  • कठोर दिनचर्या
  • सुधार के उपाय

(ख) स्वच्छता आंदोलन

  • क्यों बदलाव
  • हमारा उत्तरदायित्व

(ग) मन के हारे हार है मन के जीते जीत

  • निराशा अभिशाप
  • दृष्टिकोण परिवर्तन
  • सकारात्मक सोच

उत्तर:
अनुच्छेद लेखन
(क) भारतीय किसान के कष्ट
भारतीय किसान श्रम का उपासक है। श्रम ही उसका जीवन और श्रम ही उसका मनोरंजन होता है। सुबह से शाम तक वह कठोर परिश्रम करता रहता है, फिर भी उसके चेहरे पर थकान दिखाई नहीं देती। आलस्य को वह अपने पास फटकने तक नहीं देता। आँधी-तूफान, वर्षा की झड़ी, मेघों की गर्जना, बिजली की कड़क, प्रचंड लू और शीत के प्रकंपन के बावजूद वह अपने काम में लगा रहता है। रात-दिन परिश्रम करके भी वह अपने फटे-हाल में मस्त रहता है। झोपड़ियों में रहकर वह महलों के स्वप्न नहीं देखता।

आत्मनिर्भरता की वह जीवंत मूर्ति होता है। हमारा अन्नदाता इतनी कठोर परिस्थितियों में जीवन-यापन करता है। उसके कच्चे घर के चारों ओर लहलहाते खेत ही उसके लिए बगीचा हैं। कृषिप्रधान देश होने के कारण भारत का किसान भारत की रीढ़ है। उसके संकटमय और अभावग्रस्त जीवन को खुशहाल बनाने के लिए उनको सरल ब्याज पर ऋण सुविधाएँ, उनकी फसलों के लिए उचित कीमत और कृषि शिक्षा संबंधी प्रयास अवश्य करने चाहिए। सूखे या अकाल की दशा में उसे सरकार द्वारा मदद दी जानी चाहिए।

(ख) स्वच्छता आंदोलन स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है। स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय अभियान 2 अक्टूबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान के आरंभ की घोषणा की। साफ-सफाई को लेकर दुनिया भर में भारत की छवि बदलने के उद्देश्य से इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाकर देशवासियों को इससे जोड़ा गया। साफ-सफाई केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं हैं हमें अपना यह नजरिया बदलना होगा। इस अभियान के प्रति जनसाधारण को जागरूक करने के लिए सरकार समाचार पत्रों, विज्ञापनों आदि के अतिरिक्त सोशल मीडिया का भी उपयोग कर रही है।

आजकल बड़े-बड़े शहरों में नगर निगमों ने घर-घर से कूड़ा उठवाने की व्यवस्था कर दी है। पहले घर के सामने ही घर का कूड़ा-करकट फेंक दिया जाता था। गाँवों में तो आज भी गली-खरंजों पर पशु बाँधकर गंदगी फैलायी जाती हैं जगह-जगह पर जल भराव, गड्डे, कीचड़ की गंदगी से जीवन दूभर हो जाता है। अब नागरिक जाग उठा है तथा इन सभी कारणों पर ध्यान देने लगा है। गंदगी से अनेक बीमारियाँ फैलती हैं जो हमारे परिवार के बच्चों को हानियाँ पहुँचाती हैं। आज देश का हर नागरिक जागरूक है तथा हेमारी ‘सरकार भी इस ओर अपना पूरा ध्यान दे रही है।

(ग) मन के हारे हार है, मन के जीते जीत “जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभे कलियाँ खिलें, हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही” मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है जिसमें सुख-दुःख, आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं। वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मनोयोग पर आधारित होती है। मन को सीधा संबंध मस्तिष्क से है। मन में हम जिस प्रकार के विचारों को रखते हैं, हमारा शरीर उन्हीं के अनुरुप ढल जाता है।

हमारा मन यदि निराशा व अवसादों से घिरा हुआ है. तब हमारा शरीर भी उसी के अनुरूप शिथिल पड़ जाता है, परंतु दूसरी ओर यदि हम आशावादी हैं। और हमारे मन में कुछ पाने व जानने की तीव्र इच्छा हो तथा हम सदैव भविष्य की ओर देखते हैं तो हम प्रगति की ओर बढ़ते जाते हैं। इसलिए सच ही कहा गया है कि ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत हमारी पराजय का सीधा अर्थ है कि विजय के लिए पूरे मन से प्रयास नहीं किया गया। यदि मनुष्य जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे मन को संयमशील बनाकर ऊँची भावनाओं का स्वामी बनना चाहिए। मनोबल से मनुष्य लौकिक ही नहीं लोकोत्तर शक्तियाँ भी प्राप्त कर सकता है। मानसिक शक्ति के संयम में ही सच्ची सफलता का बीज निहित है।

प्रश्न 14.
बस में छूट गए सामान को आपके घर तक सुरक्षित रूप से पहुँचाने वाले बस कंडक्टर की प्रशंसा करते हुए उसे पुरस्कृत करने के लिए परिवहन अध्यक्ष को एक पत्र लगभग 100 शब्दों में लिखिए। [5]
अथवा
अपने बैंक के प्रबंधक को पत्र लिखकर अपने आधार कार्ड को बैंक खाते से जोड़ने का अनुरोध कीजिए।
उत्तर:
महाप्रबंधक महोदय,
दिल्ली परिवहन निगम
पीतम पुरा, दिल्ली
25 मार्च, 20xx
विषयः बस संख्या DL-IP 3845 (शादीपुर) के कंडक्टर की प्रशंसा हेतु पत्र।
महोदय,
मुझे इस बात की सूचना देते हुए अपार हर्ष हो रहा है। कि दिल्ली परिवहन निगम की बस संख्या DL-IP-3845 (शादीपुर डिपो) के कंडक्टर रामविलास जुनेजा ने कल अत्यंत प्रशंसनीय तथा साहसिक कार्य किया। एक व्यक्ति अपनी बेटी की शादी के लिए गहने खरीदकर आ रहा था। वह बस में सवार हुआ। थोड़ी ही देर में वह चिल्लाने लगा कि उसका बैग छीनकर कोई जेबकतरा बस से उतर गया है। रामविलास ने तुरंत बस रुकवा दी और जेबकतरे के पीछे दौड़ा और अपनी बहादुरी से उससे बैग भी छीन लिया। इस घटना को देखने में अपने जरूरी कागजात का बैग बस में ही भूल गयी। शाम के पाँच बजे मुझे मेरे घर पर मेरा कागजात का बैग लौटाने रामविलास जी मिले।

उनके साहस और ईमानदारी को देखते हुए मैंने उन्हें 1,000 रुपए का पुरस्कार देना चाहा, परंतु उन्होंने लेने से इंकार कर दिया और कहा कि “मैंने अपना कर्तव्यपालन किया है।”

मैं आपसे आग्रह करती हूँ कि श्री रामविलास को पुरस्कृत और सम्मानित किया जाए जिससे कि अन्य व्यक्ति भी इनसे प्रेरणा लें।
धन्यवाद।
भवदीया
रुचि गुप्ता
ई-393, रमेश नगर, नई दिल्ली

अथवा

प्रबंधक महोदय
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
सरस्वती विहार, दिल्ली
25 फरवरी, 2018
विषयः खाता संख्या-13457398 के साथ आधार कार्ड जोड़ने का आग्रह
महोदय,
मैं सोनिया गर्ग, बचत खाता संख्या-13457398 की धारक हूँ। मैं आपसे आग्रह करती हूँ कि मेरे आधार कार्ड, संख्या-631345678915 को मेरे बचत खाते के साथ जोड़ दीजिए। इस पत्र के साथ मेरे आधार कार्ड की प्रतिलिपि संलग्न है।
धन्यवाद
भवदीय
सोनिया गर्ग

प्रश्न 15.
आप हिन्दी छात्र परिषद के सचिव प्रगण्य हैं। आगामी सांस्कृतिक संध्या के बारे में अनुभागीय दीवार पट्टिका के लिए 25-30 शब्दों में सूचना तैयार कीजिए।
अथवा
विद्यालय की सांस्कृतिक संस्था ‘रंगमंच’ की सचिव लतिका की ओर से ‘स्वरपरीक्षा के लिए इच्छुक विद्यार्थियों को यथासमय उपस्थित रहने की सूचना लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। समय और स्थान का उल्लेख भी कीजिए।
उत्तर:
सूचना डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, मेरठ
25 फरवरी, 20xx
सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
सभी छात्रों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में 3 मार्च 20xx को सायं 5 : 00 से 10 : 00 बजे तक विद्यालय सभागार में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। इच्छुक छात्र अपना योगदान दे सकते हैं।
हिंदी छात्र परिषद सचिव
मनिका छाबड़ा

अथवा

सूचना
त्यागी पब्लिक स्कूल, दिल्ली
25 फरवरी, 20xx
गायन कार्यक्रम हेतु ‘स्वरपरीक्षा
विद्यालय की सांस्कृतिक संस्था रंगमंच’ द्वारा आप सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि 27 फरवरी, 20xx को गायन कार्यक्रम हेतु ‘स्वरपरीक्षा विद्यालय सभागार में प्रातः 9:00 बजे आयोजित की जाएगी। इच्छुक छात्र समय पर पहुँच जाएँ।
रंगमंच’ सचिव
लतिका

प्रश्न 16.
विद्यालय में मोबाइल फोन के प्रयोग पर अध्यापक और अभिभावक के बीच लगभग 50 शब्दों में संवाद लिखिए। [5]
अथवा
स्वच्छता अभियान की सफलता के बारे में दो मित्रों के संवाद को लगभग 50 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
अध्यापक : आपके बेटे आर्यन को कल मैंने विद्यालय परिसर में मोबाइल फोन पर बात करते देखा था, इसी संदर्भ में मैंने आपको बुलाया है।
अभिभावक : मैं माफी चाहता हूँ, परंतु कल वह गलती से मोबाइल फोन विद्यालय ले आया। यही बात उसने मुझे कॉल करके बताई थी। अन्यथा वह ऐसा कभी नहीं करता।
अध्यापक : मैं भी यही सोच रहा था कि आर्यन अपने अष्टि किारों और कर्तव्यों के प्रति काफी सजग है, वह ऐसे विद्यालय के नियमों का उल्लंघन कभी नहीं करेगा।
अभिभावक : आपका बहुत धन्यवाद कि आप उसके विषय में सब कुछ जानते हैं। मैं खुद छात्रों द्वारा मोबाइल फोन के प्रयोग के बिल्कुल खिलाफ
अध्यापक : आजकल इन मोबाइल फोनों ने बच्चों के अनुशासन और एकाग्रता को बिल्कुल भंग कर डाला है। अतः एक समझदार अभिभावक होने के नाते में इसके प्रयोग पर पाबंदी को बिल्कुल उचित मानता हूँ।

अथवा

राकेश : अरे सीमांत इतनी जल्दी-जल्दी कहाँ चले जा रहे हो ?
सीमांत : राकेश कहीं नहीं बस आज मेरे विद्यालय के सभी छात्र स्वच्छता अभियान हेतु एक झुग्गी- झोपड़ी बस्ती में जा रहे हैं।
राकेश : शाबाश, परंतु इन इलाकों में तो सफाई करना काफी मुश्किल होगा।
सीमांत : मुश्किल तो हैं, परंतु इन्हीं इलाकों में सबसे ज्यादा स्वच्छता के प्रति जागरूकता की आवश्यकता है। अन्य सभी जगहों पर लोग काफी जागारूक हो चुके हैं।
राकेश : तुमने ठीक कहा, स्वच्छता अभियान ने बहुत जल्दी ही देश भर में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।
सीमांत : देखना 2019 तक देशभर में लोग इस आंदोलन का हिस्सा बन जाएंगे और बढ़-चढ़ कर इसमें भाग लेंगे। भाषाइल फन ।वद्यालय ले आया। यह बात

प्रश्न 17.
अपने विद्यालय की संस्था ‘पहरेदार’ की ओर से जल का दुरुपयोग रोकने का आग्रह करते हुए लगभग 50 शब्दों में एक विज्ञापन का आलेख तैयार कीजिए। [5]
अथवा
विद्यालय की कलावीथि में कुछ चित्र (पेंटिंग्स) बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इसके लिए एक विज्ञापन लगभग 50 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
CBSE Class 10 Hindi Previous Year Question Papers With Solutions_60.1

Related Articles:

FAQs on Class 10 Hindi Previous Year Question Papers

Q. When will CBSE conduct the Class 10th Term 2 Examination?

CBSE will begin Class 10th Term 2 Examination from 26th April 2022 onwards.

Q. Where I can get CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers?

You can get CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers on this page. we have covered CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers with their solutions on this page.

Q. How can I get full marks in Hindi class 10?
Complete the syllabus of Hindi for the Class 10th examination and practice CBSE Class 10th Hindi Previous Year Question Papers given on this page to get full marks in Class 10th Hindi.

Q. Which website is best for previous year’s question papers of CBSE Class 10th?

The official website of Adda247 school is best to get all the previous year’s question papers for CBSE Class 10th.

 

 

Sharing is caring!

Thank You, Your details have been submitted we will get back to you.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *