Correct option is B
सही उत्तर:(b) अनुक्रम: 2, 4, 3, 1
प्रकाशन वर्ष के अनुसार मोहन राकेश के कहानी संग्रहों का अनुक्रम इस प्रकार है:
नये बादल
- प्रकाशन वर्ष: 1957
- यह मोहन राकेश का पहला कहानी संग्रह है।
जानवर और जानवर
- प्रकाशन वर्ष: 1958
- इस संग्रह में मनोवैज्ञानिक कहानियों का संग्रह है।
एक और जिंदगी
- प्रकाशन वर्ष: 1961
- इसमें जीवन और संबंधों की गहराई को दर्शाने वाली कहानियाँ हैं।
फौलाद का आकाश
- प्रकाशन वर्ष: 1966
- यह संग्रह समाज और व्यक्ति के संघर्ष को दर्शाता है।
Information Booster:
मोहन राकेश (1925-1972)
मोहन राकेश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार, कहानीकार, और उपन्यासकार थे। वे नई कहानी आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे। उनकी रचनाएँ हिंदी साहित्य में गहराई, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण, और मानवीय संबंधों की जटिलताओं का सजीव चित्रण करती हैं।
जीवन परिचय:
- जन्म: 8 जनवरी 1925, अमृतसर, पंजाब
- मृत्यु: 3 जनवरी 1972, दिल्ली
- शिक्षा:
- पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.
- अध्यापन और संपादन कार्य में सक्रिय।
- विवाह: उनके वैवाहिक जीवन में तनावपूर्ण परिस्थितियाँ रहीं, जो उनकी रचनाओं में झलकती हैं।
रचनात्मक योगदान:
मोहन राकेश ने हिंदी साहित्य को आधुनिक रंगमंच और कथा साहित्य में एक नई दिशा दी। उनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं और संबंधों की गहराई, जीवन की जटिलताओं, और सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली।
प्रमुख विधाएँ और रचनाएँ:
नाटक:
- आषाढ़ का एक दिन (1958): यह उनका सबसे प्रसिद्ध नाटक है, जो कालिदास के जीवन पर आधारित है।
- लहरों के राजहंस (1963): बौद्ध धर्म और वैराग्य की पृष्ठभूमि पर आधारित।
- आधे-अधूरे (1969): यह पारिवारिक विघटन और रिश्तों की जटिलताओं पर केंद्रित है।
- पैरों तले जमीन (अधूरा)
उपन्यास:
- अंधेरे बंद कमरे (1961): व्यक्ति के मानसिक द्वंद्व और वैवाहिक तनाव का चित्रण।
- न आने वाला कल (1972): जीवन की अनिश्चितताओं पर आधारित।
- अंतराल -1972
- काँपता हुआ दरिया -(अधूरा)
कहानी संग्रह:
- नये बादल (1951): उनका पहला कहानी संग्रह।
- जानवर और जानवर (1956)
- एक और जिंदगी (1962)
- फौलाद का आकाश (1965)
यात्रा-वृत्तांत:
आखिरी चट्टान तक -1953
विशेषताएँ:
नई कहानी आंदोलन:
- मोहन राकेश ने नई कहानी आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उनकी कहानियाँ परंपरागत कथानक से हटकर मनोवैज्ञानिक, यथार्थवादी और आधुनिक जीवन के पहलुओं को दर्शाती हैं।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण:
- उनकी रचनाएँ मानव मन की जटिलताओं और भावनाओं को गहराई से उकेरती हैं।
यथार्थवाद:
- समाज और परिवार के यथार्थ को उनकी कहानियों और नाटकों में प्रमुखता से दिखाया गया है।
आधुनिक रंगमंच:
- उन्होंने हिंदी रंगमंच को नई दृष्टि और तकनीक दी।
- उनके नाटक आज भी मंचित किए जाते हैं और समाज के प्रति उनकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
