Correct option is C
Ans. (c):
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के बारे में रामचंद्र शुक्ल की निम्नलिखित स्थापनाएँ हैं:
- निराला में बहुवस्तुस्पर्शिनी प्रतिभा है।
- निराला पर बंगभाषा की काव्यशैली का प्रभाव है।
व्याख्या:
रामचंद्र शुक्ल ने सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के व्यक्तित्व और काव्य शैली को बड़ी गहराई से समझा। उनके अनुसार, निराला एक बहुमुखी प्रतिभा के कवि थे, जो विविध विषयों को छूने और उनमें गहराई से उतरने की अद्भुत क्षमता रखते थे। इसके अलावा, निराला के साहित्य पर बंगाली भाषा और काव्यशैली का गहरा प्रभाव दिखाई देता है, जो उनके साहित्य को विशिष्ट बनाता है।
रामचंद्र शुक्ल के अनुसार:
- निराला में लाक्षणिक वैलक्षण्य (विशेषता और प्रतीकात्मकता) की प्रवृत्ति उतनी गहन नहीं थी, जितनी 'जयशंकर प्रसाद' और 'सुमित्रानंदन पंत' जैसे समकालीन कवियों में थी।
- निराला के व्यक्तित्व में छंद के बंधनों के प्रति अरुचि थी, और इसी प्रकार उन्हें सामाजिक बंधन भी अप्रिय लगते थे।
- निराला ने मुक्त छंद का प्रवर्तन भी किया ।
महत्वपूर्ण बिंदु:
बहुवस्तुस्पर्शिनी प्रतिभा:
निराला की कविताएँ विविध विषयों को समेटे हुए हैं। वे सामाजिक, राजनीतिक, और व्यक्तिगत भावनाओं को गहराई से व्यक्त करते हैं।बंगभाषा का प्रभाव:
निराला ने बंगाल में लंबे समय तक निवास किया, जिससे उनकी कविताओं में बंगाली साहित्य और काव्यशैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।लाक्षणिक वैलक्षण्य:
रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, यह गुण 'प्रसाद' और 'पंत' की कविताओं में अधिक प्रखर है, जबकि निराला इसमें सीमित थे।छंद और सामाजिक बंधन:
निराला को बंधनों में बँधना पसंद नहीं था। उनकी कविताएँ छंदमुक्त और स्वतंत्र अभिव्यक्ति का प्रतीक हैं।
