Correct option is B
परिचय
भवभूति संस्कृत साहित्य के एक महान नाटककार और कवि थे, जो अपनी ओजस्वी और गंभीर शैली के लिए जाने जाते हैं।
व्याख्या
· सही विकल्प (3) B, C केवलम् है क्योंकि भवभूति को "कविमृगेन्द्रः" (कवियों में सिंह) और "वश्यवाक्" (जिसकी वाणी वश में हो, अर्थात् वाणी पर पूर्ण अधिकार रखने वाला) इन दो उपाधियों से सम्मानित किया गया था।
· कविमृगेन्द्रः यह उपाधि उनकी काव्य-प्रतिभा की श्रेष्ठता को दर्शाती है, जैसे सिंह जंगल का राजा होता है, वैसे ही वे कवियों में श्रेष्ठ थे।
· वश्यवाकः यह उपाधि उनकी भाषा पर असाधारण पकड़ और शब्दों के कुशल प्रयोग को इंगित करती है, जिससे वे अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत प्रभावी ढंग से व्यक्त कर पाते थे।
रोचक तथ्य
· मृगराजः (A): यह उपाधि किसी अन्य कवि से संबंधित हो सकती है, लेकिन भवभूति से नहीं।
· परिणतप्रज्ञः (D): यह उपाधि भी भवभूति से संबंधित नहीं है। यह किसी ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जिसकी बुद्धि परिपक्क और अनुभवी हो।