Correct option is A
परिचय: संस्कृत छन्दों में अक्षरों की संख्या निश्चित होती है। वैदिक छन्द में प्रायः तीन या चार पाद होते हैं, जबकि अनुष्टुप् लौकिक साहित्य का सबसे प्रचलित छन्द है।
व्याख्या:
a. अनुष्टुप् → (i) 8-8-8-8
स्वरूप: अनुष्टुप् लौकिक संस्कृत का सबसे महत्त्वपूर्ण और प्रचलित छन्द है।
अक्षर संख्या: इसमें चार पाद (चरण) होते हैं, और प्रत्येक पाद में आठ (8) अक्षर होते हैं। इस प्रकार, पूरे श्लोक में 4×8 = 32 अक्षर होते हैं।
उदाहरण: वाल्मीकि रामायण, महाभारत, और मनुस्मृति में इसका व्यापक उपयोग हुआ है।
b. त्रिष्टुप् → (ii) 11-11-11-11
स्वरूप: त्रिष्टुप् वैदिक साहित्य (विशेषकर ऋग्वेद) का एक प्रमुख छन्द है।
अक्षर संख्या: इसमें सामान्यतः चार पाद होते हैं, और प्रत्येक पाद में ग्यारह (11) अक्षर होते हैं।
c. जगती → (iii) 12-12-12-12
स्वरूप: जगती भी वैदिक साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण छन्द है।
अक्षर संख्या: इसमें सामान्यतः चार पाद होते हैं, और प्रत्येक पाद में बारह (12) अक्षर होते हैं।
d. गायत्री → (iv) 8-8-8
स्वरूप: गायत्री वैदिक छन्दों में सबसे छोटा और सबसे पवित्र माना जाता है।
अक्षर संख्या: इसमें केवल तीन पाद (त्रिपदा) होते हैं, और प्रत्येक पाद में आठ (8) अक्षर होते हैं। इस प्रकार, पूरे मन्त्र में 3× 8 = 24 अक्षर होते हैं।