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ans. (C)
‘अरे यायावर रहेगा याद’ (1953 ई.) में संकलित 'परशुराम से तूरख़म' पाठ सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का एक प्रमुख यात्रावृत्त है। इस पाठ में लेखक ने एक टायर की रामकहानी और अपने चालक की कहानी को वर्णित किया है।
इस पाठ का विषय वस्तु यात्राओं के अनुभव और उनसे जुड़ी परिस्थितियों को बड़े ही जीवंत और रोचक तरीके से प्रस्तुत करता है।
- एक टायर की रामकहानी: यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों और छोटी-छोटी घटनाओं को लेखक ने प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है।
- लेखक के चालक की कहानी: चालक के साथ के अनुभव और उसकी भूमिका को भी इस पाठ में केंद्रित किया गया है।
‘अरे यायावर रहेगा याद में’ में 8 यात्रा वृतांतों का उल्लेख है-
1.परशुराम से तुरखम (एक टायर की राम कहानी)
2. किरणों की खोज
3. देवताओं की अंचल में
4. मौत की घाटी में
5. एलुरा
6. माझुली
7. बहता पानी निर्मल
8. सागर-सेवित, मेघ-मेखलित (कन्याकुमारी से नंदादेवी)
Information Booster:
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय':
अज्ञेय हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार, कवि, और यात्रावृत्त लेखक थे। उन्हें प्रयोगवाद और नई कविता आंदोलन का अग्रदूत माना जाता है। उनके लेखन में विचारों की गहराई, जीवन के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण, और मानव अनुभवों की सजीव अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
'एक बूँद सहसा उछली': परिचय
प्रकाशन वर्ष: 1960
शैली: यात्रावृत्त
‘एक बूँद सहसा उछली’ अज्ञेय का महत्वपूर्ण यात्रावृत्त है, जिसमें उन्होंने अपनी यात्राओं के अनुभवों को संवेदनशीलता और साहित्यिक शैली में व्यक्त किया है। यह कृति केवल एक यात्रा का विवरण नहीं है, बल्कि यह मानवीय सोच, भावनाओं और अनुभवों को गहराई से उकेरती है।
इस यात्रा वृत मे अज्ञेय विजिटिंग प्रोफेसर के नाते यूरोप की यात्रा पर गए थे ।
पाठ की प्रमुख विशेषताएँ
यात्रा का मनोवैज्ञानिक चित्रण:
- यह केवल बाहरी यात्रा नहीं है, बल्कि आत्मा और मन की भी यात्रा है।
- छोटी-छोटी घटनाओं और अनुभवों के माध्यम से गहरे जीवन-दर्शन का चित्रण।
प्रकृति और परिवेश:
- अज्ञेय ने अपनी यात्राओं में प्रकृति के अद्भुत चित्र प्रस्तुत किए हैं।
- पाठ में नदी, पहाड़, और जंगल का वर्णन बेहद सजीव और मार्मिक है।
मानव जीवन की प्रतीकात्मकता:
- ‘एक बूँद सहसा उछली’ में यात्रा को जीवन के संघर्ष और चुनौतियों का प्रतीक बनाया गया है।
- छोटी घटनाओं और समस्याओं के माध्यम से गहरे जीवन सत्य उजागर किए गए हैं।
भाषा और शैली:
- अज्ञेय की भाषा बेहद साहित्यिक और काव्यात्मक है।
- पाठक को एक अलग अनुभव देने के लिए भाषा को सरल और गहन रखा गया है।
Additional Knowledge:
अज्ञेय की प्रमुख कृतियाँ :
उपन्यास
शेखर: एक जीवनी – भाग 1 (1941), भाग 2 (1944)
- आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया यह उपन्यास प्रयोगवादी साहित्य का आधार है।
नदी के द्वीप – 1951
- प्रेम, रिश्तों और व्यक्ति की स्वतंत्रता पर आधारित एक प्रमुख उपन्यास।
अपने-अपने अजनबी – 1961
- आधुनिक जीवन की जटिलताओं और भावनाओं पर आधारित।
कहानी संग्रह
- विपथगा (1937)
- परंपरा (1944)
- कोठरी की बात (1945)
- शरणार्थी (1948)
- जयदोल (1951)
- अमरवल्लरी तथा अन्य कहानियाँ (1954)
- कड़ियाँ तथा अन्य कहानियाँ (1957)
- सटीक फूल तथा अन्य कहानियाँ (1960)
- ये तेरे प्रतिरूप (1961)
कविता संग्रह
भग्नदूत – 1933
- अज्ञेय की पहली काव्य-कृति।
चिंतन के क्षण – 1941
हरी घास पर क्षण भर – 1949
- प्रयोगवाद और नई कविता का प्रतीक।
इत्यलम – 1961
आँगन के पार द्वार – 1972
यात्रावृत्त
अरे यायावर रहेगा याद – 1953
- जीवन और यात्राओं का गहन अनुभव।
एक बूँद सहसा उछली – 1960
- यात्राओं के माध्यम से आत्मनिरीक्षण।
