Correct option is C
ans. (c) 3, 1, 4, 2
- प्रेमचंद और उनका युग (1952)
- भारत की भाषा समस्या (1965)
- भारतेंदु युग और हिंदी भाषा की विकास परंपरा (1975)
- मार्क्स और पिछड़े हुए समाज (1986)
सभी उपर्युक्त रचनाएँ प्रसिद्ध आलोचक रामविलास शर्मा द्वारा लिखित हैं।
Information booster:
डॉ. रामविलास शर्मा हिंदी साहित्य के प्रमुख आलोचक, निबंधकार, विचारक और कवि थे। उनकी आलोचनात्मक रचनाओं ने हिंदी साहित्य को नई दिशा और दृष्टि प्रदान की। उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
प्रेमचंद और उनका युग (1952): इस पुस्तक में डॉ. शर्मा ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान और उनके समय की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण किया है।
प्रगतिशील साहित्य की समस्याएँ (1954): इसमें उन्होंने प्रगतिशील साहित्य आंदोलन की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार किया है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना (1955): इस कृति में उन्होंने आचार्य शुक्ल के आलोचनात्मक दृष्टिकोण का मूल्यांकन किया है।
निराला की साहित्य साधना (तीन खंडों में, 1969, 1972, 1976): यह सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के जीवन और साहित्य पर विस्तृत अध्ययन है।
भारतेंदु युग और हिंदी भाषा की विकास परंपरा (1975): इसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र के समय की भाषा और साहित्यिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण है।
महावीरप्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण (1977): इस पुस्तक में महावीरप्रसाद द्विवेदी के साहित्यिक योगदान और हिंदी नवजागरण पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
नयी कविता और अस्तित्ववाद (1978): इसमें उन्होंने नयी कविता आंदोलन और अस्तित्ववाद के बीच संबंधों की चर्चा की है।
परंपरा का मूल्यांकन (1981): इस कृति में उन्होंने साहित्यिक परंपराओं के पुनर्मूल्यांकन पर विचार किया है।
भाषा, युगबोध और कविता (1981): इसमें भाषा, समय की चेतना और कविता के आपसी संबंधों का विश्लेषण है।
कथा विवेचना और गद्यशिल्प (1982): इस पुस्तक में उन्होंने कथा साहित्य और गद्य की शिल्पगत विशेषताओं पर विचार किया है।
मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य (1984): इसमें उन्होंने मार्क्सवादी दृष्टिकोण से प्रगतिशील साहित्य का विश्लेषण किया है।
भारतीय साहित्य के इतिहास की समस्याएँ (1986): इस कृति में उन्होंने भारतीय साहित्य के इतिहास लेखन की चुनौतियों पर विचार किया है।
भारतीय साहित्य की भूमिका (1996): इसमें उन्होंने भारतीय साहित्य की संरचना और उसकी भूमिका पर विचार किया है।
डॉ. रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि में साहित्य, समाज, इतिहास और संस्कृति का समग्र विश्लेषण प्रमुख है। उन्होंने साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भों में किया, जिससे हिंदी आलोचना को एक नई दिशा मिली। उनकी कृतियाँ आज भी साहित्यिक जगत में मार्गदर्शक के रूप में मान्य हैं।
Additional Knowledge:
हिंदी साहित्य के कुछ अन्य प्रमुख आलोचकों और उनकी कृतियों की सूची निम्नलिखित है:
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
- हिंदी साहित्य का इतिहास
- चिंतामणि
- रस मीमांसा
- काव्य में रहस्यवाद
- सूरदास
- तुलसीदास
- जायसी
नंददुलारे वाजपेयी
- आधुनिक साहित्य
- नया साहित्य-नए प्रश्न
- कवि निराला
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
- हिंदी साहित्य की भूमिका
- कबीर
- नाथ-सिद्धों की वाणी
- सूर साहित्य
- प्रबंध पद्म
डॉ. नामवर सिंह
- कविता के नए प्रतिमान
- छायावाद
- दूसरी परंपरा की खोज
- इतिहास और आलोचना
- कहानी: नई कहानी
डॉ. नगेंद्र
- रस सिद्धांत
- रीतिकाव्य की भूमिका
- भारतीय समीक्षा
- मिथक और साहित्य
बाबू गुलाबराय
- साहित्यालोचन
- साहित्य के रूप
- नवरस
- काव्य के रूप
डॉ. बच्चन सिंह
- हिंदी आलोचना के बीज शब्द
- साहित्य का समाजशास्त्र और रूपवाद
- आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास
