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'"तुम्हारा ‘पथेर दाबी' पढ़ लिया। पुस्तक उत्तेजक है, अर्थात् अंग्रेजी शासन के विरुद्ध पाठकों के मन को अप्रसन्न करती है।' 'अवारा मसीहा' में यह किसका कथन
Question

'"तुम्हारा ‘पथेर दाबी' पढ़ लिया। पुस्तक उत्तेजक है, अर्थात् अंग्रेजी शासन के विरुद्ध पाठकों के मन को अप्रसन्न करती है।' 'अवारा मसीहा' में यह किसका कथन है?

A.

शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

B.

रवींद्रनाथ टैगोर

C.

द्विजेंद्रलाल राय

D.

भूपेंद्रनाथ बंद्योपाध्याय

Correct option is B


Ans. (b):

यह कथन रवींद्रनाथ टैगोर का है।

व्याख्या:

यह उद्धरण विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित जीवनी 'आवारा मसीहा' से लिया गया है, जो शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है। इसमें रवींद्रनाथ टैगोर ने शरतचंद्र के उपन्यास 'पथेर दाबी' के बारे में अपनी राय दी थी। उनका कहना था कि यह पुस्तक अंग्रेजी शासन के प्रति विद्रोहात्मक है और पाठकों के मन में असंतोष उत्पन्न करती है।

'पथेर दाबी':

  • यह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध उपन्यास है।
  • इसमें अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि को दर्शाया गया है।
  • इस उपन्यास को अंग्रेज सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था।

Information Booster:

आवारा मसीहा – परिचय और महत्व

‘आवारा मसीहा’ विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध जीवनी है, जो बांग्ला साहित्य के महान लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन पर आधारित है। यह जीवनी हिंदी साहित्य में एक अद्वितीय स्थान रखती है और इसे जीवनी साहित्य का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।

लेखक का परिचय: विष्णु प्रभाकर

  • जन्म: 21 जून 1912, मीरापुर, उत्तर प्रदेश।
  • मृत्यु: 11 अप्रैल 2009।
  • वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक, नाटककार और जीवनीकार थे।
  • उनकी रचनाएँ सामाजिक और मानवीय विषयों पर आधारित होती थीं।

आवारा मसीहा का कथानक

यह जीवनी शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन, व्यक्तित्व, और लेखन को संपूर्णता में प्रस्तुत करती है। लेखक ने शरतचंद्र के जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे उनके संघर्ष, सादगी, और उनके लेखन के पीछे की प्रेरणा को बड़ी गहराई और संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है।

मुख्य विषय:

  1. शरतचंद्र का बचपन:

    • गरीबी और कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण।
    • प्रारंभिक जीवन में शिक्षा और समाज के प्रति उनका दृष्टिकोण।
  2. साहित्यिक यात्रा:

    • उनके प्रसिद्ध उपन्यास जैसे देवदास, चरित्रहीन, पथेर दाबी, और श्रीकांत की रचना प्रक्रिया।
    • उनके लेखन में नारी स्वतंत्रता, समाज सुधार, और मानवता के प्रति चिंता।
  3. जीवन के संघर्ष:

    • गरीबी, समाज द्वारा उपेक्षा, और उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण हुए विवाद।
    • अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनके लेखन का योगदान।
  4. आवारा जीवन:

    • शरतचंद्र का जीवन एक साधारण, घुमक्कड़ और आत्मनिर्भर व्यक्ति का था।
    • उन्होंने समाज से अलग रहकर अपने लेखन के माध्यम से समाज को दिशा दी।
  5. उनकी मृत्यु:

    • शरतचंद्र के जीवन के अंतिम क्षण और उनके साहित्य का समाज पर प्रभाव।

जीवनी की विशेषताएँ

  1. गहन शोध:

    • विष्णु प्रभाकर ने इस जीवनी को लिखने में 14 वर्षों का समय लिया।
    • उन्होंने शरतचंद्र से जुड़े स्थानों का दौरा किया और उनके परिवार और मित्रों से साक्षात्कार किया।
  2. सजीव चित्रण:

    • लेखक ने शरतचंद्र के व्यक्तित्व और संघर्षों को इस प्रकार उकेरा कि पाठक उनके जीवन के हर पहलू को महसूस कर सके।
  3. सामाजिक समस्याएँ:

    • जीवनी में उस समय की सामाजिक समस्याओं जैसे जातिवाद, नारी शोषण, और स्वतंत्रता संग्राम को उजागर किया गया है।
  4. प्रेरणादायक कृति:

    • यह जीवनी पाठकों को जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने और अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए प्रेरित करती है।

शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का महत्व

  1. प्रसिद्ध कृतियाँ:
    • देवदास, पथेर दाबी, चरित्रहीन, श्रीकांत
  2. समाज सुधारक:
    • उन्होंने नारी स्वतंत्रता, समाज में सुधार, और अन्याय के खिलाफ अपने लेखन के माध्यम से आवाज उठाई।
  3. लोकप्रियता:
    • उनके साहित्य का प्रभाव भारतीय साहित्य और समाज पर आज भी देखा जा सकता है।

आवारा मसीहा का महत्व

  1. जीवनी साहित्य का मील का पत्थर:

    • हिंदी साहित्य में यह जीवनी अपनी शोधपूर्ण प्रस्तुति और सजीव चित्रण के लिए प्रसिद्ध है।
  2. सामाजिक और साहित्यिक दर्पण:

    • यह कृति समाज और साहित्य के बीच एक गहरे संबंध को उजागर करती है।
  3. प्रेरणा:

    • यह पाठकों को संघर्ष और आत्मनिर्भरता का संदेश देती है।

Additional Knowledge:

विष्णु प्रभाकर – हिंदी साहित्य के यशस्वी लेखक

विष्णु प्रभाकर हिंदी साहित्य के एक प्रमुख साहित्यकार, नाटककार, और जीवनीकार थे। उनका लेखन सामाजिक, मानवीय और प्रेरणादायक विषयों पर आधारित था। वे साहित्य और समाज के बीच गहरे संबंध को उजागर करने वाले साहित्यकारों में से एक थे।

संक्षिप्त परिचय

  • जन्म: 21 जून 1912, मीरापुर (उत्तर प्रदेश)।
  • मृत्यु: 11 अप्रैल 2009, दिल्ली।
  • पेशा: लेखक, साहित्यकार।
  • साहित्यिक शैली: कथा साहित्य, नाटक, जीवनी साहित्य।

जीवन परिचय

  1. प्रारंभिक जीवन:

    • विष्णु प्रभाकर का जन्म एक गरीब और साधारण परिवार में हुआ।
    • उनकी प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा के हिसार में हुई।
    • बचपन से ही उन्हें साहित्य और समाज सेवा में रुचि थी।
  2. शिक्षा:

    • उन्होंने स्नातक स्तर तक शिक्षा ग्रहण की और लेखन में रुचि विकसित की।
  3. व्यक्तित्व:

    • उनका जीवन सादगी और संघर्ष से भरा था।
    • वे गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित थे और उनके लेखन में यह स्पष्ट झलकता है।

साहित्यिक योगदान

1. जीवनी साहित्य:

  • ‘आवारा मसीहा’ (1974):
    • यह उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है।
    • यह महान बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।
    • इसे लिखने में उन्हें 14 वर्ष लगे।

2. उपन्यास:

  • क्षमादान 
  • कोई तो
  • अर्द्धनारीश्वर
    • यह उपन्यास सामाजिक असमानता और लैंगिक समस्याओं पर आधारित है।

3. कहानी संग्रह:

  • संघर्ष के बाद 
  • धरती अब भी घूम रही है
  • आदि ओर अंत 

4. नाटक:

            हत्या के बाद

  • नव प्रभात 
  • इन नाटकों में सामाजिक बदलाव और स्वतंत्रता संग्राम का चित्रण किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ

  1. सामाजिक चेतना:

    • उनके लेखन में सामाजिक समस्याओं जैसे गरीबी, शोषण, जातिवाद, और लैंगिक भेदभाव को गहराई से उकेरा गया है।
    • गांधीवादी दर्शन का प्रभाव उनकी रचनाओं में स्पष्ट दिखता है।
  2. मानवीय मूल्यों पर बल:

    • उनके साहित्य का केंद्र मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, और करुणा हैं।
  3. यथार्थवाद:

    • उनकी रचनाएँ समाज के यथार्थ का सटीक चित्रण करती हैं।
  4. शैली:

    • उनकी भाषा सरल, सहज और भावनात्मक थी, जो हर वर्ग के पाठकों को जोड़ती है।

पुरस्कार और सम्मान

  1. साहित्य अकादमी पुरस्कार (1993):

    • उनके उपन्यास अर्द्धनारीश्वर के लिए।
  2. पद्म भूषण (2004):

    • साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान के लिए।
  3. सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार।

  4. भारतीय ज्ञानपीठ का मूर्तिदेवी पुरस्कार।

प्रमुख विषय

  • स्वतंत्रता संग्राम और गांधीवादी विचारधारा।
  • सामाजिक असमानता और न्याय।
  • ग्रामीण और शहरी जीवन का यथार्थ।
  • नारी स्वतंत्रता और लैंगिक समानता।

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